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तिब्बत में सीमा सुरक्षा सैनिकों का यौवन व प्यार
2012-07-08 19:00:17

चीन का तिब्बत कार्यक्रम सुनने के लिए आपका स्वागत है। मित्रों, बीसेक वर्ष की अवस्था में लोगों को यौवन का खूब मज़ा लेना चाहिये।लेकिन कुछ लोग देश की सीमा सुरक्षा के लिये तिब्बत में सीमा सुरक्षा बल में शामिल होने का निर्णय लेकर समु्द्री तल से 4 हज़ार मीटर ऊंचे बर्फ़ से भरे पठार पर आये हैं।उनमें से कुछ लोगों ने आरामदेह जीवन छोड़ दिया और कुछ लोगों ने अपने पति या पत्नि के साथ रहने का मौका भी गंवा दिया। इसलिये उन जवानों का यौवन तथा इश्क थोड़ा सा अलग है। आज के इस कार्यक्रम में आप मेरे साथ उन युवाओं के नज़दीक जाकर महसूस करेंगे उन का यौवन और प्यार।

20 वर्षीय लू चो यांग को समुद्री तल से 4900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कांगबा फ़ोजी युनिट में आए हुए दो महीने से अधिक समय बीत गया है।अब तक उन्होंने बंदूक के साथ दो बार गश्त लगाई है।जब वे पहली बार बंदूक लिये गश्त लगाने के लिये चीन-भारत की सीमा पर पहुंचे,उन्हें लगा कि खुद को ज़िम्मेदारी लेनी चाहिये।ह नान प्रांत के च्यो को नार्मल कॉलेज से आये लू च्यो यांग इस बात को कभी नहीं छुपाते कि भौतिक जीवन के स्तर पर अपने के सहपाठियों के साथ उन के जीवन में बड़ा अंतर है और उपने संकल्प पर उन्होंने सवाल भी उठाये। लेकिन बहुत सोच-विचार करके वे अपने संकल्प पर अड़े रहे। इसकी चर्चा में लू चोयांग ने कहा:

"जब मैं अपने कॉलेज के सहपाठियों को फ़ोन करता हूं, वे हमेशा मुझे अपने बेहतर जीवन की कहानियां सुनाते हैं। कॉलेज में मैं भी दिन भर खुश रहता था।मैं अक्सर विभिन्न गतिविधियों में भाग लेता था।इसलिये मैंने अपना आरामदेह जीवन छोड़कर तिब्बत में आने के फ़ैसले पर सवाल भी उठाया।लेकिन फ़ोन रखकर मैंने चारों तरफ़ देखा कि और इतने लोग यहां आये हैं।शायद सभी को पछतावा हुआ होगा।मगर दूसरे लोग जब ऐसा फैसला कर सकते हैं,तो मैं क्यों नहीं ?मेरे विचार में इस दुनिया में सभी लोगों को इस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।अब मेरे दूसरे सहपाठी खुशी से चीन के भीतरी इलाके में रहते हैं।लेकिन एक दिन उन्हें अपने जीवन में हमारे अनुभवों की आवश्कता पड़ेगी,जो हमने यहां पाए हैं।"

अब आप जो गीत सुन रहे हैं, उसका नाम है "मैं कुछ भी न कहूं"। गीत के बोल हैं:

मैं कुछ भी न कहूं

मेरी मातृभूमि जानती है मुझे

मेरा दिल उससे भरा हुआ है

देश की शांति व लोगों की खुशी के लिये

मेरी शुभकामनाएं

समुद्री तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चान न्यांगशे चौकी "मेघ में चौकी" कहलाती है। चौकी में जवानों के गीतों की आवाज़ें बादलों में भी सुनाई देती हैं। चैन न्यांग शे चौकी बादलों से घिरी हुई है और उसके चारों तरफ़ केवल प्रपात है।अभी तक उस चौकी पर मार्ग नहीं पहुंचा है। हर साल अक्तूबर से अगले अप्रैल तक उस पहाड़ पर रास्ते भारी बर्फ़बारी से बंद रहते हैं। इस अवधि में सब सैनिकों को चौकी में रहते हुए भंडारित सब्जियां खानी पड़ती हैं और बर्फ़ को पिघला कर पानी पीना पड़ता है।मनोरंजन के लिये वे टेबल-टेनिस खेलते हैं,पुस्तकें पढ़ते हैं और टीवी देखते हैं।नलके का पानी न होने के कारण आम दिनों में ये जवान केवल भीगे तौलियों से शरीर को पोंछते हैं।गर्मी के मौसम में उन जवानों की सबसे बड़ी उम्मीद है कमांडर उन्हें पहाड़ के नीचे स्थित या डोंग काउंटी के स्नान घर में जाने दे।

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