28 से 31 जनवरी तक, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने चीन की आधिकारिक यात्रा की। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 29 जनवरी को चीन की राजधानी पेइचिंग में उनसे मुलाकात की। दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक, स्थिर और व्यापक रणनीतिक साझेदारी विकसित करने पर सहमति व्यक्त की, जिससे चीन-ब्रिटेन सहयोग की "महान क्षमता" को "महत्वपूर्ण उपलब्धियों" में परिवर्तित किया जा सके।
चीन की हवा में अब बसंत महोत्सव (स्प्रिंग फेस्टिवल) की खुशबू बसने लगी है। 17 फरवरी से शुरू होने वाले 'घोड़े के वर्ष' (Year of the Horse) की तैयारियाँ जोरों पर हैं।
अब दुनिया का ध्यान तीन अरब लोगों की माटी अफ्रीकी महाद्वीप की ओर है। अफ्रीकी महाद्वीप के देशों का अपना संघ है, जिसे अफ्रीका संघ के रूप में जाना जाता है।
पेइचिंग में हाल ही में संपन्न हुए 'केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन का नेतृत्व, राष्ट्रपति शी चिनफिंग के दूरदर्शी मार्गदर्शन में, न केवल वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम है, बल्कि उसने भविष्य के लिए एक ऐसा रोडमैप तैयार कर दिया है जिसका मुकाबला करना पश्चिमी शक्तियों के लिए असंभव प्रतीत होता है।
साल 2026 चीन के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जो देश को समृद्धि के एक नए युग की ओर ले जा रहा है।
गत गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में अमेरिका के नेतृत्व में गाजा पट्टी के लिए एक नई तथाकथित “बोर्ड ऑफ़ पीस”की शुरुआत की गई। लेकिन जिस मूल मुद्दे को केंद्र में रखकर इस परिषद का गठन किया गया, उसके सबसे अहम पक्षकार ही इस समारोह में अनुपस्थित रहे। न तो इज़राइल का कोई प्रतिनिधि मौजूद था और न ही फिलिस्तीन का। यह स्थिति अपने आप में एक गंभीर विडंबना को उजागर करती है और इस पूरी पहल की मंशा तथा विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न लगा देती है। ज़रा ठहरकर सोचने की ज़रूरत है कि जो देश स्वयं बार-बार सैन्य संघर्षों में शामिल रहा है और वैश्विक स्तर पर टैरिफ़ जैसे मुद्दों पर अन्य देशों से टकराव की नीति अपनाता रहा है, यदि वही देश “बोर्ड ऑफ़ पीस”का नेतृत्व करे, तो क्या उससे वास्तविक और टिकाऊ शांति की उम्मीद की जा सकती है। यही वह मूल प्रश्न है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर व्यापक संदेह को जन्म दिया है। हालिया प्रामाणिक विश्लेषणों के समग्र आकलन से यह संकेत मिलता है कि इस आयोग के गठन के उद्देश्य, उसकी कार्यप्रणाली और संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर मतभेद और विवाद मौजूद हैं।
हाल के दिनों में विश्व और चीन के बीच संवाद लगातार गहराता जा रहा है। लगभग दस दिन पहले कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन की एक आधिकारिक यात्रा की और कई सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित 2026 की विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में “चीन के अवसर” पर व्यापक चर्चा हुई।
साल 2025 में चीन के वित्त मंत्रालय ने जो राजकोषीय नीति लागू की, उसके नतीजों को लेकर आश्वस्ति का ही बोध है कि इसे 2026 में भी जारी रखने का ऐलान किया गया है। यह ऐलान 20 जनवरी को स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में, चीन के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने किया है। इससे सकारात्मक नतीजों की उम्मीद अधिकारियों ने जताई है।
चीन में पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना की शुरूआत होने वाली है। इसके ठीक पहले आर्थिक मोर्चे पर चीन के बेहतर प्रदर्शन ने देश को नए उत्साह से भर दिया है। साल 2025 में चीन के सकल घरेलू उत्पाद दर यानी जीडीपी में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की है।