अखिल- दोस्तों, आपका एक बार फिर स्वागत है इस मस्ती भरे कार्यक्रम में, जिसका नाम है संडे की मस्ती, मैं हूं अखिल पाराशर।
अखिल- लिली जी... आप कौन से नये अजूबे के बारें में बात कर रही थी।
लिली- दोस्तों, चीन के एक चिड़ियाघर में एक पांडा ने तीन बच्चों को जन्म दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि ये दुनिया की पहली ऐसी घटना है। गुआंगज़ू के चाइमलॉंग सफ़ारी पार्क के अधिकारियों ने कहा कि पांडा बच्चों का जन्म 29 जुलाई को हुआ और 'ये दुनिया के लिए एक नया अजूबा है।' चिड़ियाघर वालों ने बताया कि, ''एक साथ जन्म लेने वाले तीन पांडा का जीवित रहना दुनिया में अपनी तरह की अदभुत घटना है.'' लेकिन उन्होंने साथ में ये भी बताया कि नवजात पांडों की मृत्यु दर बहुत ज़्यादा है। अभी इन बेबी पांडा के नाम नहीं रखे गये है और न ही इनके लिंग को लेकर कोई घोषणा हुई है।
अखिल- दोस्तों, हम आपको बता दें कि पांडा की जन्म दर बहुत कम है क्योंकि मादा पांडा साल में केवल दो या तीन दिन ही गर्भ धारण कर पाती हैं। जंगली पांडा दो या तीन साल में केवल एक बच्चे को जन्म दे पाती हैं. पांडों की संख्या लगातार घटती जा रही है और WWF के अनुसार इस समय चीन के जंगलों में 1600 पांडा हैं। 2002 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार इनकी संख्या लगभग एक हज़ार थी।
अखिल- चलिए दोस्तों, अब हम आपको एक कहानी सुनाते हैं।
दो वैज्ञानिक आपस में बातचीत कर रहे थे। उनमें एक बुढ़ा था और एक जवान था। बुढ़े वैज्ञानिक ने कहा, 'चाहे विज्ञान कितनी भी तरक्की क्यों न कर ले, लेकिन वह अभी तक ऐसा कोई उपकरण नहीं ढूंढ पाया, जिससे चिंता पर लगाम कसी जा सके।' युवा वैज्ञानिक मुस्कराते हुए बोला, 'आप भी कैसी बातें करते हैं। अरे चिंता तो मामूली सी बात है। भला उसके लिए उपकरण ढूंढने में समय क्यों नष्ट किया जाए?' बुढ़े वैज्ञानिक ने कहा, 'चिंता बहुत भयानक होती है। यह व्यक्ति का सत्यानाश कर देती है ।' लेकिन युवा वैज्ञानिक उनसे सहमत नहीं हुआ।
बुढ़ा वैज्ञानिक उसे अपने साथ घने जंगलों की ओर ले गए। एक विशालकाय वृक्ष के आगे वे खड़े हो गए। युवा वैज्ञानिक बोला, 'आप मुझे यहां क्यों लाए हैं?' बुढ़े वैज्ञानिक ने कहा, 'जानते हो, इस वृक्ष की उम्र चार सौ साल बताई गई है।' युवा वैज्ञानिक बोला, 'अवश्य होगी।' बुढ़े वैज्ञानिक ने समझाते हुए कहा, 'इस वृक्ष पर चौदह बार बिजलियां गिरी। चार सौ सालों से अनेक तूफानों का इसने सामना किया।' अब युवा वैज्ञानिक ने झुंझला कर कहा, 'आप साबित क्या करना चाहते हैं?'
बुढ़ा वैज्ञनिक बोला, 'धैर्य रखो। यहां आओ और देखो कि इसकी जड़ में दीमक लग गया है। दीमक ने इसकी छाल को कुतर-कुतर कर तबाह कर दिया है।' युवा वैज्ञानिक ने पूछा, 'अब निष्कर्ष तो बताइए।' बुढ़ा वैज्ञानिक बोला, 'जिस तरह यह विशाल वृक्ष बिजली से नष्ट नहीं हुआ, तूफान से गिरा नहीं लेकिन मामूली दीमक उसे चट कर गया, उसी तरह चिंता का दीमक भी एक सुखी-समृद्ध और ताकतवर व्यक्ति को चट कर जाता है।' और उसके बाद युवा वैज्ञानिक उनसे सहमत हो गया।
अखिल- दोस्तों, इस कहानी से हमें प्रेरणा मिलती है कि चिंता हमारे जीवन के लिए बहुत खतरनाक है। हमें चिंता नहीं करनी चाहिए। और स्वामी विवेकानंद ने सही कहा था कि चिंता और चिता में सिर्फ एक बिंदु का फर्क होता है, अन्यथा दोनों समान हैं। यह कहना बिल्कुल सही है, क्योंकि कहते हैं कि चिंता ही चिता का कारण बन जाती है। इसलिए जीवन से इस चिंतारूपी चिता को विदा करके आप अपने मस्तिष्क को शांत रख सकते हैं।
चलिए.. अब हम आपको बताते हैं कि पेट्रोल पंप वाले हमें कैसे धोखा देते है।
दोस्तों, यह तो आप जानते ही हैं कि हर पेट्रोल पंप में पेट्रोल के लिए 1 लीटर 2 लीटर के नाप होते है तो वो 1 लीटर या 2 लीटर में चोरी नहीं कर सकते इसलिए वो सेटिंग करते है 100 रुपये में 200 रुपये में 500 रुपये में जिससे उनकी चोरी कभी पकड़ में नहीं आती क्योंकि 100 रुपये का पेट्रोल हम कभी नाप नहीं कर सकते इसलिए वो कम पेट्रोल का सेटिंग हमेशा 100 200 300 500 1000 में ही करते है।
इसलिए आपसे निवेदन है कि जब भी आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाओ आप 105 रुपये, 205 रुपये या 233 रुपये, ऎसे ऑड फिगर में भरवाओ तो आपको कभी भी कम पेट्रोल नहीं मिलेगा। आप ऐसा करके देखिए आपको जरूर फायदा होगा।









