हर साल मार्च आते ही चीन की राजधानी पेइचिंग में महत्वपूर्ण पॉलिटीकल सीज़न शुरू हो जाता है, जहां देश की संसद और उसके सबसे बड़े सलाहकार मंच की वार्षिक बैठकें होती हैं। यह वह समय होता है जब चीन अपने आने वाले सालों की दिशा तय करता है। इसे कहा जाता है ‘दो सत्र’ या ‘लियांगहुई’। नाम भले सरल हो, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं। ‘दो सत्र’ सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हैं। यह चीन के आने वाले वर्षों का खाका हैं। यहां देश की आर्थिक रफ्तार, तकनीकी दिशा और वैश्विक भूमिका तय होती है।
हजारों चमकीली लालटेनें
वसंत नदी पर चांदनी में खिले फूल
गीतों में नौकायन
सौभाग्य की कामना
हमारे पहाड़ों और नदियों का गीत
चाइनीज़ लालटेन फेस्टिवल चाइनीज़ लूनर न्यू ईयर का ही एक उत्सव है। चाइना में लालटेन फेस्टिवल को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है, वो इसलिए, क्योंकि यह लूनर न्यू ईयर का आखिरी दिन और वसंत की शुरुआत का प्रतीक है। चाइनीज़ भाषा में, पारंपरिक चाइनीज़ कैलेंडर के पहले महीने को “युआन” कहा जाता है, और प्राचाइना काल में, रात को “श्याओ” कहा जाता था। इस तरह लालटेन फेस्टिवल का चाइनीज़ नाम "युआन श्याओ" पड़ गया। लालटेन फेस्टिवल, या "युआन श्याओ फेस्टिवल", चाइना में एक खास उत्सव है। यह पारंपरिक चाइनीज़ कैलेंडर, आमतौर पर फरवरी या मार्च के पहले महीने के 15वें दिन होता है। इस साल, यह त्योहार 3 मार्च को होगा क्योंकि चाइनीज़ नया साल 17 फरवरी को शुरू हुआ था। यह त्योहार चाइनीज़ न्यूईयर समारोह के अंत का प्रतीक है, जो पहले लूनर महीने के पहले दिन शुरू हुआ था।
3 मार्च (पहले लूनर महीने का 15वां दिन) को लालटेन उत्सव है, जो चीनी नए साल का जश्न समाप्त होने का प्रतीक है।हैप्पी लैंटर्न फेस्टिवल! आपका साल थांगयुआन जितना मीठा हो।चीनी लोग लालटेन फेस्टिवल कैसे मनाते हैं, यह जानने के लिए वीडियो देखें।
सोशल मीडिया पर इन दिनों 'चीनी बनने'#becomingChinese विषय काफी चर्चा में है। असली चीन को महसूस करने और उसकी सांस्कृतिक धड़कन समझने के लिए, आइए मेरे साथ चलें एक रोचक यात्रा पर! 'चीनी बनने' के इस ट्रेंडिंग टॉपिक के पीछे की वास्तविकता जानने के लिए, मेरे साथ जुड़ें!
पश्चिमोत्तर चीन के शैनशी प्रांत के पहाड़ी इलाके में स्थित एक छोटे से गांव में बुजुर्गों और ज़रूरतमंद लोगों के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। यहां ग्राम प्रधान खुद ट्राइसाइकिल चलाकर घर-घर जाते हैं और लोगों को सिर्फ एक युआन में पौष्टिक भोजन पहुंचाते हैं।
आज की ज़िंदगी में AI कोई दूर की चीज़ नहीं रह गई है। सुबह आंख खुलते ही फोन देखना, मैप से रास्ता खोजना, ऑनलाइन पेमेंट करना या किसी ऐप से काम निपटाना... ये सब AI की ही देन है। हम रोज़ इसका इस्तेमाल करते हैं, कई बार बिना सोचे। लेकिन असली सवाल ये है कि आने वाले वक्त में यही AI हमारे समाज, हमारी सोच, हमारी संस्कृति और कानूनों को कैसे बदलेगा? आज दुनिया में बहस ये नहीं रह गई है कि सबसे तेज़ मशीन किसके पास है, बल्कि ये है कि इस ताकत का इस्तेमाल इंसानों की भलाई के लिए कैसे हो। “इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026” इसी सोच से जुड़ा हुआ है। यह समिट बताता है कि AI का भविष्य मिल-जुलकर बनेगा, अकेले दौड़ने से नहीं।
“वसंत का चित्रण” एक शानदार कलाबाजी कार्यक्रम है, जो प्रकाश को उसकी पूर्ण अभिव्यक्ति देता है। ऑस्ट्रिया, जर्मनी और चीन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस शो में डायबोलो(diabolo) और जगलिंग(Juggling) शामिल हैं। कुशल करतबों और चमकदार प्रभावों के संयोजन से, यह प्रदर्शन प्रकाश, मूवमेंट और सांस्कृतिक परंपराओं के गतिशील मिश्रण के माध्यम से वसंत के सार को पकड़ लेता है।