गाजा के नाम पर ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’: पहल या राजनीतिक प्रदर्शन?

गत गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में अमेरिका के नेतृत्व में गाजा पट्टी के लिए एक नई तथाकथित “बोर्ड ऑफ़ पीस”की शुरुआत की गई। लेकिन जिस मूल मुद्दे को केंद्र में रखकर इस परिषद का गठन किया गया, उसके सबसे अहम पक्षकार ही इस समारोह में अनुपस्थित रहे। न तो इज़राइल का कोई प्रतिनिधि मौजूद था और न ही फिलिस्तीन का। यह स्थिति अपने आप में एक गंभीर विडंबना को उजागर करती है और इस पूरी पहल की मंशा तथा विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न लगा देती है। ज़रा ठहरकर सोचने की ज़रूरत है कि जो देश स्वयं बार-बार सैन्य संघर्षों में शामिल रहा है और वैश्विक स्तर पर टैरिफ़ जैसे मुद्दों पर अन्य देशों से टकराव की नीति अपनाता रहा है, यदि वही देश “बोर्ड ऑफ़ पीस”का नेतृत्व करे, तो क्या उससे वास्तविक और टिकाऊ शांति की उम्मीद की जा सकती है। यही वह मूल प्रश्न है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर व्यापक संदेह को जन्म दिया है। हालिया प्रामाणिक विश्लेषणों के समग्र आकलन से यह संकेत मिलता है कि इस आयोग के गठन के उद्देश्य, उसकी कार्यप्रणाली और संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर मतभेद और विवाद मौजूद हैं।

26-Jan-2026