हमने एक भारतीय छात्र, जिससे चीन में रहते हुए 1 साल से ज्यादा हो गया, से उससे उसके चीन का अनुभव जानना चाह। उसने बताया :
"मैंने बीजिंग के अलावा चीन के दूसरे प्रांत और शहर का भी भ्रमण किया है। मुझे ये देखकर काफी हैरानी हुई थी कि चीन के छोटे-छोटे शहर और गांव देहातों में भी सड़कों का स्तर वही है जो राजधानी बीजिंग में है। यहाँ न कोई सडक में गड्डे है और न ही कोई टूटी हुई सडक है। यहाँ दोनों तरफ के ट्रैफिक के आने जाने की सुविधा के लिये बीच में चौड़ा सा डिवाइडर होता है। चीन के राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति बहुत अच्छी है। यात्रा करने के दौरान आपको हर आधे घंटे के दौरान थोड़ा विश्राम करने के लिये भोजनालय, शॉपिंग मॉल्स और शौचालय इत्यादि की व्यवस्था है जिससे आपको लंबी यात्रा करने के दौरान ज़रा सी भी थकान महसूस नहीं होती। मै यह भी बताना चाहूंगा कि यहाँ चीनी लोग बहुत ही मिलनसार होते है और उनमें सेवाभाव भी बहुत होता है।"
किसी एक अन्य भारतीय छात्र ने बताया कि भारत में शहरीकरण की प्रक्रिया का प्रबंधन बेहद खराब तरीके से हुआ है, खासतौर पर चीन की तुलना में। अगर इसमें सुधार नहीं हुआ तो इससे आम आदमी का जीवन और खराब हो जाएगा। दुर्भाग्य से भारतीय शहरों के विकास में निवेश बहुत ही कम हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक भारत के शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति निवेश मात्र 17 डॉलर है। यह चीन में निवेश का सातवां हिस्सा और न्यूयॉर्क का 17वां हिस्सा है। यही नहीं, भ्रष्टाचार, गलत संसाधन आवंटन और खराब क्रियान्वयन के कारण जो राशि इस मद में खर्च की भी गई है, उसके भी अपेक्षित परिणाम नहीं आए हैं।