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थांगखा चित्रकार शी होताओ की तमन्ना
2012-12-28 17:34:51

थांगखा चित्रकार शी होताओ ने कहा कि उनके प्रदर्शनी हॉल में प्रदर्शित चीज़ें अधिकतर मूल्यवान नहीं हैं, लेकिन इनसे तिब्बती संस्कृति जाहिर हो सकती है। उनके ऐसा करने का उद्देश्य बहुत सरल है, जोकि परम्परागत तिब्बती संस्कृति को विरासत के रूप में जारी करेंगे, ताकि भावी पीढ़ी के लोग इसकी जानकारी ले सकें। उन्होंने कहा:"मैं इस प्रकार की संस्कृति का प्रदर्शन करना चाहता हूँ, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों, अनुसंधान करने वाले लोगों और तिब्बती संस्कृति प्रेमियों को सुविधा मिल सके। मेरे द्वारा इस प्रदर्शनी हॉल की चीज़ें सुरक्षित रखने से भावी पीढ़ी के लोग भी देख सकेंगे। इस वर्ष मैं 70 हो गया, प्राचीन संस्कृति की खुदाई अधिक है और मैं ज्यादा देख चुका हूँ। अगर मैं कर सकता हूँ, तो मैं यथा कोशिश करूंगा, ताकि दूसरे लोगों को प्रभावित कर सकूं।"

दर्जनों वर्षों में थांगखा चित्र बनाने, बहुत ज्यादा शिष्यों को शिक्षा देने और तिब्बती शैली के पारिवारिक होटल खोलने से शी होताओ ने पैसे कमाए हैं। लेकिन यह 30 लाख युआन की पूंजी वाली प्रदर्शनी इमारत ने उनकी जमा पूंजी खर्च हो गई है। शी होताओ ने कहा कि परिवारजनों के समर्थन से वे यह काम जारी करते हैं। उनकी पत्नि चो माओ थू जाति की महिला है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म की एक श्रद्धावान अनुयायी है। उसने कहा कि पति जी परोपकारी कार्य कर रहे हैं और वह उसका समर्थन करती रहेंगी। चो माओ ने कहा:"मुझे बहुत खुश हूँ। पति जी को ऐसे करने में भी बेहद खुशी हुई। परोपकारी कार्य करना अच्छा है, इससे हमारी वर्तमान और अगली पीढ़ी का जीवन अच्छा होगा। मैं इसका समर्थन करती हूँ और मैंने कभी विरोध नहीं किया।"

शी होताओ ने परिचय देते हुए कहा कि उनके प्रदर्शनी हॉल का निर्माण समाप्त होने वाला है। अगले वर्ष के वसंत में औपचारिक तौर पर दर्शकों के लिए खोला जाएगा। प्रदशर्नी हॉल के द्वार पर कोई ब्रांड नहीं लगाया जाएगा और दर्शक से टिकट भी नहीं मांगेगा। सभी लोग इसमें दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे तिब्बती संस्कृति का प्यार करने और सम्नान करने वाले लोगों के साथ दोस्त बनाना चाहते हैं। शी होताओ ने कहा:" इस प्रदर्शनी हॉल को बनाने के पीछे मेरा उद्देश्य न तो कोई ब्रांड बनाना है और न ही पैसा कमाना। कोई भी व्यक्ति इस में दर्शन कर सकता है। पुराने समय में तिब्बती संस्कृति, मसलन् रेकोंग कला का विकास हमारे यहां शुरू हुआ था, वह कदम दर कदम परिपक्व हो रहा है। मुझे लगता है कि इसमें कोई न कोई वस्तु और संस्कृति खो गई है। मैं अपने प्रयास के माध्यम से कुछ खोई हुई वस्तुओं को बहाल करना चाहता हूँ। यह मेरी इच्छा भी है। यह कार्य कहां तक जारी रखा जाएगा, मैं नहीं कह सकता लेकिन मैं तो इस काम को जारी रखूंगा। जबतक मुझमें शक्ति है तबतक मैं ये काम करता रहूंगा।"


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