2008-04-03 14:16:14

चीन की मुख्यभूमि और थाइवान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान

मित्रों,कुछ समय पूर्व चीनी राजकीय रेडिया,फिल्म व टी.वी महाब्यूरो ने घोषणा की कि अगले साल की पहली जनवरी से चीन की मुख्यभूमि और थाइवान के द्वारा संयुक्त रूप से बनाए गए टी.वी फिल्मों को मुख्यभूमि के संबंधित प्राधिकरण से अनुमति मिलकर मुख्यभूमि द्वारा निर्मित टी.वी फिल्म का दर्जा देकर रिलीज और प्रसारित किया जाना शुरू होगा।इस से चीन की मुख्यभूमि व थाइवान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान में नया विषय जुड़ गया है।

पिछली शताब्दी के 90वें दशक के प्रारंभ में थाइवान द्वारा निर्मित `संध्या की लीला`,`वसंत आया फिर गया`और `6 स्वप्न` आदि टी.वी धारावाहिकें चीन की मुख्यभूमि में प्रसारित की गईं।इन की लोकप्रयिता इतनी थी कि दर्शकों की संख्या एक रिकार्ड बनी।तब से दोनों भागों के टी.वी फिल्मकारों ने बहुआयामी सहयोग किए और अनेक श्रेष्ठ टी.वी फिल्में बनाईं।लेकिन सहयोग कुछ नीतिगत परिसीमन से बंधे हुए थे।मिसाल के लिए संयुक्त रूप से निर्मित टी.वी फिल्म में थाइवान के अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की संख्या को निश्चित अनुपात से ज्यादा होने और संयुक्त रूप से निर्मित कार्यक्रमों को सब से वांछित समय-अवधि में प्रसारित किए जाने की इज़ाजत नहीं थी।इन तत्वों ने थाइवान के फिल्म व टी.वी जगतों के मुख्यभूमि में कारोबार करने की सरगर्मी पर दुष्प्रभाव डाला।इस बार मुख्यभूमि की संबंधित नीतियों में रद्दोबदल होने के पश्चात दोनों भागों द्वारा साझे तौर पर बनाए गए टी.वी फिल्मों के साथ रिलीज और प्रसारण जैसे क्षेत्रों में अकेले मुख्यभूमि द्वारा निर्मित टी.वी फिल्मों के बराबर व्यवहार किया जाएगा।थाइवान की मशहूर अभिनेत्री,कार्यक्रम निर्माता सुश्री यांग फे-फे ने इसे थाइवानी पक्ष के लिए एक खुशखबरी मानी।उन्हों ने कहाः

` मुख्यभूमि की यह नई नीति हमारे लिए फायदेमंद है,जिस से हमें मुख्यभूमि के हमपेशाओं के बराबर दर्जा मिलेगा।मुझे विश्वास है कि इस तरह दोनों पक्षों के बीच सहयोग का बेहतर भविष्य होगा औऱ थाइवानी पक्ष इस से प्रेरित होकर पूंजी-निवेश और प्रचार-प्रसार में अच्छे से अच्छा करेगा।मुख्यभूमि के इस कदम ने थाइवान के फिल्मकारों को विकास का एक नया मौका दिलाया है और वे जरूर मुख्यभूमि में जाकरर फिल्म बनाना चाहते हैं।दूसरी ओर साझे तौर पर निर्मित कार्यक्रमों में थाइवानी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का अनुपात बढने से कार्यक्रमों के प्रति थाइवानियों में दिलचस्पी बहुत बढ जाएगी।इस से कार्यक्रम ज्यादा प्रभावी और कमाऊ होगे।`

नई नीति के अमलीकरण से चीन की मुख्यभूमि और थाइवान के फिल्म व टी.वी उद्योगों का साथ-साथ विकास हो सकता है।दोनों भागों की संयुक्त रूप से बनने वाली टी.वी धारावाहिकें मुख्यभूमि के दसियों टी.वी चैनलों पर सब से वांछित अवधि में प्रसारित होंगी।जब कि वर्तमान में सिर्फ खुद मुख्यभूमि द्वारा निर्मित टी.वी फिल्मों को इसी अवधि का प्रयोग करने का हक है।

चीन की मुख्यभूमि और थाइवान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान पिछली सदी के 9वें दशक से शुरू हुआ।सन् 1987 में थाइवानी प्रशासन ने अपने नागरिकों पर लगी चीन की मुख्यभूमि में रिश्तेदारों से न मिलने की पाबंदी हटाई,तब से थाइवान के सांस्कृतिक जगत के कुछ व्यक्तियों ने मुख्यभूमि के हमपेशाओं से संपर्क करना शुरू किया।थाइवान के कुछ जाने-माने गायक व गायिकाएं सब से पहले मुख्यभूमि आए।उन में से गायिका तन ली-चुन सर्वाधिक मशहूर थीं।उन्हों ने अपनी मधुर आवाज और पवित्र गीतों से मुख्यभूमि के दर्शकों में एकच्छत्र राज स्थापित किया और अनगिनत युवाओं से बुर्जुगों तक को अपने दीवाने बनाए।अगस्त 1992 में मुख्यभूमि के 12 सदसीय कला-मडली ने थाइवान की यात्रा की,तब से चीन की मुख्यभूमि और ताइवान के बीच बराबर तौर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान शुरू हुआ।

