टिप्पणी

हांगचोउ में चीन का पहला 'ऑल-इन-वन' इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सर्विस स्टेशन शुरू

हांगचोउ में चीन का पहला 'ऑल-इन-वन' इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सर्विस स्टेशन शुरू

दक्षिण पूर्व चीन के चेजियांग प्रांत के हांगचोउ के जिउहे रोड इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सर्विस स्टेशन देश का पहला ऐसा सर्विस स्टेशन है जिसमें सौर ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, फास्ट चार्जिंग, अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग की सुविधाएँ एक साथ उपलब्ध हैं। इस स्टेशन की छत पर लगभग 3,300 वर्ग मीटर में 782.19 किलोवाट के सौर पैनल लगे हैं, जो सालाना लगभग 860,000 किलोवाट-घंटे बिजली पैदा करते हैं और लगभग 483 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करते हैं। स्टेशन में 113 चार्जिंग पॉइंट हैं, जिनमें से सभी फास्ट/अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग से लैस हैं। साथ ही, BYD, Huawei, XPeng जैसे प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन ब्रांडों के अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग जोन और CATL तथा NIO के बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी मौजूद हैं। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों की "चार्जिंग पॉइंट ढूँढने में कठिनाई, धीमी चार्जिंग और लंबी कतार" जैसी समस्याओं का समाधान करना है।
18-Sep-2026
BRICS और चीन-भारत संबंध

हाल ही में, भारत ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। इस सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग और बदलती हुई विश्व व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खास बात यह रही कि इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। लंबे समय बाद दोनों नेताओं की इस मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। इसे समझने के लिए CGTN हिन्दी संवाददाता ने जेएनयू के चीनी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार से ख़ास बातचीत की। 

18-Sep-2026
20 साल पहले जापान-जर्मनी का राज था, आज ये शहर भारत का नंबर-1 पार्टनर बन गया!

क्या आपको पता है... जब भारत में ऊँची-ऊँची इमारतें बनती हैं... जब गाड़ियों के इंजन तैयार होते हैं... जब नए प्रोजेक्ट्स की नींव पड़ती है... तो उसमें एक छोटा सा हिस्सा होता है — चांग्शा नाम के शहर का! ये चीन का वो शहर है जो भारत के लिए: ·हाई-टेक क्रेन मशीनें बनाता है — जिनसे हमारी बिल्डिंग्स आसमान छू रही हैं ·प्रिसिज़न इंजन पार्ट्स सप्लाई करता है — जो हमारी गाड़ियों को ताकत देते हैं ·भारतीय छात्रों को दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ाता है — स्कॉलरशिप के साथ! और सबसे दिलचस्प बात? 20 साल पहले: भारत में सिर्फ जापान और जर्मनी की मशीनें चलती थीं आज: उसी मार्केट में 70-80% मशीनें चांग्शा से जा रही हैं! यानी जब आप किसी नई बिल्डिंग को बनते देखते हैं... या किसी नई कार को लॉन्च होते देखते हैं... तो उसमें चांग्शा की मेहनत छिपी होती है! इस वीडियो में हम आपको ले चल रहे हैं चांग्शा के अंदर — जहाँ से भारत की तरक्की को पावर मिलती है!

14-Sep-2026