2009-01-19 15:06:21

एड्ज़ रोग पर ध्यान देने वाले लोग

एड्ज़ रोग संबंधी जानकारी का व्यापक प्रसार होने के साथ इस रोग के प्रति चीनी लोगों में डर बहुत कम हो गया है और समाज में इस रोग के रोगियों से भेदभाव भी कदम ब कदम कम होता जा रहा है। आज अनेक चीनी एड्ज रोगियों पर बड़ा ध्यान देते हैं और विभिन्न तरीकों से उनकी मदद करने की कोशिश करते हैं। आज के जीवन और समाज कार्यक्रम में हम आप को इस बारे में जानकारी देंगे।

43 वर्षीय थाओ थुंग श्वेई दक्षिण-पश्चिमी चीन के क्वेई च्यो प्रांत के एक किसान हैं। दस वर्ष पहले वे एड्ज के शिकार हुए। तीन वर्ष पहले उन की शारीरिक स्थिति बहुत बिगड़ी पर अब इलाज के बाद उन की स्थिति स्थिर है। कुछ समय पहले, थाओ थुंग श्वेई ने एड्ज रोगियों के प्रतिनिधि की हैसियत से पेइचिंग में इस रोग की रोकथाम पर हुए गैरसरकारी मंच में भाग लिया। थाओ थुंग श्वेई ने तब बताया कि उनके जन्मस्थान में लगभग 2 हजार एड्ज रोगी हैं और उन्हें सरकार व समाज से बड़ी मदद हासिल हुई है। उन के अनुसार, हमारी एड्ज के विषाणु एच आई वी के लिए मुफ्त जांच की जाती है। हमारे बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा मुफ्त है और रोगों के इलाज के लिए सभी दवाएं भी। ग्रामीण क्षेत्र के एड्ज रोगी होने के बावजूद मैं एच आई वी विषाणु की मुफ्त जांच करा सकता हूं यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। यह सब हमारे लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

श्री थाओ थुंग श्वेई ने कहा कि अब उन की शारीरिक स्थिति अपेक्षाकृत अच्छी है और वे आम लोगों की ही तरह जीवन बिता रहे हैं। पर इसे वे सरकार व समाज द्वारा एड्ज रोगियो पर दिये जा रहे ध्यान से अलग करके नहीं देख पाते हैं।

श्रोताओ, पिछली शताब्दी के 80 के दशक के मध्य में चीन में एड्ज का प्रथम मामला पाये जाने के बाद से अब तक चीन में कुल 8 लाख 40 हजार लोग इस रोग से प्रभावित हुए हैं। इसके चलते इस रोग का नियंत्रण करना और इसके रोगियों को आम नागरिकों की तरह जीवन बिताने में सक्षम बनाना चीन के सरकारी स्वास्थ्य विभागों तथा समाज के ध्यान का केंद्र बन गया है।

एड्ज रोगियों के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए, चीन सरकार ने कई उदार नीतियां बनायी हैं। मिसाल के लिए, सरकार गरीब एड्ज रोगियों को मुफ्त दवाएं देती हैं और उन का मुफ्त इलाज करती है। इसके अलावा वह एड्ज विषाणु से प्रभावित महिलाओं को प्रसव के समय विशेष सेवा प्रदान करती है। गरीब एड्ज रोगियों तथा उन के परिवार को सरकारी भत्ता मिलता है और इस रोग के विषाणु से प्रभावित माता-पिता की मृत्यु होने पर उन के बच्चे सरकार व समाज के विभिन्न तबकों से मदद पाते हैं।

दक्षिण-पश्चिमी चीन के व्यन नान प्रांत की राजधानी ख्वन मींग में सूर्य मातृभूमि नामक एक संगठन विशेष रूप से एड्ज रोगियों की मदद करता है। इस संगठन के कर्मचारी श्री ली व्यन ने कहा, चीन के व्यन नान के 80 प्रतिशत एड्ज रोगी मादक पदार्थों के सेवन से इस रोग के शिकार हुए। लम्बे अरसे से समाज से अलग रहने के कारण उन्होंने आम तौर पर बुनियादी जीवन क्षमता भी खो दी है। सूर्य मातृभूमि मुख्य रूप से उन्हें मानसिक समर्थन देता है और उन्हें पुनः समाज में वापस लौटाने का एक मंच प्रदान करता है।

