शनिवार को चीन की राजधानी पेइचिंग में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित डांस-ड्रामा “आदि काव्य” ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कहानियां सीमाओं में नहीं बंधतीं।
आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। देशों के बीच तनाव और व्यापार को लेकर खींचतान बढ़ रही है। कई देश अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए टैरिफ और सुरक्षा वाली नीतियाँ अपना रहे हैं, जिससे दुनिया का संतुलन बदल रहा है। ऐसे समय में एशिया एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है। इसी में Boao Forum for Asia जैसे मंच अहम भूमिका निभाते हैं, जो देशों के बीच बातचीत और सहयोग को बढ़ाते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े देशों की भूमिका यहां बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इन्हीं मुद्दों पर बात करने के लिए हमारे साथ हैं जेएनयू की प्रोफेसर और‘नेशन-स्टेट डायलॉग’की फाउंडर डॉ. गीता कोछड़।
हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप ने नई दिल्ली में स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की प्रोफेसर और ‘नेशन-स्टेट डायलॉग’ की संस्थापक डॉ. गीता कोछड़ से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने बोआओ फ़ोरम और एशिया की बदलती आर्थिक दिशा पर विस्तार से अपने विचार रखे।
हाल के वर्षों में चीन के आर्थिक परिदृश्य में एक सुंदर बदलाव देखने को मिला है, जिसे 'फूल अर्थव्यवस्था' के नाम से जाना जाता है। यह सिर्फ बगीचों और गुलदस्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज यह चीन के ग्रामीण परिदृश्य, पर्यटन और स्थानीय उद्योगों को पूरी तरह से बदल रही है। देखते हैं यह 'खिलता हुआ' बाजार कैसे गांवों की तकदीर बदल रहा है।
चीन की राजधानी पेइचिंग में भारतीय दूतावास ने 14 मार्च को वसंत मेले का आयोजन किया। इस मेले में भारतीय संस्कृति की विविधता और रंगों की सुंदर झलक देखने को मिली।
चीन में हर साल होने वाली “टू सेशंस” यानी “दो सत्र” देश की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों में से एक मानी जाती है। इस दौरान देश के नेता और प्रतिनिधि इकट्ठा होकर चीन के विकास, अर्थव्यवस्था और आने वाली नीतियों पर चर्चा करते हैं। इन बैठकों में NPC और CPPCC की बैठक होती है। इसमें सरकार अपनी कामकाज की रिपोर्ट पेश करती है, आर्थिक विकास के लक्ष्य तय किए जाते हैं और देश के भविष्य से जुड़े कई अहम फैसलों पर विचार किया जाता है। इसी पर चर्चा करने के लिए, हमारे साथ जुड़ गये हैं जेएनयू के प्रोफेसर और चीनी और दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार।
चीन की राजनीतिक व्यवस्था में आयोजित होने वाला वार्षिक‘दो सत्र’केवल एक विधायी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह देश की भविष्यगामी नीतियों का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत संकेतक भी है।
हर साल मार्च आते ही चीन की राजधानी बीजिंग में महत्वपूर्ण पॉलिटीकल सीज़न शुरू हो जाता है, जहां देश की संसद और उसके सबसे बड़े सलाहकार मंच की वार्षिक बैठकें होती हैं। यह वह समय होता है जब चीन अपने आने वाले सालों की दिशा तय करता है। इसे कहा जाता है ‘दो सत्र’ या ‘लियांगहुई’। नाम भले सरल हो, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं। ‘दो सत्र’ सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं। यह चीन के आने वाले वर्षों का खाका हैं। यहां देश की आर्थिक रफ्तार, तकनीकी दिशा और वैश्विक भूमिका तय होती है।
हर साल मार्च आते ही चीन की राजधानी पेइचिंग में महत्वपूर्ण पॉलिटीकल सीज़न शुरू हो जाता है, जहां देश की संसद और उसके सबसे बड़े सलाहकार मंच की वार्षिक बैठकें होती हैं। यह वह समय होता है जब चीन अपने आने वाले सालों की दिशा तय करता है। इसे कहा जाता है ‘दो सत्र’ या ‘लियांगहुई’। नाम भले सरल हो, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं। ‘दो सत्र’ सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं। यह चीन के आने वाले वर्षों का खाका हैं। यहां देश की आर्थिक रफ्तार, तकनीकी दिशा और वैश्विक भूमिका तय होती है।
चाइनीज़ लालटेन फेस्टिवल चाइनीज़ लूनर न्यू ईयर का ही एक उत्सव है। चाइना में लालटेन फेस्टिवल को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है, वो इसलिए, क्योंकि यह लूनर न्यू ईयर का आखिरी दिन और वसंत की शुरुआत का प्रतीक है। चाइनीज़ भाषा में, पारंपरिक चाइनीज़ कैलेंडर के पहले महीने को “युआन” कहा जाता है, और प्राचाइना काल में, रात को “श्याओ” कहा जाता था। इस तरह लालटेन फेस्टिवल का चाइनीज़ नाम "युआन श्याओ" पड़ गया। लालटेन फेस्टिवल, या "युआन श्याओ फेस्टिवल", चाइना में एक खास उत्सव है। यह पारंपरिक चाइनीज़ कैलेंडर, आमतौर पर फरवरी या मार्च के पहले महीने के 15वें दिन होता है। इस साल, यह त्योहार 3 मार्च को होगा क्योंकि चाइनीज़ नया साल 17 फरवरी को शुरू हुआ था। यह त्योहार चाइनीज़ न्यूईयर समारोह के अंत का प्रतीक है, जो पहले लूनर महीने के पहले दिन शुरू हुआ था।
चीन की राजधानी बीजिंग में रविवार, 1 मार्च 2026 को रंगों का उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। प्रवासी भारतीय समुदाय ‘बीजिंग इंडियन्स’ के तत्वावधान में आयोजित इस होली समारोह में करीब 300 लोगों ने भाग लिया। ख़ास बात यह रही कि इस आयोजन में न केवल भारतीय समुदाय बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय चीनी नागरिकों और अन्य देशों के लोग भी शामिल हुए। रंग, संगीत और मेल-मिलाप के इस उत्सव ने बीजिंग की फिज़ा को कुछ देर के लिए भारतीय रंगों से सराबोर कर दिया।
आज की ज़िंदगी में AI कोई दूर की चीज़ नहीं रह गई है। सुबह आंख खुलते ही फोन देखना, मैप से रास्ता खोजना, ऑनलाइन पेमेंट करना या किसी ऐप से काम निपटाना... ये सब AI की ही देन है। हम रोज़ इसका इस्तेमाल करते हैं, कई बार बिना सोचे। लेकिन असली सवाल ये है कि आने वाले वक्त में यही AI हमारे समाज, हमारी सोच, हमारी संस्कृति और कानूनों को कैसे बदलेगा? आज दुनिया में बहस ये नहीं रह गई है कि सबसे तेज़ मशीन किसके पास है, बल्कि ये है कि इस ताकत का इस्तेमाल इंसानों की भलाई के लिए कैसे हो। “इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026” इसी सोच से जुड़ा हुआ है। यह समिट बताता है कि AI का भविष्य मिल-जुलकर बनेगा, अकेले दौड़ने से नहीं।