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22 फ़रवरी का विशेष मतलब
2012-02-22 12:37:12

चंद्रिमाः जसीम अहमत साहब, स्थिति आप के विचार से बिल्कुल विपरीत है। हमने कभी श्रोताओं के पत्रों को कचरे के डब्बे में नहीं फेंका, चाहे वे डाक से भेजे गये या ई-मेल द्वारा। कुछ समय शायद डाक द्वारा भेजे गये पत्र देर से हमारे पास नहीं पहुंचने के कारण हम ज्यादा ई-मेल पढ़ते हैं। पर अगर उन्हें प्राप्त है, तो ज़रूर कार्यक्रम में शामिल करते हैं। आपने देखा तो आज आप का पत्र सुना है, ठीक है न?इसलिये श्रोता दोस्तो, अगर एक या दो बार आप का पत्र सुनने को नहीं मिला, तो चिंता मत कीजिये, वह ज़रूर किसी न किसी कारण से हमारे पास नहीं पहुंचा।

विकासः अगला पत्र पश्चिम बंगाल के माधव चंद्र सैगोर का है। इस पत्र में उन्होंने एक फ़ार्म द्वारा हमारे कार्यक्रम से जुड़ी भिन्न-भिन्न सूचनाएं दी हैं। उदाहरण के लिये कार्यक्रम के तारीख, समय, मीटरबैंट, टिप्पणियां, विषय व राय इत्यादि। यह देखकर हम बहुत प्रभावित हैं। हालांकि वे हमारे औपचारिक मोनिटर नहीं हैं, पर वे निःशुल्क मोनिटर का कार्य कर रहे हैं। यहां हम आप का धन्यवाद देते हैं। उनके अलावा हमारे और कुछ श्रोता भी हर दिन हमें पत्र लिखते हैं, और मोनिटरिंग रिपोर्ट देते हैं। हम आप लोगों को भी धन्यवाद देना चाहते हैं। आशा है आप लोग लगातार कोशिश करेंगे, शायद कोई दिन आप भी हमारे औपचारिक मोनिटर बन सकेंगे।

चंद्रिमाः समस्तीपुर, बिहार के जर्मनवाणी कल्ब की अध्यक्ष सुश्री रूपा चटर्जी ने हमें भेजे पत्र में यह लिखा है कि यद्दपि हम लोगों का कल्ब जर्मन आकाशवाणी से जड़ा हुआ है, फिर भी हम लोग कभी-कभी चाइना रेडियो इन्टरनेशनल का हिन्दी कार्यक्रम सुनते हैं, और उसे पसंद भी करते हैं। हम लोग चाइना रेडियो इंटरनेशनल से भी जुड़ना चाहते हैं। क्या आप लोग इस के लिये कोई नियम एवं शर्त अपनाते हैं?अवगत कराने का कृपा कीजियेगा। रूपा बहन, हमारे रेडियो में शामिल करने के लिये कोई खास शर्त नहीं है। आप केवल अगले पत्र में अपने कल्ब के बारे में कुछ जानकारियां दे सकेंगी। जैसे कल्ब का नाम, सदस्यों की संख्या, डाक का पता, ई-मेल पता, मोबाइल नंबर और अपने कल्ब का परिचय आदि सूचनाएं हमें भेजिये। यह तो ठीक है। इसे प्राप्त करके हम आप के कल्ब को श्रोता कल्बों के सूची में शामिल करके नियमित रूप से आप लोगों को सामग्री भेजेंगे।

विकासः चंद्रिमा जी, कल्ब के नाम की चर्चा में उन्होंने यह भी लिखा है कि उन के कल्ब का नाम जर्मनवाणी कल्ब है, क्योंकि यह जर्मन भाषा से जुड़ा हुआ है। अब वे चाइना रेडियो इंटरनेशनल से जुड़ना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में कल्ब का नाम परिवर्तित करना आवश्यक हो गया है। कृपया इस के लिये उचित मार्गदर्शन पत्र के माध्यम से करने का कष्ट कीजियेगा। सुश्री रुपा चटर्जी, वास्तव में कल्ब का नाम आप अपनी इच्छा से बना सकती हैं। जैसेः सी.आर.आई. श्रोता कल्ब, चीन-भारत मैत्री कल्ब, बिहार रेडियो श्रोता संघ, अनिल रेडियो श्रोता संघ, और सी.आर.आई.युवा फ़ैन कल्ब, इत्यादि। जो आप को पसंद है, आप इसे कल्ब का नाम बना सकती हैं।

चंद्रिमाः रुपा बहन, आप को हमारे रेडियो में शामिल करने का हार्दिक स्वागत है। और श्रोता दोस्तो, समय के अभाव में आज का कार्यक्रम यहीं तक समाप्त होता है। क्या आप को आज का कार्यक्रम पसंद है या नहीं?हमें पत्र भेजकर बताइये।

विकासः अब चंद्रिमा व विकास को आज्ञा दीजिये। नमस्कार।

चंद्रिमाः नमस्कार।


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