2009-06-17 16:51:30

ब्रिक की प्रथम विधिवत शिखर वार्ता

दोस्तो , ब्रिक चार देशों के नेताओं की प्रथम विधिवत वार्ता 16 जून को रुस के येकतरिनबर्ग में हुई । ऐसी गम्भीर घड़ी पर जब कि विश्व वित्तीय संकट गहराई में फैल रहा है , चीन , भारत , रुस और ब्राजिल प्रमुख नवोदित बाजार देश होने के नाते सहयोग के जरिये विश्व वित्तीय संकट का मुकाबला करने और विश्व आर्थिक पुनरुत्थान को बढावा देने पर सहमत हुए हैं ।

वार्ता की समाप्ति पर जारी संयुक्त वक्तव्य में चार देशों ने विभिन्न पक्षों से अपील की है कि गत अप्रैल में हुए जी बीस के लंदन वित्तीय शिखर सम्मेलन में प्राप्त सहमति को सक्रिय रुप से मूर्त रूप दिया जाए और इसी संदर्भ में घनिष्ठ सहयोग करने का वादा किया जाये । वर्तमान ध्यानाकर्षक विश्व वित्तीय संस्थाओं के सुधार के बारे में चार देशों ने यह प्रस्ताव पेश किया है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में नवोदित बाजारों और विकासशील देशों के भाषण अधिकार व प्रतिनिधित्व को उन्नत किया जाये , साथ ही एक स्थिर , प्रत्याशित और बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्था की स्थापना पर भी जोर दिया । चार देशों ���े अपने संयुक्त वक्तव्य में व्यापार संरक्षणवाद पर रोक लगाने की मांग भी की है और अनवरत विकास और ज्ञान विज्ञान तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग करने का अपना संकल्प व्यक्त किया ।

वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में पेचीदा परिवर्तन की स्थिति में मौके का फायदा उठाकर सहयोग कैसे मजबूत किया जाये , इसी बात की चर्चा में चीनी राष्ट्राध्यक्ष हू चिन थाओ ने यह विचार व्यक्त किया कि चार देशों के लिये यह जरुरी है कि अपनी अपनी कार्यांवित व्यवस्था अपना कर वार्तालाप व आदान प्रदान से आपसी राजनीतिक विश्वास बढाया जाये , साधन स्रोतों , बाजारों , श्रम शक्तियों व ज्ञान विज्ञान की अपनी श्रेष्ठताओं को प्रदर्शित कर आर्थिक सहयोग बढाने में तेजी लाये जाये , और मानवीय आवाजाही के जरिये सर्वांगीर्ण सहयोग को गहराई में ले जाने के लिये मजबूत आधार तैयार किया जाये । उन्हों ने बल देते हुए कहा कि चार देशों को एक दूसरे के चुनिंदा विकास रास्ते का सम्मान करना चाहिये , ताकि विकास अनुभवों से सीखा जाये और दूसरे विकासशील देशों के साथ सफल अनुभवों व विकास फारमूलों का समान उपभोग किया जा सके।

श्री हू चिन थाओ ने अपने भाषण में चार देशों द्वारा विश्व वित्तीय संकट और विश्व आर्थिक वृद्धि की बहाली कैसे किये जाने के बारे में सुझाव पेश किये । उन्हों ने कहा कि सर्वप्रथम यह जरूरी है कि चार देश विश्व वित्तीय संकट से पुनरुत्थान करने में पहल करें । दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के सुधार को बढावा देने की पूरी कोशिश की जाये । तीसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी लक्ष्य को बखूबी अंजाम देने पर जोर लगाया जाये । चौथी तरफ विश्व वित्तीय संकट के मुकाबले के साथ साथ विकास को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख सवालों का समुचित समाधान किया जाये ।

रुसी राष्ट्रपति मेदवेदेव ने अपने भाषण में यह भी कहा कि बड़े आर्थिक ताकतवर ब्रिक चार देशों के लिये यह जरुरी है कि समन्वय बिठाकर भारी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सवाल पर अपना प्रस्ताव पेश किया जाये , जी बीस वाशिंगटन व लदन वित्तीय शिखर सम्मेलनों में हुई सहमतियों को मूर्त दिया जाये , अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को संपूर्ण बनाया जाये , बहुपक्षीय व द्विपक्षीय सहयोग को बढा़या जाये और ऊर्जा व खाद्यान सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन आदि सवालों का समान रूप से सामना किया जाये । भारतीय प्रधान मंत्री मन मोहन ने कहा कि चार देशों के लिये संरक्षणवाद का दृढ़ विऱोध करना और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व वित्तीय ढांचागत सुधार को बढावा देना जरूरी है , साथ ही ज्ञान विज्ञान , ऊर्जा और कृषि के क्षेत्रों में सहयोग बढाने के लिये सार्थिक आर्थिक सहयोग करना भी अत्यावश्यक है । ब्राजिल के राष्ट्रपति लुला ने जताया कि विश्व वित्तीय संकट से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने नवोदित बाजार देशों के महत्व को समझ लिया है , ब्रिक चार देशों के सहयोग में विकास का बड़ा गुझाइश निहित है । ब्रिक सब से पहले अर्थशास्त्रियों द्वारा 21 वीं शताब्दी की शुरुआत में प्रस्तुत आर्थिक शास्त्र की धारणा है । जब कि अब प्रमुख नवोदित बाजार देश होने के नाते उन की जन संख्या सारी दुनिया की कुल जनसंख्या का 42 प्रतिशत बनती है और घरेलू संकल राष्ट्रीय उत्पाद कुल विश्व मूल्य का 14.6 प्रतिशत है , व्यापार विश्व व्यापार का 12.8 प्रतिशत भी बनता है , औसत खरीददारी के हिसाब से विश्व आर्थिक वृद्धि के लिये उक्त चार देशों की योगदान दर 50 प्रतिशत से अधिक है । आर्थिक शक्तियों के तेज विकास के साथ साथ चार देशों की अंतर्राष्ट्रीय प्रभावशाली शक्तियां दिन ब दिन मजबूत होती जा रही हैं । साथ ही लोग उक्त चार देशों के भावी विकास पर आशाप्रद भी हैं ।