हाल ही में, चीन के संबंधित विभागों से पता चला कि पिछले पाँच वर्षों में, शीत्सांग(तिब्बत) ने परिवहन विकास में अपनी कमियों को दूर किया है, राजमार्ग, रेल, नागरिक उड्डयन और डाक अवसंरचना में व्यापक सुधार किया है। और परिवहन के विभिन्न साधनों को एक नेटवर्क में एकीकृत किया गया।
दिसंबर 2023 में शुरू होने के बाद से, चिलोंग सीमा व्यापार बाजार में चेहरे की पहचान सत्यापन प्रणाली ने लगातार अपने कार्यों को बेहतर बनाया है और पारंपरिक "फिंगरप्रिंट + आईडी" सत्यापन प्रणाली को प्रतिस्थापित कर दिया है।
हाल ही में शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के आली प्रिफेक्चर की काअर काउंटी में एक फोटोवोल्टाइक (सौर) और ऊर्जा भंडारण परियोजना को सफलतापूर्वक बिजली ग्रिड से जोड़ दिया गया।
6 जुलाई को शीत्सांग(तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण मामलों के विभाग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि "14वीं पंचवर्षीय योजना(2021-2025)" की अवधि के दौरान शीत्सांग के ग्रामीण निवासियों की प्रति व्यक्ति प्रयोज्य आय में औसतन 9.7% वार्षिक वृद्धि हुई, जो देश में पहले स्थान पर है।
लोगों की चिकित्सा देखभाल तक पहुंच में तीन बदलाव लाने के लिए ल्हासा "चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने" की परियोजना को जोरदार तरीके से बढ़ावा देगा।
ल्हासा अपने विशिष्ट "पठारी विशेषताओं" और "हरित पारिस्थितिकी" का लाभ उठाकर ल्हासा की विशिष्ट औद्योगीकरण की दिशा में एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा।
1 जुलाई को छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे के उद्घाटन की 20वीं वर्षगांठ है। तस्वीर में छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे पर ल्हासा नदी के भव्य पुल को पार करती हुई एक ट्रेन दिखाई दे रही है, जिसके साथ ही पोटाला महल भी दिख रहा है। "ल्हासा जाने वाली ट्रेन पकड़ो, जादुई पोटाला महल देखने के लिए..." ये शब्द एक लोकप्रिय गीत के बोल हैं। 1 जुलाई, वर्ष 2006 में छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे के गोलमुद-ल्हासा खंड के खुलने के बाद से, इसी गीत के प्रसार के चलते, छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे और पोटाला महल का नाम मजबूती से जुड़ गया है।
छिंगहाई-शित्सांग रेलवे को आज विश्व के अद्भुत इंजीनियरिंग चमत्कारों में गिना जाता है। लेकिन इसकी लोहे के पटरियों से इतर, इस रेलमार्ग ने तिब्बती पठार के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मूक-साक्षी की तरह बदल दिया है। खासतौर पर छिंगहाई झील—जो चीन की सबसे बड़ी अंतर्देशीय झील है—इस बदलाव का प्रत्यक्ष उदाहरण है। यहाँ रेल ने न सिर्फ यात्रा को सरल बनाया, बल्कि स्थानीय जीवन और पर्यावरण के बीच एक नया समीकरण भी रचा।
दक्षिण पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की पहली विद्युतीकृत रेलवे — ल्हासा-न्यिंगची रेलवे ने 25 जून को अपनी पाँचवीं वर्षगांठ मनाई। पिछले पाँच वर्षों में इस मार्ग पर 62.5 लाख से अधिक यात्रियों ने सफ़र किया और 20 लाख टन से अधिक माल ढुलाई हुई। 435 किलोमीटर लंबा यह रेलमार्ग ल्हासा को न्यिंगची से जोड़ता है और 90% से अधिक हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से ऊपर स्थित है। यह 'दुनिया की छत' पर बनी एक आधुनिक परिवहन धुरी है, जिसने शीत्सांग के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में रेल यातायात की शुरुआत की और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी।
शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश की तांगश्योंग काउंटी का यांगपाचिंग कस्बा समुद्र तल से 4,300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जहां एक अंतर्राष्ट्रीय ब्रह्मांडीय किरण वेधशाला है, इसकी स्थापना वर्ष 1989 में हुई, तब से अब तक, इस वेधशाला में कार्यरत वैज्ञानिक और शोधकर्ता ब्रह्मांड से उच्च-ऊर्जा कणों को पकड़ने और इसके रहस्यों की खोज करने में सक्रिय हैं।
शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण मामलों के विभाग से मिली ख़बर के अनुसार 14वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान शीत्सांग ने पठार पर कुल 1,000 सुंदर और सामंजस्यपूर्ण गांवों का निर्माण किया
चीन रेलवे समूह के अनुसार, 25 जून 2026 को ल्हासा-न्यिंगची रेलवे के संचालन के पांच वर्ष पूरे हो गए। वहीं, 1 जुलाई को छिंगहाई-शित्सांग रेलवे के पूर्ण रूप से संचालित होने के 20 वर्ष भी पूरे होने जा रहे हैं। शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की पहली विद्युतीकृत रेलवे के रूप में, ल्हासा-न्यिंगची रेलवे की कुल लंबाई 435.48 किलोमीटर है। यह पश्चिम में ल्हासा से पूर्व में न्यिंगची तक फैली हुई है और इसकी डिज़ाइन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। रेलवे लाइन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। यह मार्ग यारलुंग त्सांगपो नदी को 16 बार पार करता है और इसमें पुलों तथा सुरंगों का अनुपात 75 प्रतिशत है। 25 जून 2021 को शुरू हुई इस रेलवे ने शीत्सांग के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में रेल संपर्क की कमी को समाप्त कर दिया।