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तिब्बती समाजशास्त्री तनचेन ह्लुतुप की कहानी
2012-04-16 16:24:41

तिब्बती रीतिरिवाज का पालन करना प्रायः अपने बच्चे की शिक्षा में दिखता है। तनचेन ह्लुतुप अपने बच्चे को तिब्बती संस्कृति की जानकारी देने में यथा प्रयास करते हैं। उन्होंने कहाः

"मैं तिब्बत से आया हूं और मेरा जन्म ल्हासा में हुआ है। अब हमारे बच्चे तिब्बत में नहीं रहते, चूंकि हम पेइचिंग में रहते हैं। इसलिए मैं अपने बच्चे को तिब्बत के बारे में और ज्यादा जानकारी देना चाहता हूं। जब वह 12 साल का था, मैंने उसे छिंगहाई-तिब्बत रेलवे से अकेले ल्हासा जाने के लिए भेजा और तिब्बती किसानों के साथ खेती करवाई। इसी तरह बच्चे अपने पूर्वजों के जीवन से परिचित होगा। ताकि उसे याद होगी कि पुराने जमाने में हमारे पूर्वज भू-दास थे।"

तनचेन ह्लुतुप की मां चीन के सछ्वान प्रांत की कानची काउंटी में रहने वाली हैं। 50 साल पहले वे ल्हासा गईं और वहां शादी हुई। तनचेन ह्लुतुप के माता-पिता अपढ़ हैं, लेकिन वे अपने बच्चे की शिक्षा पर बड़ा ध्यान देते हैं। तनचेन ह्लुतुप ने कहाः

"मेरे मां-बाप निरक्षर हैं। उन्हें हान जाति की भाषा नहीं आती। लेकिन उन्होंने मेरी शिक्षा पर बड़ा ध्यान दिया। तिब्बती जाति के लोग आम तौर पर बच्चे की शिक्षा पर ज्यादा सख्त व्यवहार नहीं करते। लेकिन मेरी मां ने बार बार मुझे शिक्षा का महत्व बताया। ज्ञान की कमी से उनके जीवन में काफी कठिनाइयां पैदा हुई थीं, इसलिए उन्होंने मुझे मेहनत से सभी ज्ञान सीखने का प्रोत्साहन दिया। मैंने बचपन से ही हान जाति की भाषा सीखी है।"

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