2008-01-16 15:42:33

2007 में चीन-विदेश सांस्कृतिक आदान-प्रदान विविधतापूर्ण

दोस्तो,कुछ समय पूर्व पेइचिंग में श्रीलंकाई फिल्म-सप्ताह का आजोयन हुआ।इस से पहले चीन में जो विदेशी फिल्में दिखाई गई हैं,उन में से अधिकतर अमरीका व यूरोपीय देशों की हैं।श्रीलंकाई फिल्म-सप्ताह के आयोजन से चीनी दर्शकों को इन देशों से बिल्कुल अलग संस्कृति वाले श्रीलंका से वाकिफ होने का मौका मिला है।जैसा कि आप जानते हैं कि श्रीलंका रत्न राज्य और सिंह राज्य के नाम से जाना जाता है।इस के बारे में ज्यादातर चीनियों को जो जानकारी प्राप्त हुई है,वह सिर्फ उस का हिन्द महासागर स्थित एक सुन्दर द्वीप होने तक सीमित है।इस के सिवाए श्रीलंका का सब कुछ चीनियों के लिए नया कहा जा सकता है।

श्रीलंकाई फिल्म-सप्ताह के दौरान दिखाई गई उप्पालावान्ना नामक एक फिल्म ने लोकप्रियता प्राप्त की है।इस फिल्म की कहानी हैः खूबसूरत युवती उप्पालावान्ना अपने नृत्य सिखाने वाले अध्यापक से प्यार करती है।अध्यापक को पहले ही उस से प्यार है।लेकिन दोनों के प्रेम-प्रसंग का उप्पालावान्ना के मां-बाप जमकर विरोध करते है।फलस्वरूप अंत दुखांत है।इस फिल्म की कहानी सुन्दर दृश्यों के साथ आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढती है,जिस से दर्शक श्रीलंका की विशेष संस्कृति खासकर धर्म के प्रगाढ़ वातावरण से प्रभावित होते हैं।

वर्ष 2007 चीन और श्रीलंका के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ है।इसे मनाने के लिए दोनों देशों ने संस्कृति के क्षेत्र में अनेक आयोजन किए हैं और फिल्मोद्योग में सहयोग के लिए प्रथम समझौता संपन्न किया है। इसी समझौते के अनुसार पेइचिंग में श्रीलंकाई फिल्म-सप्ताह का आयोजन किया गया है।चीन स्थित श्रीलंकाई राजदूत श्री अम्नुगामा ने हमारे संवाददाता से साक्षात्कार में कहा कि इस फिल्म-सप्ताह के सफल आयोजन के लिए उन्हों ने स्वयं फिल्में चुनी हैं।उन की आशा है कि इस आयोजन से चीनी लोगों को श्रीलंका की ज्यादा जानकारी मिलेगी।श्री अम्नुगामा ने कहाः

'हम ने इस फिल्म-सप्ताह के दौरान दिखाई जाने वाली फिल्मों के चयन में बहुत समय लगाया है।चुनिंदा फिल्मों में से एक नवीनतम है,जो श्रीलंका में भी अभी रिलीज हुई है।चीनी लोग हमारे देश के बारे में कुछ जानते है। हम चाहते हैं कि वे फिल्मों के जरिए श्रीलंका को नजदीक से जान सकें।ये फिल्में श्रीलंकाई जनता की भावनाओं और श्रीलंका की परंपराओं से भरी हुई हैं।हमें विश्वास है कि चीनी दर्शक इन्हें पसंद करेंगे।'

पेइचिंग में आयोजित श्रीलंकाई फिल्म-सप्ताह वर्ष 2007 में हुई सैंकड़ों चीनी व विदेशी सांस्कृतिक गतिविधियों में से सिर्फ एक है।इसी साल चीन और विदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान खासा समृद्ध रहा है।बहुत से देशों ने चीन में अपने संस्कृति वर्ष,कला- प्रदर्शनियों,फिल्मोत्सव और संगीत समारोह जैसे आयोजन किए हैं।गत अप्रेल में चीन-फ्रांस संस्कृति उत्सव पेइचिंग और शांघाई आदि 14 शहरों में आयोजित हुआ,जिस के दौरान प्रस्तुत 100 से अधिक प्रदर्शनों ने हजारों चीनी लोगों को आकर्षित किया।इस के बाद जापान और कोरिया गणराज्य ने चीन में फिल्म-सप्ताहों, कला प्रदर्शनियों और मंचों का आयोजन किया।2007 में चीन-स्पेन संस्कृति वर्ष भी मनाया गया ।इस आयोजन के दौरान स्पेनिश शास्त्रीय नृत्य—फ़्लामेंको का विशेष शो,आधुनिक डिजाइनों की प्रदर्शनी और फोटो-प्रदर्शनी आयोजित की गई ।गत 17 अक्तूबर को चीन-यूनान संस्कृति वर्ष मनाने का आयोजन शुरू हुआ।इस आयोजन के पहले भाग के रूप में आधुनिक यूनानी कला-प्रदर्शनी राजधानी संग्रहालय में लगाई जा रही है,जिस में चित्र और मूर्तियों समेत बहुत सी कलात्मक वस्तुएं प्रदर्शित हैं।चीनी कृषि विश्वविद्यालय में एम.ए के लिए पढ़ रहे छात्र यांग झ ने यह प्रदर्शनी देखने के बाद कहाः

'हालांकि मै कला नहीं पढ रहा हूं और कला के बारे में ज्यादा नहीं जानता हूं,लेकिन
यहां प्रदर्शित चित्रों और मूर्तियों ने मुझे बहुत प्रभावित किया है।अगर आप का मन अविवेकी और उतावली स्थिति में है,तो इन कलात्मक वस्तुओं को देखने के बाद जरूर शांति मिलेगी।कला सचमुच जादूभरी होती है।'

यूनान सरकार ने पेइचिंग के विश्वविख्यात प्राचीन राजप्रासाद के पास यूनानी संस्कृति-घर स्थापित किया है।इस में यूनानी संस्कृति की जानकारी देने वाले ढेर-सारे फोटो पेइचिंग वासियों और चीन के अन्य क्षेत्रों से आए पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।