2008-07-29 12:18:10

अफीम युद्ध के बारे में जानकारी

मजफ्फरपुर बिहार केजसीम अहमद,रजिया सुलताना औ गुलाम नवी ,सरीता कुमारी,मुजफ्फ़रपुर बिहार के रोयल लिसनर्स क्लब के जासीम अहमद,मऊ नाथ उत्तर प्रदेश के फैयाज अहमद अंसारी, शमशाह अंसारी, मुहम्मद इर्शाद, विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश की सुश्री रहमतुन्निसा और कोआथ बिहार के सुनील केशरी, डी.डी साहिबा, संजय केशरी, सीताराम केशरी, खुशबू केशरी बवीता केशरी, प्रियांका केशरी, एस के जिंदादिल के प्रश्नों के उत्तर दिए जा रहे हैं।

मजफ्फरपुर बिहार केजसीम अहमद,रजिया सुलताना औ गुलाम नवी और सरीता कुमारी ने अफीम युद्ध के बारे में जानकारी हासिल करने की इच्छा व्यक्त की.

चीन में दो बार अफीम युद्ध चले .पहला अफीम युद्ध ब्रिटेन द्वारा चीन पर किया गया सर्वप्रथम आक्रमणकारी युद्ध है.ब्रिटेन ने 19वीं शताब्दी के मध्य में अफीम के व्यापार को लेकर ही चीन के विरूद्ध आक्रमणकारी युद्ध छेड़ा था.यह युद्ध सन् 1840 में हुआ और सन् 1842 तक चला.18वीं सदी के अंत में ब्रिटेन ने चीन को भारी मात्रा मं अफीम का निर्यात किया,जिस से उसे ढेर सारी चांदी का लाभ हुआ.अफीम सेवन से बहुत से चीनियों की सेहत पर बुरा असर पड़ा और राजकोष खाली होने लगा.इस से छिंग राजवंश की सरकार की आंखें खुलीं और सम्राट ने सन् 1838 के अंत में लिन चे-श्यू को अफीम के व्यापार पर पाबंदी लगाने के लिए विशेष दूत नियुक्त किया.अगले साल मार्च में लिन चे-श्यू ने दक्षिण चीन के क्वांगचो शहर जाकर समुद्री रक्षा-व्यवस्था कड़ी की और अफीम के व्यापारियों की गिरफ्तारी कराई.3 से 25 जून के बीच जब्द किए गए 11 खाल अस्सी हजार किसो अफीम को हुमन समुद्रतट पर सार्वजनिक रूप से नष्ट कर दिया गया.इस से पहले अप्रैल में ही ब्रिटेन ने अमरीका औऱ फ्रांस के समर्थन पर व्यपारियों की रक्षा के बहाने कप आंफ़ गुट होप ले नौपोतों का एक बड़ा चीन की ओर रवाना करवा दिया था.28 जून को ब्रिटिश नौसेना ने चू-च्यांग या पर्ल नदी के मुहाने पर नाकेबंदी कर दी.इस प्रकार अफीम युद्ध की शुरूआत हुई,जुलाई में ब्रिटिश नौसेना ने उत्तर की ओर बढते हुए पेइचिंग के नजदीक ताकू बन्दरगाह पर कब्जा करके छिंग राजवंश की सरकार पर दबाव डालने की कोशिश की.इस पर सम्राट ने लिन च-श्यु तो पद से बर्खास्त कर दिया और ब्रिटेन के साथ शांति समझौता सपन्न करने के लिए दूसरा अधिकारी क्वांगचो शहर भेजा.

