मौके पर उपस्थितों ने यह विचार व्यक्त किया है कि पचास साल पूर्व चीन की केंद्र सरकार ने तिब्बत में जनवादी सुधार लागू कर सामंती भूदास व्यवस्था समाप्त की , जिस से दस लाख तिब्बती भूदास शारीरिक स्वतंत्रता व अस्तित्व रहने का अधिकार प्राप्त कर तिब्बत का मालिक बन गए । यह सर्वविदित है कि जनवादी सुधार किए जाने के बाद तिब्बत में जमीन आसमान का परिवर्तन हुआ है, तिब्बत का जनवादी सुधार विश्व मानवाधिकार कार्य के लिए एक महान योगदान भी है ।
संघ के उपाध्यक्ष छङ वेईतुंग ने कहा कि दलाई लामा ने"मानव जगत का नरक"आदि शब्दों से नए चीन की स्थापना के बाद के नये तिब्बत पर लाछन लगायी , जिस का मकसद तिब्बती जनता के सुखी जीवन की अनदेखी कर तिब्बत की स्थिरता व अमनचैन को नष्ट करना है ।(श्याओ थांग)