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किनो की जातीय प्राइमरी स्कूल
2010-02-09 10:08:17

दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत के शीश्वांगपेना स्टेट में किनो नामक एक पहाड़ है, जहां किनो नामक एक जाति रहती है। हर सुबह, किनो पहाड़ की विभिन्न गांवों के बालक गाना गाते हुए इस स्कूल में प्रवेश करते हैं और एक दिन की पढ़ाई शुरु करते हैं। ब्रीक टाइम में बच्चे खेल मैदान में बास्केटबॉल खेलते हैं, बच्ची शटलकॉक आदि खेल खेलती हैं। किनो जाति की प्राइमरी स्कूल में बच्चे रोज खुशी से रहते हैं।

सुबह साढ़े छह बजे मैं स्कूल पहुंचती हूं। सात बजे अध्यापक आकर नाश्ता का वितरण करते हैं। आठ बजे प्रथम कक्षा शुरु होती है। सुबह में कुल चार कक्षाऐं हैं। दोपहर का खाना खाने के बाद तीसरे पहर के दो बजे मैं स्कूल आती हूं। साढ़े दो बजे कक्षा में प्रवेश करती हूं और सफाई करती हूं। यदि कम्प्यूटर कक्षा है, तो मैं कक्षा लेती हूं।

जो लड़की हेमं रोजाना की समय सूची बता रही है, जिस का नाम चांग खशीन है। वह किनो प्राइमरी स्कूल के पांचवें ग्रेड की छात्रा है। वह एक श्रेष्ठ लड़की है। दूसरे ग्रेड से ही वह क्लास के मॉनिटर बनती रहती है। चांग खशीन के माता-पिता बाहर में मजदूर का काम करते हैं। उस का धर समृद्ध नहीं है। उस के दादा-दादी उस के दैनिक जीवन का ख्याल करते हैं। इस के बावजूद चांग खशीन खुशी से स्कूल में पढ़ती है। कारण यह है कि किनो प्राइमरी स्कूल में सभी छात्र-छात्राएं मुफ्त शिक्षा पाते हैं, जिसे किसी भी फीस देने की जरुरत नहीं है। किनो प्राइमरी स्कूल के प्रधान श्री यांग शीज ने कहा,

सरकार छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा देती है। पाठ्य पुस्तकें भी सरकार द्वारा प्रदान दी गयी हैं। जो छात्र-छात्राएं स्कूल में रहते हैं, उन्हें हर महीने में 50 चीनी य्वान की भत्ता मिलेगी। केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक जातियों के छात्र-छात्राओं को हर वर्ष 250 चीनी य्वान की भत्ता भी देती है। यह चीन सरकार द्वारा किनो जाति को दी गयी विशेष नीति है। अब बच्चे स्कूल को किसी भी फीस नहीं देते हैं, इस के विपरीत, वे स्कूल में पैसे भी ला सकते हैं।

किनो जाति चीन में सब से छोटी आबादी वाली अल्पसंख्यक जातियों में से एक है। पिछली शताब्दी के मध्यम काल में किनो जाति ने आदिम समाज से प्रत्यक्ष रुप से समाजवादी समाज में प्रवेश किया। किनो जाती की आबादी लगभग 22 हजार है। उस की अपनी जातीय भाषा भी है। किनो भाषा संस्कृति की अच्छी तरह रक्षा व प्रसार करने के लिए किनो प्राइमरी स्कूल ने छात्रों के बीच मापदंड चीनी भाषा का प्रसार करने के साथ साथ छोटी उम्र के छात्रों के बीच द्विभाषी कक्षा भी खोली है। किनो जातीय भाषा की अध्यापक शा वनयुव्न ने कहा कि किनो भाषा एवं मापदंड चीनी भाषा की द्विभाषी शिक्षा ने जातीय स्कूलों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन के अनुसार,

मेरे विचार में द्विभाषी शिक्षा बहुत आवश्यक्त है, चुंकि अनेक बच्चे के बड़ने के बाद किनो भाषा नहीं बोल पाते हैं। यह एक बड़ी समस्या है। इसलिए, हमारी स्कूल में बच्चों को मापदंड चीनी भाषा सीखाने के साथ साथ किनो की भाषा भी सिखायी जाती है, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा नहीं भूल पाते।

सुबह की दो कक्षाओं के बाद बच्चों ने क्लास रूमों से खेल मैदान आकर जिमनास्टिक खेलने लगा। किनो प्राइमरी स्कूल की अपनी विशेष जिमनास्टिक खेल है, जिस में किनो जाति के जातीय नृत्य की विशेषता भी जोड़ायी गयी है। इस का अभ्यास करने से छात्रों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इस स्कूल में 10 से ज्यादा वर्षों के लिए पी ई कक्षा देने वाले अध्यापक च्याओ श्वनफींग ने कहा कि उन्होंने खुद ही इस जिमनास्टिक खेल बनाया था, जिस का मकसद बच्चे हमेशा के लिए अपनी जाति की संस्कृति को याद कर सकेंगे। उन का कहना है,

हमारी जाति की जातीय कला के अनुसार, मैंने इस खेल की रचना की। हम यह सोचते हैं कि बच्चों को अल्पसंख्यक जाति की संस्कृति का प्रसार करना चाहिए। इसलिए, मैं उन्हें बचपन से ही जातीय संस्कृति के प्रति जानकारी देना चाहता हूं।

चाहे वे कहां जाऐंगे, वे अपनी किनो जाति की संस्कृति कभी नहीं भूल पाऐंगे।

बच्चों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए स्कूल ने एक छोटा पुस्तकालय की स्थापना भी की। इतना ही नहीं, स्कूल में लोकतंत्र हस्तशिल्प बनाने की कला, नृत्य गान व संगीत आदि कई ग्रुपों की स्थापना भी की गयी।

किनो प्राइमरी स्कूल के 700 से ज्यादा छात्रों में 90 प्रतिशत से ज्यादा छात्र-छात्राएं आसपास की किनो गांवों से आये हैं। लेकिन, उन में से कुछ छात्र बाहर से भी आये हैं। कुछ छात्रों का घर स्कूल से 60 से ज्यादा किलोमीटर दूरी गांव में रहा है। स्कूल के अध्यापक छात्रों के माता-पिता की तरह उन का ख्याल करते हैं। एक छात्र के पिता जी ल्यू य्वू ने कहा,

यदि बच्चा बीमार हो, तो किसी भी एक अध्यापक जरूर उसे अस्पताल भेजेंगे और उस के मां-बाप को सूचना देंगे। हमें बहुत संतुष्ट है।

स्कूल में जाते समय हम छात्र-छात्राओं की खुशी मुखें देख पाते हैं। बच्चों पर हम ने किनो जाती के लोगों की स्वतंत्रता एवं आशावान की जातीय विशेषता देख पाते हैं। पहाड़ के नीचे इस जातीय प्राइमरी स्कूल में किनो जाति का भविषय बांधा गया है। यहां किनो के बच्चों के सपना को साकार करने का शुरांभ स्थल भी बनेगा।

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