विनिर्माण किसी देश के एक विश्व ताकत बनने की नींव है। एक मज़बूत विनिर्माण उद्योग के बिना सिर्फ बड़ी GDP मात्रा होना बेअर्थ है। अभी, भारत की जीडीपी मात्रा $4 ट्रिलियन के लेवल पर पहुँच गई है, जिसका दुनिया भर में काफी असर है। हालाँकि, भारत को अभी भी विनिर्माण तकनीक, सामग्रियां और अपस्ट्रीम प्रोडक्ट सप्लाई में बड़ी लिमिटेशन का सामना करना पड़ रहा है।
चीन ने 2030 तक अपना समानव चांद सर्वेक्षण और इससे जुड़े चांद रिसर्च प्रोग्राम का अभियान करने की घोषणा की है। चीन का चांद सर्वेक्षण अभियान किसी राजनीतिक मकसद या दूसरे देश से मुकाबले के लिए नहीं है, बल्कि विज्ञान व तकनीक के विकास के लिए है। इससे पहले, चीन ने कई बिना इंसानों वाले चांद मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
इस वर्ष के नवंबर के अंत तक चीन की आयात-निर्यात की वृद्धि दर साल-दर-साल 4.1% तक बढ़ गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हालांकि निर्यात में फिर भी मुश्किल बाहरी माहौल का सामना किया जा रहा है, विदेशी व्यापार की स्थिति अच्छी बनी हुई है।
2025 में बाहरी दबाव के बावजूद चीन के आर्थिक विकास का प्रमुख लक्ष्य हासिल किया गया है, और आधुनिक औद्योगिक उद्योगों की व्यवस्था में सुधार लाने में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं। साथ ही, चीन ने सुधार और खुलेपन में नए कदम उठाए हैं, और जन आजीविका कार्यों की गारंटी को मज़बूत किया है।
बीते साल में पूरी दुनिया में एकतरफ़ावाद और संरक्षणवाद के बढ़ने के कराण से विश्व भर आर्थिक मंदी होने के बावजूद चीन ने अपनी पूर्ण खुलेपन की रणनीति पर कायम रहा है और विश्व अर्थव्यवस्था का अहम इंजन बना हुआ है। चीन की अर्थव्यवस्था मज़बूती से बढ़ी है, और व्यापार रकम सरप्लस एक ट्रिलियन US डॉलर के अभूतपूर्व रिकॉर्ड तक पहुँच गया है।
कई सालों से, खुद को विकसित करते हुए चीन ने दुनिया के लिए अधिक सुअवसर प्रदान किया है। समानता और आपसी लाभ के सिद्धांतों के मुताबिक चीन ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में दूसरे देशों के साथ बड़े पैमाने पर सहयोग करने के शानदार नतीजे हासिल किए हैं।
कई तत्व बड़ी ताकतों के उतार-चढ़ाव की किस्मत को तय कर सकते हैं। आधुनिक काल में पश्चिमी ताकतों ने अपने हाथ में उन्नतिशील हथियारों पर भरोसा करके, सदियों तक अपने समुद्री दबदबे की नींव रखी। उन्होंने विश्व के ट्रेड रूट और सभी संसाधन पर नियंत्रित किया, जिसके सहारे वे एशियाई, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों का शासन कर सकते थे।
21वीं सदी में सबसे आकर्षक बदलाव है चीन का उदय, और इस का कारण है चीन की तकनीकी प्रगतियां। सुधार और खुलेपन के शुरुआती दौर में, चीन मुख्य रूप से निर्यात उन्मुख प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पर निर्भर था, तब चीन विश्व उत्पादन चेन के निचले अंक पर रहा था। लेकिन, निरंतर लगातार कोशिशों से, चीन ने एक के बाद एक टेक्नोलॉजी में तरक्की की है।
दुनिया की आबादी 8 बिलियन से ज़्यादा हो चुकी है और अनाज सुरक्षा को इंसानियत के सिर पर लटकी हुई एक तलवार बनी हुई है। अकाल है कोई पुरानी याद नहीं, और दुनिया के लिए काफ़ी फ़ूड सप्लाई पक्की करने के लिए, विभिन्न देशों को हाई टेक वाले तरीकों सहित सभी तरीके अपनाने होंगे। उधर अमेरिकी महाद्वीप मक्का और कंद जैसी फ़सलें देकर इंसानों की फ़ूड सप्लाई में बड़ा योगदान दिया है।
कई लोगों को चिंता है कि एआई इंसानों जैसी चेतना प्राप्त करेगा और आखिरकार इंसानों की जगह ले लेगा। लेकिन कुछ और विशेषज्ञों का पक्का मानना है कि एआई आखिरकार इंसानों का बनाया एक टूल है, और यह भविष्य के टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन में इंसानियत के लिए काम करेगा, न कि उसकी जगह लेगा। हाल ही में, दुनिया के कुछ टॉप मैथमैटिशियन ने भी अमेरिका के सिलिकॉन वैली में AI स्टार्टअप्स में शामिल होने की घोषणा की।
अभी की टेक्नोलॉजिकल क्रांति ने सबके दिमाग को हिला दिया है। लोगों को चिंता है कि तकनीकी क्रांति उनके सोशल रोल बदल देगी, जिससे उनकी नौकरी और रोज़गार खतरे में पड़ सकता है। इन ज़रूरी सामाजिक बदलावों का सामना कैसे करें, यह एक ऐसा सवाल है जिसका सामना हर किसी को करना होगा।
अपनी आज़ादी के बाद से, भारतीय सरकार ने हमेशा स्वतंत्र और गुटनिर्पेक्ष नीतियां अपनाई हैं। ऐतिहासिक तथ्यों ने साबित किया है कि यही नीति भारत के बुनियादी हितों के साथ है, जिससे यह पक्का होता है कि भारत स्वाधीनता के आधार पर सही अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डर को बढ़ावा दे सकता है, और साथ ही उसे मौजूदा विश्व परिस्थितियों में अधिक प्रभाव प्राप्त हो सकता है।