थ्येन आन मन के स्वर्ण पानी पुल की रक्षा परियोजना सब से ध्यानाकर्षक मुद्दों में से एक है। थ्येन आन मन विश्व सांस्कृतिक विरासत कुकुंग अजायबघर का मुख्य द्वार है। जब पर्यटक थ्येन आन मन के जरिये कुकुंग अजायबघर में आते-जाते हैं, तो वे ज़रूर स्वर्ण पानी पुल के ऊपर से गुज़रते हैं। बहुत साल के प्रयोग से स्वर्ण पानी पुल बर्बाद हो चुका है। पेइचिंग सांस्कृतिक अवशेष ब्यूरो के रक्षा विभाग के प्रधान श्री वांग यू वेइ ने परिचय देते हुए कहा कि, थ्येन आन मन के स्वर्ण पानी पुल की रक्षा एक साधारण रक्षा परियोजना है। इस का मुख्य मामला है वर्तमान के पांच पुलों की सतह का सुधार करना। इधर के कई वर्षों में उन पांच पुलों के सतह का बड़ा सुधार नहीं हुआ है। इसलिये वे समतल नहीं हैं। इस बार हम मुख्य तौर पर इस मामले का समाधान करेंगे। जांच-पड़ताल से यह पता चला है कि सुरक्षा की कोई समस्या नहीं है, केवल थ्येन आन मन में आने-जाने वाले असमतल रास्ते का मामला है।
श्री वांग यू वेइ ने कहा कि वर्तमान के सांस्कृतिक अवशेषों के सुधार व रक्षा की मध्य व दीर्घकालीन परियोजना अनवरत विकास की दृष्टि से संभव खतरे की रोकथाम करेगी। उन्होंने कहा कि, यह आसानी से कहा जा सकता है कि सांस्कृतिक अवशेष के सुधार में रोजमर्रा रक्षा व निगरानी पर ज्यादा महत्व देना चाहिए। हमने प्रबंध व प्रयोग विभागों से रक्षा परियोजना की स्थापना करने और रोजमर्रा रक्षा को सामान्य प्रबंध में शामिल करने की मांग की। और सरकारी विभागों को इस पक्ष में ज्यादा निगरानी करनी चाहिए। साथ ही हमने उन सांस्कृतिक पुरातन इमारतों, जिन में बड़े सुधार की ज़रूरत नहीं है, के प्रबंध व प्रयोग विभागों से सुरक्षा जांच-पड़ताल व्यवस्था की स्थापना करने की मांग भी की। जब तक व्यवस्थित व नियमित रूप से सांस्कृतिक
अवशेषों की चतुर्मुखी जांच-पड़ताल नहीं की जाती, तब तक हम सांस्कृतिक अवशेषों में छिपे संभावित खतरों को नहीं ढूंढ़ पाएंगे।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2009 में पेइचिंग सरकार पहली बार तीस लाख य्वान रन मिन बी की पूंजी लगाकर सांस्कृतिक अवशेषों के रक्षा विभागों की नियमित जांच-पड़ताल कार्य की शुरूआत करेगी। वे उच्च तकनीकी तरीके से पहले खेप वाली 20 सांस्कृतिक पुरातन इमारों की जांच-पड़ताल करेगी, और सांस्कृतिक अवशेषों के सुधार कार्य के लिये वैज्ञानिक आधार व बुनियादी आंकड़े पेश करेगी।
पेइचिंग पुरातन इमारतों के अनुसंधान प्रतिष्ठान के प्रधान श्री हान यांग के विचार में इस परियोजना का कार्यान्वय पिछले समय में पेइचिंग के सांस्कृतिक अवशेषों की रक्षा कार्य में मौजूद कमियों को धीरे-धीरे दूर करेगा। और ज्यादा वैज्ञानिक विचार-धारा भी इस मध्य व दीर्घकालीन परियोजना में प्रतिबिंबित होगी। उन्होंने कहा कि, पिछले समय में सांस्कृतिक अवशेषों का रक्षा कार्य बहुत सीमित था। लेकिन अब इस का बड़ा विकास हुआ है। पिछले समय में गलत विचार या अर्थतंत्र की वजह से मौजूद कमियां भी विकास के साथ-साथ दूर की जा रही हैं। अब सांस्कृतिक अवशेषों की रक्षा कार्य के प्रति हमारी समझ बढ़ी है, काफ़ी पूंजी-निवेश भी प्राप्त हुआ है। और इस कार्य को विरासत-रक्षा के उच्च स्तर पर पहुंचाया गया है। विश्वास है कि भविष्य में इस कार्य में ज़रूर और प्रगति होगी।
पेइचिंग सांस्कृतिक अवशेष ब्यूरो के प्रधान श्री खुङ फ़ेन शी के विचार में पेइचिंग के सांस्कृतिक अवशेषों की रक्षा कार्य पर बड़ा दबाव है। इसे अनुकूल चक्र में प्रवेश करने के लिए और कुछ समय चाहिए। (चंद्रिमा)