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थांगखा चित्रकार शी होताओ की तमन्ना
2012-12-28 17:34:51

शी होताओ ने कहा कि थांगखा चित्र बनाने के तरीकों और उपायों में कोई रहस्य नहीं होता, सिर्फ़ चित्रकार की बुद्धि पर निर्भर रहता है। उनके विचार में एक श्रेष्ठ थांगखा चित्रकार बनने के लिए"प्रतिभा"होने के साथ साथ "भाग्य" भी होना चाहिए।"प्रतिभा"का अर्थ व्यक्ति में कलात्मक गुणवत्ता और रचनात्मक क्षमता होना है, जबकि"भाग्य"तो थांगखा कला के प्रति उसका प्रेम और तिब्बती संस्कृति के प्रति उसकी समझ और विचार है। शी होताओ ने कहा कि थांगखा मात्र सरल चित्र नहीं है, वह धर्म, संस्कृति, विश्वास और कला को जोड़ने वाली कला ही है। उन्होंने कहा:"मुझे लगता है कि थांगखा चित्र बनाने के लिये प्रतिभा और भाग्य दोनों की आवश्यकता है। भाग्य का मतलब है कि मुझे इस प्रकार की कला पसंद है और मैं दिन रात इसे चित्रित करना चाहता हूं। एक थांगखा चित्र बनाने के लिए बौद्ध सूत्र में संबंधित पैमाना निर्धारित किया जाता है। लेकिन उसके विषयों में चित्रकार के कल्पना की आवश्यकता है। थांगखा में बुद्ध मुर्ति के अलावा फूल, पेड़, घास, चिड़िया, पर्वत, जल और बादल इत्यादि, इन्हें चित्र में कैसे शामिल किया जाता है?इसके लिये चित्रकार में बहुत अधिक कल्पनात्मक शक्ति चाहिए। दूसरी तरफ़ थांगखा चित्र बनाने के वक्त चित्रकार को शांत होकर बहुत गंभीरता और लगन के साथ काम करना चाहिए। ऐसा करने से एक अच्छा थांगखा बना सकता है।"

शी होताओ ने जानकारी देते हुए कहा कि बौद्ध सूत्रों के संबंधित निर्धारण के मुताबिक चित्रकार को थांगखा बनाने के पूर्व नहाना चाहिए, चित्र करने के वक्त आज्ञापत्र का पालन करना चाहिए। शरीर और मन को साफ़ करने से धर्म के प्रति चित्रकार की इमानदारी जाहिर होती है। शी होताओ के मुताबिक थांगखा बनाने के दौरान सर्वप्रथम प्रमुख बुद्ध की मूर्ति चित्रित की जानी चाहिए, फिर बाकी मूर्ति और पर्वत, नदियां, सूर्य, चांद, इंद्रधनुष, नीले आसामान, सफेद बादल, फूल, घास, पेड़, चड़िया, जानवर और भवन आदि बनाना चाहिए। एक बढ़िया थांगखा चित्र बनाने के लिए आम तौर पर कई माह, यहां तक कि एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है।

पिछली शताब्दी के 90 वाले दशक के शुरू से ही छिंगहाई प्रांत की थोंगरन कांउटी की रेकोंग थांगखा चित्र कला बाज़ार में प्रविष्ट हुई, जो ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय हो रही है। थोंगरन कांउटी से हज़ारों किलोमीटर दूर रहने वाले कई लोग पत्रों के माध्यम से शी होताओ से थांगखा मांगते हैं। बढ़िया थांगखा चित्र बनाने से शी होताओ के जीवन में भारी परिवर्तन आया है। उन्होंने एक लाख 80 हज़ार युआन से एक तिब्बती शैली की इमारत स्थापित की और कार भी खरीदी। उन्होंने तिब्बती शैली का पारिवारिक होटल भी खोला है, पर्यटकों का सत्कारकरने के साथ साथ तिब्बती संस्कृति का प्रसार प्रचार भी करते हैं।

लम्बे समय में थांगखा चित्र रचने में शी होताओ ने तिब्बती बौद्ध धर्म की प्रचुर जानकारी हासिल की। वर्तमान में वे एक बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं, जो घर में जमा राशि के सारे भाग का खर्च होगा। शी होताओ के घर के आंगन के पास 100 वर्ग मीटर वाले तिब्बती शैली के लकड़ी के भवन का निर्माण किया जा रहा है। कई मज़दूर लकड़ी काट रहे हैं, कई दीवार पर चित्र लाइन चित्रित कर रहे हैं और कई लोग निर्माण के साजो सामान बना रहे हैं…… शी होताओ ने जानकारी देते हुए कहा कि यह इमरात एक छोटा प्रदर्शनी हॉल है, जिसमें अपने आप द्वारा रची गई थांगखा चित्र के अलावा, थांगखा कला से संबंधित ऐतिहासिक सामग्री और तिब्बती संस्कृति से जुड़े साजो सामान भी प्रदर्शित किये जाते हैं। प्रदर्शनी हॉल में प्रदर्शित वस्तुएं ज्यादातर शी होताओ द्वारा खुद छिंगहाई और कानसू जैसे प्रांतों के तिब्बती बहुल क्षेत्रों में दूरस्थ कृषि और पशुपालन इलाकों से ढूंढ़ लिया गया है। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा:"मैंने बहुत पुराने और दूरस्थ इलाके और पशुपालन क्षेत्रों में जाकर इन वस्तुओं का संग्रहण किया है, जो तिब्बती संस्कृति से संबंधित हैं, जिनमें तिब्बतियों के जीवन से संबंधित वस्तुएं शामिल हैं, मसलन् पशुपालन क्षेत्र में याक, गाय और घोड़ा पालन करने वाले साधन, कृषि उत्पाद, जुताई का साधन, खाना पकाने का साधन इत्यादि। ये चीज़ें देखने में बहुत सरल हैं, लेकिन बहुत उपयोगी है। पुराने जमाने में लोग कैसे सोचते थे?उस समय संस्कृति कैसी थी और कहां से सीखी थी?ये सब प्राचीन काल में मानव जाति की बुद्धि जाहिर होते हैं। उनकी जीवन शैली आज देखने में आश्चर्यजनक लगती है। इसी कारण मैं इन वस्तुओं का संग्रहण करता हूँ। इन चीज़ों का मूल्य कम है, लेकिन आज ये कम ही देखी जाती हैं, मैं इन प्राचीन और ऐतिहासिक अर्थ वाली वस्तुओं को प्रदर्शित करना चाहता हूँ। यह बहुत दिलचस्प बात है।"

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