कभी गर्मियों में एशिया के देशों को सैलानियों की पहली पसंद यूरोप के पर्यटन स्थल होते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। कम से कम इस साल तो यह बदलाव बड़े रूप में दिख रहा है। इसकी वजह है यूरोप में इस साल पड़ी प्रचंड गर्मी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में वैसे भी गर्मी अपनी तासीर बदल रही है।
दुनिया के बाजारों में "मेड इन चाइना" का लेबल एक बार फिर बदल रहा है। अब ये सिर्फ सस्ता नहीं है। अब ये "नई तीन चीज़ें" हैं।
दुनिया भर में चीन के प्रति सकारात्मक धारणा लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। वर्ष 2026 में जारी एक हालिया वैश्विक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के प्रति अनुकूल राय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
अगर 'नया तिकड़ी' यानी सौर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और लिथियम बैटरी ने दुनिया को चीन की विनिर्माण क्षमता का अहसास कराया था, तो अब 'अगली पीढ़ी का नया तिकड़ी' यानी एआई, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक दवाएं एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। इससे साफ होता है कि चीन अब केवल दुनिया की 'फैक्ट्री' नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
1937 में लुगोउ ब्रिज की बंदूकों ने जिस त्रासदी को जन्म दिया था, क्या 2026 में टोक्यो का बढ़ता रक्षा बजट इतिहास की उसी आक्रामक आग को फिर भड़का रहा है?
दक्षिण चीन सागर पिछले कई दशकों से वैश्विक शक्ति संतुलन, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे जटिल विवादों में से एक रहा है।
चीन लोक गणराज्य के संस्थापक और दिवंगत चीनी नेता माओ त्से-तुंग की एक प्रसिद्ध पंक्ति याद आती है: "जनता पानी की तरह है और सेना मछली की तरह"।
जापान की बदलती सैन्य नीति ने पूरी एशिया को चिंतित कर दिया है। दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्पित के बाद जापान ने कभी युद्ध ना करने का दुनिया से वादा किया था।
इस वर्ष 7 जुलाई की ऐतिहासिक घटना (मार्को पोलो ब्रिज कांड) की 89वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, जब जापानी सैन्यवाद ने चीन के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया था।
3 सितंबर 2025 को पेइचिंग के थ्येनआनमन चौक पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीनी जनता के जापानी आक्रमण-विरोधी युद्ध और विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ पर कहा: “चीनी जनता हिंसा से नहीं डरती और आत्मनिर्भर व शक्तिशाली है।
साल 2026 में 7 जुलाई की घटना की 89वीं वर्षगांठ मनाई गई। इतिहास में इसे उस घटना के रूप में देखा जाता है जिसके बाद 1937 में जापान और चीन के बीच पूर्ण पैमाने पर युद्ध (द्वितीय चीन-जापान युद्ध)शुरू हुआ।
जुलाई की गर्मी के साथ-साथ चीन की अर्थव्यवस्था में भी एक अलग तरह की गर्मी बढ़ रही है — ग्रीष्मकालीन पर्यटन की भीड़।