इस के बाद मुख्यभूमि और थाइवान के समान प्रयासों के बदौलत द्विपक्षीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान व सहयोग बढते गए।अपूर्ण आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2007 के अंत तक दोनों पक्षों के बीच हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े मुद्दों की सख्या 5000 हो गई है।चालू साले के पहले 10 महीनों में यह संख्या 438 तक पहुंची।इस समय दोनों भागों के बीच हो रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दायरे में साहित्य,ललितकला,संगीत,नाट्य,नृत्य,

हास्य-संवाद,नटकला,सांस्कृकित अवशेष,परंपरागत रीति-रिवाज,शिक्षा,पुस्तकालय और सांस्कृतिक प्रबंधन आदि विषय आते हैं।

पूर्वी चीन के शांघाई शहर में अभी समाप्त हुए नौंवे अंतर्राष्ट्रीय कला उत्सव के दौरान थाइवान की एक नाट्यमंडली ने पेइचिंग आँपेरा के परंपरागत पटकथा `गतल मुकदमा` को रूपांतरित कर मंचित किया,जिस का मुख्यभूमि के दर्शकों ने खूब स्वागत किया।इस आँपेरा में अभियन करने वाले मुख्यभूमि के एक अभिनेता ली बाओ-छुन ने थाइवानी कलाकारों के साथ हुए सहयोग की चर्चा करते हुए कहाः

` यह मंडली थाइवान और चीन की मुख्यभूमि के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की पहली व्यावसायिक इकाई है,जिस से दोनों भागों की सांस्कृकित आदान-प्रदान की भावना झलकती है।मेरे विचार में इस तरह का आदान-प्रदान बहुत महत्वपूर्ण है।वैसे भी यह आदान-प्रदान सद्भावनापूर्ण है और सब लोग इस से बड़ी खुशी प्राप्त कर सकते हैं। `

ली बाओ-छुन ने कहा कि नाट्य क्षेत्र में चीन की मुख्यभूमि और थाइवान के बीच सहयोग की आम रूझान बन गई है।दोनों पक्ष संयुक्त रूप से रचनाए बना रहे हैं और अभिनय कर रहे हैं।उदाहरणार्थ थाइवान के सुप्रसिद्ध लेखक श्री पाई श्यान-युंग ने मुख्यभूमि के सूचो खुनछु नाटक टिएटर के साथ संयुक्त रूप से परंपरागत नाटक `मू तान मंडप` को रूपांतरिक कर मंचित कराया,जिस ने थाइवान और मुख्यभूमि दौनों में बड़ी सफलता प्राप्त की है।इस के अलावा चीन की मुख्यभूमि,थाइवान और हांगकांग तीन पक्षों द्वारा साझे तौर पर बनाया गया नाटक ` आडूची उद्यान` भी तीनों भागों के दर्शकों के सिरे चढा।इस नाटक के थाइवानी निर्देशक श्री लाई शंग-छ्वान के अनुसार थाइवान,मुख्यभूमि और हांगकांग का त्रिपक्षीय सहयोग तीनों में सांस्कृकित सहयोग के विकास की प्रवृत्ति बन गया है।उन्हों ने कहाः

`थाइवान में हमें आतुरता सताती है।लगता है कि बाहर जाना अत्यंत जरूरी है।देश की मुख्यभूमिक,हांगकांग और थाइवान तीन क्षेत्रों के चीनियों में सहयोग होने से यह दुनिया और ज्यादा उजली और स्वतंत्र होगी।हमारे पास ज्यादा नई कृतियां हैं।आशा है कि मुख्यभूमि में भी इन्हें मंचित किया जाएगा।जरा सोचें कि एक कृति को मुख्यभूमि,थाइवान और हांगकांग तीन क्षेत्रों में प्रस्तुत करने से कितने दर्शक प्राप्त किए जा सकते हैं? `

श्री लाई शंग-छ्वान ने यह भी कहा कि पिछले कोई 20 वर्षो में देश की भूख्यभूमि और थाइवान के बीच सांस्कृकित आदान-प्रदान से चीनी संस्कृति व कला के विकास को बड़ा बढावा मिला है।दोनों भागों के कलाकारों की आवाजाही से द्विपक्षीय संबंध व अन्य क्षेत्रों में सहयोग भी काफी विकसिक हुए हैं।मुख्यभूमि और थाइवान के सांस्कृतिक जगतों को आगे भी चीनी राष्ट्र की परंपरागत संस्कृति के विकास के लिए उभय कोशिश करनी चाहिए।