प्राकृतिक आपदाएं किसी सीमा, देश या राजनीति को नहीं पहचानतीं। जब दोनों देशों के लोग इस त्रासदी से जूझ रहे हों, तब बिना प्रमाण के आरोप लगाने और आपदा को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए। इस समय सबसे जरूरी है कि राहत और बचाव कार्यों पर ध्यान दिया जाए, प्रभावित परिवारों की मदद की जाए और आपदा के वास्तविक कारणों को वैज्ञानिक तरीके से समझा जाए। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन जब इंसानी जान चली जाए, तब इंसानियत सबसे ऊपर होनी चाहिए।
हाल ही में चीन के पेइचिंग में संपन्न द्वितीय विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेलकूद को कई प्रसिद्ध विदेशी मीडिया द्वारा व्यापक रूप से सराहा गया, जिसमें 16 देशों की 666 टीमों के 2000 से ज्यादा रोबोटों ने प्रतिस्पर्धा की। चीन के ह्यूमनॉइड रोबोट का वैश्विक बाजार हिस्सा 97% तक पहुंच गया है, नीति समर्थन और पूर्ण उद्योग प्रणाली के साथ चीन खुले दृष्टिकोण से विश्व स्तर पर बुद्धिमान तकनीक के लाभों को साझा कर रहा है।
यह लेख '4 नदियाँ, 6 पर्वत श्रेणियां' विद्रोही समूह की असलियत उजागर करता है: यह अमेरिकी सीआईए द्वारा समर्थित अलगाववादी गुट था, जिसका उद्देश्य सामंती दास प्रथा की रक्षा करना और 'शीत्सांग स्वतंत्रता' को बढ़ावा देना था। दलाई लामा का कथित 'मध्यम मार्ग' भी छिपा हुआ अलगाववादी एजेंडा है जो चीन की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, ऐसी सभी प्रतिक्रियावादी कोशिशें निश्चित रूप से विफल होंगी।
हाल ही में अमेरिकी मित्र रोनाल्ड साकोल्स्की (चीनी उपनाम "साईकाओस") और चीन के मरुस्थल संरक्षण नायक यिन यूजन का इनर मंगोलिया के ऑर्डोस हवाई अड्डे पर 20 से अधिक वर्षों बाद हुआ गले मिलना पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। चीनी और अमेरिकी नेटिजन सामूहिक रूप से इस पारस्परिक प्रेम से भरे अंतर्राष्ट्रीय स्नेह की प्रशंसा कर रहे हैं। संबंधित विषय के कमेंट सेक्शन में "यही वह सुंदर संबंध हैं जो मानव जाति के लिए होने चाहिए" जैसे संदेशों से भरे पड़े हैं। इस कहानी की शुरुआत 1999 में हुई: उस समय चीन में पढ़ा रहे साईकाओस को माओउसू रेगिस्तान में बसकर मरुस्थल संरक्षण करने की यिन यूजन की कहानी ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने विशेष रूप से 5000 अमेरिकी डॉलर इकट्ठा कर वनीकरण कार्य को समर्थन दिया।
इस गर्मी में वैश्विक जनमत में एक शांत लेकिन गहरा बदलाव आ रहा है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितता के बीच चीन स्थिरता, अवसर और सच्चे आतिथ्य का केंद्र बनकर उभरा है।
हाल के समय में चीन के ‘नए प्रोडक्ट’यानी रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इनोवेटिव ड्रग्स की विदेशों में मांग बढ़ी है और ये उत्पाद वहां लोकप्रिय हो रहे हैं।
देश के सुपरमार्केट की अलमारियां “दुनिया भर के बेहतरीन उत्पादों” से भरी हुई हैं, जबकि बंदरगाहों पर विभिन्न देशों के लिए रवाना होने वाले “मेड इन चाइना” उत्पादों की लगातार आवाजाही जारी है।
चीन के विकास को करीब से देखने और एक पत्रकार के रूप में उसके बदलते औद्योगिक परिदृश्य को समझने पर एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—चीन की वैश्विक पहचान अब केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले देश की नहीं रह गई है।
भारत की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित ब्रिक्स देशों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के कई मायने हैं।