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    संडे की मस्ती 2014-08-17
    2014-08-18 14:35:00 cri

    दरअसल ईष्र्या की जड़ में तुलना ही है। इससे छोटी उम्र में बच्चा ईष्र्या को अपना सहारा मान लेता है। और जिस सहारे की नींव ही पहले से खोखली हो, नकारात्मक हो, उससे भविष्य की उम्मीद क्या की जा सकती है? बच्चे का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। ऐसे में बच्चा या तो कुंठित हो जाता है या चालाक और तिकड़मी। अभिभावक नहीं चाहते कि बच्चा इन दोनों में से कोई भी ट्रेड अपनाए। लेकिन शुरुआत तो वे ही करते हैं। आगे-आगे जिंदगी और पीछे-पीछे एक असंतुष्ट सी यात्रा। इस अधूरी सी यात्रा में जो मिला, उसकी कद्र नहीं होती। जो नहीं मिला, उसका विलाप चलता रहता है। तुलना जिस दिन आपके लिए गैरजरूरी हो जाती है, उस दिन से आपके आस-पास ईष्र्या के रहने की भी कोई वजह नहीं रह जाती।

    अखिल- चलिए दोस्तों, अब मजेदार जोक का वक्त हो गया है...

    एक बार एक पागल कुत्ते पर बैठकर घूम रहा था।

    दूसरे पागल ने उससे कहा : अबे, तुझे पुलिस पकड़ लेगी!

    पहले पागल ने पूछा : क्यों?

    दूसरे पागल ने जवाब दिया : क्योंकि तूने हेल्मेट नहीं पहना।

    पहले पागल ने कहा : अरे बुद्धू, नीचे देख। 4 वीलर है ये! 2 वीलर नहीं (हंसने की आवाज)

    एक बार भीड़ भरी बस में सफर करते समय एक खूबसूरत युवती का पांव एक बुजुर्ग व्यक्ति के पांव पर पड़ा। युवती बोली- सॉरी।

    बुजुर्ग ने उसकी ओर देखते हुए कहा- मेंशन नॉट।

    थोड़ी देर बाद एक युवक वहां से निकलने लगा तो उसका पांव भी उसी बुजुर्ग के पांव पर पड़ा।

    बुजुर्ग ने उस व्यक्ति की तरफ गुस्से में देखा और बोला- देखकर नहीं चल सकता है क्या

    उस व्यक्ति ने कहा- मेरी सॉरी की spelling गलत थी क्या?

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