लेकिन वाटर चेस्टनूट की कल्पना के बाहर था कि छुदछुद डाक्टर ने उस की बीमारी की जांच करने से इनकार कर दिया और कहा, वह फल नहीं है , इसलिए उसे इस फलों वाले अस्पताल में नहीं आना चाहिए ।
वाटर चेस्टनूट ने चिंतित स्वर में कहा, मैं भी फलों की दुकान पर बिकती हूं , अगर विश्वास नहीं , तो आप सेब बहन और संतरा दादी से पूछ सकते हैं ।
जो फलों की दुकान में बिकती है , उन में सब का सब तो फलों के परिवार के नहीं है , फल फुल का बीज होता है , किन्तु तुम वनस्पति की गोलाकार जड़ है । ज्ञानी छुदछुद ने जवाब में कहा ।
आड़ू बहन ने दर्द से पीड़ित पेट पर हाथ दबाते हुए लड़खड़ाती आवाज में कहा , मेरे विचार में वाटर चेस्टनूट को सब्जी वाले अस्पताल में जाना चाहिए । तरकारियों की सूची में वाटर चेस्टनूट की मीत वाली तरकारी मिलती है ।
हा-हा-हा , सभी आड़ू की बातों पर खिलखिला उठे ।
वाटर चेस्टनूट लजा से गड़ गई , वह चुपके से सब्जी के अस्पताल को चली गई ।