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चीन के फिंगथान गिटार के कलाकार चिंग ली संग
2010-02-08 10:52:29

दक्षिण चीन के सूचओ शहर के च्यांगसू व चेच्यांग प्रांत के इलाकों में स्थानीय़ सूचओ बोली से गाए जाने वाली एक मधुर व अदभुत संगीत कला है, जो चीन की राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत की नामसूची में शामिल की जा चुकी है। सूचओ फिंग थान यानी चीनी गिटार वाद्य संयंत्र संगीत के कलाकार चिंग ली संग की मशहूर फिंगथान संगीत धुन यांग वू नाए व छोटी गोबी तथा बेटे की वफादारी नाम वाले संगीत व गीत लोगों की जुबान पर हैं, इन गीतों के लिए उन्हे चीन की कला पेशावर का सर्वोच्च मूतान पुरूस्कार से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2006 में 63वर्षीय चिंग ली संग राष्ट्रीय स्तरीय सांस्कृतिक विरासत के वारिस चुने गए।

यह चिंग ली संग के यांग नाए वू व छोटी गोबी नाम के संगीतो मे से चुना एक गीत है। चिंग ली संग को चीनी सूचओ फिंगथान गिटार बजाए कोई 40 साल हो चुके हैं, 20 उम्र की आयु में वह अकेले भटकते बन्दरगाह में रोजगारी करने आए थे, इन दिनों के कठोर जीवन की याद ताजा करते हुए उन्होने भावात्मक स्वर में कहा कि उस समय कला सीखना बहुत ही मुश्किल था, यहां तक कि पटकथा तक नहीं होती थी। उन्होने कहा मैंने यह कला कानों से सुन सुन कर सीखी थी। मेरे गुरू बोलते थे , मै सुनता था, कोई पटकथा नहीं थी। मैंने कई सालों में इसी तरह कोई 60 से अधिक गीत गाने सीख लिये। उस समय गुरू बहुत कम पढ़ाते थे, खुद उनके पास जाकर पूछने से ही कुछ सीखा जा सकता था, एक एक बार पूछने व अपनी मेहनत से , सचमुच बड़ी कठोरता से मैंने आखिर सूचओ फिंग थान सीखा।

वर्ष 2000 में चिंग ली संग का गाया सूचओ फिंगथान संगीत बेटे की वफादारी के गीत को चीन कला का सर्वोच्च मूतान पूरूस्कार मिला। चीन की इस मधुर स्थानीय कला संगीत को आगे की पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए , चिंग ली संग ने शिष्यों को इस संगीत को सिखाना बहुत ही महत्वपूर्ण समझा ।

सूचओ फिंगथान संगीत यांग नाए वू व छोटी गोबी अब तक चीन में एक जानी मानी संगीत कला है, जो सूचओ फिंगथान संगीत कला की माहिरता को दर्शाता है। चिंग ली संग ने सूचओ के एक अन्य मशहूर गायक ली चुंग खांग के साथ इस संगीत की पटकथा को संपादित कर एक पूर्ण पटकथा का रूप दिया, इस पटकथा को नयी पीढी़ तक ले जाना भी कोई आसान काम नहीं है, यानी इसे सीखने के लिए कठोर मेहनत की जरूरत होती है। उन्होने इस की चर्चा करते हुए कहा इस पटकथा को नयी पीढ़ी तक ले जाने के लिए दो पहुलओं पर मेहनत करने की जरूरत है, एक तो इस कला संगीत को किस तरह सिखाया जाए, दूसरा, अभिनय कला को किस तरह जैसा का तैसा बरकरार रखा जाए, यानी उसकी परम्परागत शैली में कोई आंच न आए। इस में परम्परागत अभिनय कला बहुत ही कठोर है, पर यह हमारी जातीय कला का राष्ट्रीय रत्न है, सूचओ फिंगथान कला मंडली के प्रबंधक सुन ती ने हमें बताया अनेक सालों के मंच प्रदर्शन व्यवहार ने इस अदभुत कला के आगे के विकास के लिए प्रचुर अनुभव प्रदान किए हैं, इस की कला भी किसी अन्य स्थानीय कला से बिल्कुल अदभुत है। इस लिए इस कला को नयी पीढ़ी तक ले जाने के लिए कलाकार की माहिरता व उसकी अपनी जिम्मेदारी वाकई बहुत ही महत्वपूर्ण है।

