साल 2026 में चीन को लेकर दुनिया के लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन की ओर विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बढ़ रहा है।
2015 में स्थापित विश्व रोबोट सम्मेलन (डब्ल्यूआरसी) का 12वां संस्करण अब 19 से 23 अगस्त 2026 तक राजधानी पेइचिंग में आयोजित होगा। यह उसी यात्रा का अगला अध्याय है।
वर्ल्ड रोबोट कॉन्फ्रेंस 2026 (WRC 2026) 19 से 23 अगस्त, 2026 तक पेइचिंग इकोनॉमिक-टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट एरिया में आयोजित की जाएगी।
भारत और चीन, दो पड़ोसी देश, इतिहास के लगभग एक ही मोड़ पर खड़े हुए। भारत ने 79 वर्ष पहले, 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता प्राप्त की। यह लगभग 200 वर्षों की गुलामी के अंत का प्रतीक था।
दुनिया में रोबोटिक्स और मशीन टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी दिशा में चीन की राजधानी पेइचिंग में 2026 वर्ल्ड रोबोट कॉन्फ्रेंस का आयोजन होने जा रहा है।
कभी गर्मियों में एशिया के देशों को सैलानियों की पहली पसंद यूरोप के पर्यटन स्थल होते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। कम से कम इस साल तो यह बदलाव बड़े रूप में दिख रहा है। इसकी वजह है यूरोप में इस साल पड़ी प्रचंड गर्मी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में वैसे भी गर्मी अपनी तासीर बदल रही है।
दुनिया के बाजारों में "मेड इन चाइना" का लेबल एक बार फिर बदल रहा है। अब ये सिर्फ सस्ता नहीं है। अब ये "नई तीन चीज़ें" हैं।
दुनिया भर में चीन के प्रति सकारात्मक धारणा लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। वर्ष 2026 में जारी एक हालिया वैश्विक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के प्रति अनुकूल राय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
अगर 'नया तिकड़ी' यानी सौर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और लिथियम बैटरी ने दुनिया को चीन की विनिर्माण क्षमता का अहसास कराया था, तो अब 'अगली पीढ़ी का नया तिकड़ी' यानी एआई, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक दवाएं एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। इससे साफ होता है कि चीन अब केवल दुनिया की 'फैक्ट्री' नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
1937 में लुगोउ ब्रिज की बंदूकों ने जिस त्रासदी को जन्म दिया था, क्या 2026 में टोक्यो का बढ़ता रक्षा बजट इतिहास की उसी आक्रामक आग को फिर भड़का रहा है?
दक्षिण चीन सागर पिछले कई दशकों से वैश्विक शक्ति संतुलन, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे जटिल विवादों में से एक रहा है।
चीन लोक गणराज्य के संस्थापक और दिवंगत चीनी नेता माओ त्से-तुंग की एक प्रसिद्ध पंक्ति याद आती है: "जनता पानी की तरह है और सेना मछली की तरह"।