चीन में एक भारतीय पत्रकार के रूप में भारत-चीन सम्बंधों और बदलती विश्व व्यवस्था को देखते हुए ब्रिक्स का विस्तार एक दिलचस्प सवाल खड़ा करता है,- क्या यह मंच केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, या भारत और चीन जैसे देशों के लिए वैश्विक दक्षिण की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का अवसर भी है?
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। ऐसे समय में भारत-चीन सम्बंध, दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद, साझा वैश्विक हित और शीत्सांग (तिब्बत) जैसे संवेदनशील मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।
5 सितंबर को पेइचिंग में भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष ‘इंडिया कल्चर डे’ इवेंट का आयोजन किया गया। चीन स्थित भारतीय दूतावास और हाओहान थिंक टैंक के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें भारत और चीन के सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग, विभिन्न देशों के राजनयिक, विशेषज्ञ और पेइचिंग में अध्ययनरत चीनी विद्यार्थियों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
चीनी फिल्म “वन्स अपॉन ए टाइम इन द मिडिल ईस्ट”ने युद्ध को एक रेस्टोरेंट की रसोई के ज़रिए देखने की कोशिश की है।
12 वर्षों तक अथक प्रशिक्षण और साधना के बाद दोनों बहनों ने इस विशेष प्रस्तुति के माध्यम से अपने औपचारिक नृत्य-प्रशिक्षण के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पूरा किया।
दक्षिण चीन के हैनान प्रांत के वुझिशान शहर में एक पुरानी परंपरा नए दौर की पहचान बन रही है।
युन्नान की पहाड़ियों के बीच जियांग यायु ने शहर की चमक-दमक छोड़कर गांव और खेती को अपना भविष्य चुना।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन एक नई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच चीन ने ग्रीन डेवलपमेंट और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए हैं।
चीन में भारतीय दूतावास और होराइजन इनसाइट्स सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में 24 से 31 जुलाई, 2026 तक आयोजित ‘रीडिंग वीक’साहित्य और संस्कृति के माध्यम से भारत और चीन के बीच संवाद को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। सप्ताहभर चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य पुस्तक प्रेमियों को दोनों देशों की उत्कृष्ट साहित्यिक परंपराओं से परिचित कराना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
चीन अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को लगातार नई दिशा दे रहा है। इसी कड़ी में देश ने पारंपरिक गांवों और ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और उपयोग से जुड़े मानकों को और अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित तथा व्यावहारिक बनाने का निर्णय लिया है।
क्या ह्यूमनॉइड रोबोट चाय बना सकते हैं? चीन के फ़ुच्येन प्रांत के फ़ूडिंग शहर में इसका जवाब अब हकीकत बन चुका है।