
एनपीसी के तिब्बती प्रतिनिधि वांगत्वेई
उधर, तिब्बत के शिकाज़े क्षेत्र से आए एनपीसी प्रतिनिधि वांगत्वेई इस वर्ष चुने गए नए प्रतिनिधि हैं। पेइचिंग में एनपीसी सम्मेलन में भागीदारी के पूर्व उन्होंने बहुत ज्यादा अनुसंधान और निरीक्षण कर शिकाज़े में दक्षिण एशिया के उन्मुख मिश्रित लॉजिस्टिक उद्यान के निर्माण का सुझाव पेश किया था। इसके तहत शिकाज़े क्षेत्र की नौ सीमावर्ती कांउटियों की श्रेष्ठता दिखाकर विशेष आर्थिक व्यवसाय का विकास किया जाएगा, जिससे इसी क्षेत्र के विदेशी आर्थिक और व्यापारिक स्तर को उन्नत बनाया जाएगा। इसकी चर्चा में तिब्बती एनपीसी प्रतिनिधि वांगत्वेई ने कहा:"शिकाज़े क्षेत्र में तिब्बत को दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला प्रमुख स्थल है। यहां नौ सीमावर्ती कांउटी हैं और सीमा-रेखा की लम्बाई 1753 किलोमीटर है। शिकाज़े मुख्य तौर पर भारत, भूटान और नेपाल को जोड़ता है। सारे तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में पांच थलीय सीमावर्ती बंदरगाहों में से चार शिकाज़े में स्थित हैं। इसके साथ ही यहां 28 सीमा-व्यापार अड्डे भी हैं। शिकाज़े में सीमावर्ती आर्थिक विकास करने की बड़ी शक्ति नीहित है। वर्तमान में स्थिति अच्छी है, विदेश व्यापार की कुल मात्रा और लघु व्यापारों का सौदे में हर वर्ष वृद्धि हो रही है और अलग-अलग तौर पर 15 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की वृद्धि बनी हुई है। हमारी आशा है कि शिकाज़े में मिश्रित लॉजिस्टिक उद्यान का निर्माण किया जाएगा, जिससे लॉजिस्टिक, भंडारण और प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के विकास में बड़ी सुविधा मिलेगी।"
वांगत्वेई के अनुसार वर्तमान में शिकाज़े में हवाई अड्डे का निर्माण पूरा हो गया है। राजधानी ल्हासा से शिकाज़े तक का रेल मार्ग निर्माणाधीन है। योजनानुसार इस वर्ष के भीतर इसपर यातायात शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही शिकाज़े से विभिन्न दिशाओं में फैले हुए मार्ग एस्फ़ाल्ट से बने हुए हैं। इस तरह इसी क्षेत्र में वायु, रेलवे, राज मार्ग समेत त्रि-आयामी यातायात जाल बना चुका है, यह शिकाज़े क्षेत्र में विदेशी पूंजी आकृष्ट करने की गारंटी है। वांगत्वेई ने कहा:"शिकाज़े हवाई अड्डे पर यातायात वर्ष 2010 में शुरू हुआ था। गत वर्ष बहुत ज्यादा पर्यटक नागरिक उड्डयन द्वारा हमारे यहां आए। पर्यटन उद्योग का दिन दोगुनी रात चौगुनी की गति से विकास हो रहा है। देश ने ल्हासा से शिकाज़े तक के रेल मार्ग के निर्माण पर महत्व दिया है और वह जल्द ही प्रयोग में आएगा। त्रि-आयामी यातायात जाल भी बन रहा है। विश्वास है कि हमारे शिकाज़े का विकास साकार होगा।"
वांगत्वेई ने कहा कि शिकाज़े क्षेत्र में कृषि को प्रधानता देकर कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग पर भी जोर दिया जाता है। जौ की प्रोसेसिंग इसी क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों में से एक है। उन्हें आशा है कि प्रोसेसिंग किए जाने वाले जौ उत्पादों को विश्व के विभिन्न स्थलों तक पहुंचाया जाएगा। वांगत्वेई ने कहा:"शिकाज़े विश्व में जौ का जन्मस्थान माना जाता है। तिब्बत की एक तिहाई खेती योग्य भूमि हमारे यहां है। साल में जौ का उत्पादन 3 लाख 80 हज़ार टन है, यह तिब्बत में उत्पादित जौ का 40 प्रतिशत हिस्सा है। तिब्बत के अनाज भंडार के रूप में शिकाज़े में विकास की बड़ी शक्ति मौजूद है। हम कृषि से संबंधित उद्योग के विकास पर महत्व देंगे। जौ के उदाहरण के लिए जौ की मदिरा, जौ से बने हुए स्वास्थ्य खाद्य पदार्थ बाज़ार में बहुत लोकप्रिय हैं। हमें आशा है कि हमारे यहां विकास का उज्जवल भविष्य होगा।"
अपने तिब्बत के स्वप्न की चर्चा में एनपीसी तिब्बती प्रतिनिधि वांगत्वेई ने कहा:"मेरा तिब्बत का स्वप्न चीन के स्वप्न के बराबर है। मुझे आशा है कि हमारे तिब्बती लोग ज्यादा सुखमय जीवन बिताएंगे। इसके साथ ही हम सुन्दर तिब्बत का लगातार संरक्षण करेंगे। यहां के नीले आसमान और हरे पानी का संरक्षण करते हुए अच्छा निर्माण करेंगे, जिससे तिब्बत हमेशा चीन में सबसे सुन्दर स्थल बन सके।"















