2008-06-04 18:56:55

जन-दैनिक ने नामांकित लेख प्रकाशित कर कहा कि दलाई द्वारा तिब्बत के मानवाधिकार की स्थिति पर सबूत देना पश्चिमी शक्तियों के तथाकथित मानवाधिकार के प्रति व्यंग्य है

चीन के मुख पत्र जन-दैनिक ने चार तारीख को नामांकित लेख प्रकाशित कर कहा कि वर्तमान में चीन सरकार और विभिन्न जातियों की चीनी जनता भूकंप विरोधी राहत कार्य में संलग्न हैं , लेकिन ब्रिटिश संसद के निचले सदन की बाहरी समिति ने तथाकथित"चीनी मानवाधिकार सुनवाई मीटिंग"बुलायी और दलाई को सबूत देने के लिए आमंत्रित किया। इस कार्रवाई से एक अरब 30 करोड़ चीनी जनता की भावना को ठेस पहुंची है और यह कुछ पश्चिमी शक्तियों के तथाकथित"मानवाधिकार"के प्रति व्यंग्य भी है ।

लेख में कहा गया है कि दलाई गुट के प्रशासन वाले पुराने तिब्बत में व्यापक भू-दासों का गंभीर शोषण किया गया था, उन के पास बुनियादी अस्तित्व का अधिकार भी नहीं था, तो मानवाधिकार कहां से मिलता ? इधर के वर्षों में तिब्बत के दौरे पर आये विदेशी लोगों ने तिब्बत में हुए भारी परिवर्तन को देखा है और कुछ लोगों ने इसे सराहा है कि आज के तिब्बत की मानवाधिकार स्थिति पहले से कहीं अच्छी है । दलाई को चीनी मानवाधिकार को बताने देना अपने आप को "मानवाधिकार रक्षक"कहलाने वाले ब्रिटिश सासंदों के लिए सचमुच एक बड़ा व्यंग्य ही है ।

लेख में कहा गया है कि वनछ्वान में भूकंप आने के बाद अनेक विदेशी मीडिया संस्थाओं की रिपोर्टों व आकलनों का समान विचार है कि चीन सरकार और चीनी जनता प्राणों का बहुत ख्याल रखती हैं ।

लेख में कहा गया कि भूकंप विपदा ग्रस्त क्षेत्रों में जो हुए हैं , वे बेशक चीनी मानवाधिकार की सब से अच्छा पाठ्य पुस्तक है । इस प्रकार के तथ्यों को अनदेख करने से उन का अंधापन जाहिर हुआ ।(श्याओ थांग)