
हाल के दिनों में बेल्जियम के होलैंड भाषा वाले प्रमुख प्रिंट मीडिया द मोर्गन और द टिज्ड में अलग-अलग तौर पर वरिष्ठ संवाददाता श्री वेंडपिट्ट का लेख छपा है। लेख में 14 मार्च ल्हासा हिंसक घटना का तथ्य बताया गया और पेइचिंग ऑलंपिक का बहिष्कार करने के गलत कथन का खंडन किया गया है।
लेख में कहा गया है कि ल्हासा हिंसक घटना के बारे में पश्चिम देशों ने बहुत रिपोर्टें दीं और पेइचिंग ऑलंपिक का बहिष्कार करने के नारे भी लगाए। संबंधित रिपोर्टें तथ्यों के अनुसार नहीं हैं।
लेख में कहा गया है कि बेल्जियम और यूरोप को तिब्बत और मानवाधिकार आदि सवालों पर चीन पर मनमाने ढंग से टिप्पणी करने के बजाए चीन के तेज विकास को स्वीकार करना चाहिए।
ऑलंपिक के बारे में लेख में अन्तर्राष्ट्रीय ऑलंपिक समिति के अध्यक्ष श्री रोक के हवाले से कहा गया है कि ऑलंपिक से अवश्य चीन की मानवाधिकार स्थिति में सुधार आएगा। तनावपूर्ण वातावरण में मानवाधिकार के बारे में आदान-प्रदान नहीं किया जाना चाहिए। (ललिता)