1841 की जनवरी में ब्रिटन ने क्वांगचो के पास चीनी सेना के दो ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया.27 जनवरी को सम्राट ने ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध षोषित कर दिया.ब्रिटेन ने अक्तबर में पूर्वी चीन के तिन-हाई और निनपो आदि नगरों पर कब्ज़ा कर लिया और 1842 की जुलाई में उस की सेना चच्यांग नगर पर अधिकार कर यांगत्सी नदी के किनारे चीन के भीतरी क्षेत्र की ओर बढने लगी.29 अगस्त को छिंग राजवंश की सरकार ने ब्रिटेन के साथ नानचिंग संधि पर हस्ताक्षर किए.तब से चीन एक अर्ध-उपनिवेशिक और अर्ध-सामंती देश बन गया.

अक्तूबर 1856 में चीनी नौसेना ने ह्वांगफू बन्दरगार के पास रूके या-लो नामक एक चीनी तस्कर जहाज की जांचकर उस पर सवाल 2 समुद्री डाकुओं और 10 चीनी नाविकों को पकड़ा.इस जहाज का मालिक एक चीनी था.तस्करी की सुविधा के लिए उस ने हांगकांग के ब्रितानी अधिकारियों से एक वर्षीय लाइसेंस प्राप्त की थी.चीनी नौसेना ने इसलिए इस जहाज पर सवार 2 समुद्री डाकुओं और 10 नाविकों को गिरफ्तार किया,क्योंकि उस की लाइसेंस की प्रभावी अवधि कब से ही पूरी हो गयी थी.यह चीन का एक अंदरूनी मामला था,जिस का ब्रिटेन से कोई वास्ता नहीं था.पर क्वांगचो शहर स्थित ब्रितानी कोंस्लर ने कहा कि "या-लो"जहाज ब्रिटेन का है और मनगढंत रूप से चीनी नौसेना पर आरोप लगाया कि उस ने जहाज के ऊपर फहराए ब्रिटेन के राष्ट्रीय ध्वज को नीचे खींच लिया था.इस बहाने से लगभग 10 दिनों के बाद ब्रिटिश सेना ने क्वांगचो पर छापा मारकर दूसरा अफीम युद्ध छेड दिया.अपनी ताकतवर फौजी शक्ति के चलते ब्रिटेन ने जल्द ही क्वांगचो पर कब्जा कर लिया.पर क्वांगचोवासी बहुत बहादुर थे.करीब दो महीनों के बाद उन्हों ने ब्रितानी सेना के ठिकानों को जलाकर नष्ट कर दिया और कब्जावरों को शहर से भगा दिया.

मुजफ़रपुर बिहार के रोयल लिसनर्स क्लब के जासीम अहमद का सवाल है कि चीनी लड़कियों को लोहे के जूते पहनाए जाते हैं ऐसा क्यों किया जाता है?

दोस्तो,पता नहीं आप ने कहां से यह खबर सुनी है कि चीनी लड़कियां लोहे के जूते पहनती हैं.यह खबर मनगढंत लगती है.क्योंकि खुद हम चीनी तक भी इस बात से कतई वाकिफ़ नही�� है.हम समझते हैं कि दुनिया के किसी भी देश में लड़कियों के साथ ऐसा क्रूर बर्वात नहीं हो सकता है.आप सोचिए कि लोहे के जूते बनाने में कितनी लागत लगायी जानी चाहिए? इन जूतों को कैसे पहना जा सकता? और इस तरह के जूते बनाने की क्या जरूरत है? सभी लड़कियां सौंदर्य के पीछे भागती हैं.सुन्दर जूते लोहे से कैसे बन सकते हैं? वास्तव में भारतीय लड़कियां जिस तरह के जूते पहनती हैं,वहींजूते चीनी लड़कियां भी पहनती हैं.भारत की भांति चीन के बाजारों में भी लड़कियों के लिए लाल,गुवाबी और अन्य जीवंत रंगों में फूटवियर का कंलेक्शन पेश किया जाता है.इन फूटवियर में कढाई,बर्डवर्क और रंगीन पत्थरों का उपयोग होता है,जो सुन्दर दिखने के साथ आरामदेह का अहसास देते हैं