एड्ज रोगियों के आत्मविश्वास की बहाली के लिए सूर्य मातृभूमि के कर्मचारी उन्हें कुछ कला सिखा कर उनमें रोजगार क्षमता पैदा करते हैं। इतना ही नहीं, सूर्य मातृभूमि ने उन के परिवारों को भी प्रशिक्षित करता है। वर्ष 2003 के अंत से अब तक, सूर्य मातृभूमि कुल 270 एड्ज रोगियों तथा 115 परिवारों को प्रशिक्षण दे चुका है।

पूर्वी चीन के एन ह्वे प्रांत के फू यांग शहर में उद्योगपतियों ने एड्ज बाल राहत संघ बनाया है। संघ की अध्यक्ष सुश्री चांग ईंग ने बताया कि संघ न केवल एड्ज से पीड़ित बच्चों को सहायता देता है, बल्कि हर हफ्ते उन्हें इकट्ठा करके कुछ दिलचस्प गतिविधियों का आयोजन भी करता है। सुश्री चांग ईंग ने कहा कि पिछले दो वर्षों में संघ की सहायता पाने वाले बच्चों में स्पष्ट परिवर्तन देखे गये हैं। उन्होंने कहा, पहले ये भेदभाव के वातावरण में फंसे थे। पर हमारे यहां आने पर इनमें से हर एक को महत्व मिला। यहां हर एक बच्चे के पास पढ़ने और खुद को साबित करने के अवसर भी हैं। यहां उन की भाषा समान है। वे स्वतंत्र रूप से विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। यहां होने वाली गतिविधियों से इन बच्चों में पुनः आत्मविश्वास की स्थापना हुई है।

संघ की सहायता से एड्ज से प्रभावित 280 बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की खुशी देख कर सुश्री चांग ईंग तथा उन के सहकर्मी भी बहुत खुश हैं।

श्रोताओ, इधर चीन के कुछ फिल्म सितारों ने भी स्वेच्छा से एड्ज रोगियों की मदद के लिए आयोजित परोपकारी गतिविधियों में भाग लिया है और उन के सामाजिक प्रभाव ने लोगों में एड्ज रोगियों का विशेष ख्याल रखने की भावना जगाई है। इस वर्ष की शुरुआत में पेइचिंग के कुछ प्राइमरी स्कूलों के छात्रों ने भी एड्ज अनाथों को अपने घर में आमंत्रित किया।

इतना ही नहीं, चीन के एड्ज रोगी भी मिलकर इस रोग के खिलाफ़ संघर्ष करने की कोशिश कर रहे हैं। 29 वर्षीय ली श्यांग एड्ज रोगी हैं। तीन वर्ष पहले, उन्होंने कुछ एड्ज रोगियों के साथ मिल कर लाल वन नामक एक संगठन की स्थापना की। लाल वन ने अपनी स्थापना के बाद से एड्ज रोग संबंधी जानकारी का प्रसार-प्रचार करने और इस रोग के रोगियों के प्रति लोगों के भेदभाव को कम करने के लिए अनेक काम किये। ली श्यांग ने कहा, हम एड्ज रोगियों को विभिन्न तरीकों से मदद देने की कोशिश करते हैं। हम ने इसके लिए हॉट लाईन खोलने, वेबसाइट स्थापित करने और पत्रिकाएं प्रकाशित करने जैसे रास्ते खोजे। इस के अलावा, हमने खुद खींचे चित्रों की प्रदर्शनी भी आयोजित की और कुछ टी वी फिल्में भी बनाईं।

चीन में लाल वन जैसे एड्ज रोगियों के संगठनों की संख्या इधर 40 से ज्यादा हो चली है। वे एक-दूसरे को प्रेरित कर अधिक से अधिक लोगों तक एड्ज रोग की सही जानकारी पहुंचा रहे हैं और इस तरह समाज को भारी योगदान दे रहे हैं।