अन्य परम्परागत स्थानीय कला संगीत की तरह सूचओ फिंगथान संगीत कला को भी आमने सामने बैठकर ही सिखाया जाता है। जबकि आधुनिक युग में इस परम्परागत संगीत को सीखने में रूचि रखने वाले नौजवान कम होते जा रहे हैं, सूचओ स्थानीय फिंगथान संगीत कला भी अन्य परम्परागत कलाओं के समान लुप्त होने के खतरे में जा बैठा है। किस तरह इस परम्परागत संगीत कला को नयी जान दी जाए, अधिकाधिक जवानों को इस कला से वाकिफ कराने के साथ उनको इस कला संगीत के प्रति रूचि को भी उत्साहित किया जा सके, सचमुच सूचओ फिंगथान संगीत कला की सबसे पहले हल किए जाने वाली समस्या है। पिछले आठ सालों में चिंग ली संग ने सूचओ फिंगथान संगीत कला मंडली के अन्य साथियों के साथ मिलकर सूचओ फिंगथान संगीत कला स्कूलों में जाकर लेकचर देना शुरू किया, छात्रों को बुनियादी ज्ञान से लेकर कला को माहिर करने की कला से परिचित कराने में मदद दी, ताकि अधिकाधिक छात्र इस प्राचीनतम संगीत कला को अपने हाथों से आगे ले जाने की जिम्मेदारी को अच्छी तरह से समझ सके। इस पर बोलते हुए चिंग ली संग ने कहा कालेज के छात्र देश के कोने कोने से आए हैं, हम उन्हे सूचओ फिंगथान संगीत की विशेषता का ज्ञान देने के साथ साथ उनके आमने सामने इस कला को दर्शाते भी हैं, ताकि वे इस कला को आमने सामने बैठे इस का अनुभव प्राप्त कर सकें, इस कला के वाद्य संयंत्र यानी चीनी गिटार के सीखने का उत्साह को बढ़ाया जा सके। इस लिए हमने उन्हे इस वाद्ययंत्र में रूपांतरण लाने पर उनके साथ अध्ययन करना भी शुरू किया, यह इस वाद्य संगीत संयंत्र के विकास, समृद्धि व उसके विस्तार के लिए बहुत ही हितकारी है।

उत्तर पश्चिम चीन के इलाके से आए वर्तमान सूचओ यूनिवर्सिटी में अध्ययन कर रहे श्याओ हू के लिए फिंगथान यानी चीनी गिटार बिल्कुल एक अजनबी वाद्य संयंत्र ही है और संगीत कला भी। यूनिवर्सीटी में इस कला के अध्ययन के समय ही उन्होने पहली बार इस मधुर व अदभुत कला को पहली बार अहसास किया, उस समय उनके अध्यापक श्री चिंग ली संग उनकी मेहनत से बहुत ही प्रभावित हुए । श्याओ हू ने इस का जिक्र करते हुए कहा मैं तो सूचओ शहर से बाहर के इलाके से यहां पढ़ने आया हूं, पहली बार सूचओ फिंगथान सुनने के समय मैं इस संगीत पर मंत्रमुग्ध हो गया, हालांकि मैं इस संगीत को इतनी अच्छी तरह समझ तो न सका , तो भी मुझे यह संगीत बहुत ही अच्छा लगा, उसके गाने के बोल भी मधुर धुनों के साथ वाकई लोगों को मनमोहित कर देते हैं, इस कला की महक व उसकी मधुरता हम जैसे कला संगीत सीखने वाले छात्रों को अपनी आकर्षित करती हैं, मैंने इस कला को सीखने की ठान ली है।

वर्तमान 66 वर्षीय चिंग ली संग ने 11 शिष्यों को इस संगीत कला को आगे ले जाने वाली नयी पीढ़ी के कलाकार चुने हैं, उन्हे आशा है कि अधिकाधिक लोग इस अदभुत प्राचीन स्थानीय कला पर ध्यान देगें और इस कला की सौन्दर्यता को अधिक मधुर व सुन्दर बनाने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखेंगे।

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