नेपाल में गठेमंगल पर्व मनाया गया

09:42:20 2026-08-12
11 अगस्त को, नेपाल के काठमांडू घाटी में स्थित भक्तापुर (Bhaktapur) में स्थानीय लोगों ने वार्षिक "गठेमंगल" (Gathemangal) उत्सव मनाया। लोगों ने स्थानीय पौराणिक राक्षस "घण्टाकर्ण" की पुआल से बनी आकृतियाँ बनाईं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए उन्हें भक्तापुर के प्राचीन शहर चौक में जलाया। स्थानीय लोगों का मानना है कि राक्षस जैसी पुआल की आकृतियों को जलाने से गंभीर बीमारियों से बचाव होता है और बच्चों को सुरक्षा मिलती है।
11 अगस्त को, नेपाल के काठमांडू घाटी में स्थित भक्तापुर (Bhaktapur) में स्थानीय लोगों ने वार्षिक "गठेमंगल" (Gathemangal) उत्सव मनाया। लोगों ने स्थानीय पौराणिक राक्षस "घण्टाकर्ण" की पुआल से बनी आकृतियाँ बनाईं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए उन्हें भक्तापुर के प्राचीन शहर चौक में जलाया। स्थानीय लोगों का मानना है कि राक्षस जैसी पुआल की आकृतियों को जलाने से गंभीर बीमारियों से बचाव होता है और बच्चों को सुरक्षा मिलती है।
11 अगस्त को, नेपाल के काठमांडू घाटी में स्थित भक्तापुर (Bhaktapur) में स्थानीय लोगों ने वार्षिक "गठेमंगल" (Gathemangal) उत्सव मनाया। लोगों ने स्थानीय पौराणिक राक्षस "घण्टाकर्ण" की पुआल से बनी आकृतियाँ बनाईं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए उन्हें भक्तापुर के प्राचीन शहर चौक में जलाया। स्थानीय लोगों का मानना है कि राक्षस जैसी पुआल की आकृतियों को जलाने से गंभीर बीमारियों से बचाव होता है और बच्चों को सुरक्षा मिलती है।
11 अगस्त को, नेपाल के काठमांडू घाटी में स्थित भक्तापुर (Bhaktapur) में स्थानीय लोगों ने वार्षिक "गठेमंगल" (Gathemangal) उत्सव मनाया। लोगों ने स्थानीय पौराणिक राक्षस "घण्टाकर्ण" की पुआल से बनी आकृतियाँ बनाईं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए उन्हें भक्तापुर के प्राचीन शहर चौक में जलाया। स्थानीय लोगों का मानना है कि राक्षस जैसी पुआल की आकृतियों को जलाने से गंभीर बीमारियों से बचाव होता है और बच्चों को सुरक्षा मिलती है।
11 अगस्त को, नेपाल के काठमांडू घाटी में स्थित भक्तापुर (Bhaktapur) में स्थानीय लोगों ने वार्षिक "गठेमंगल" (Gathemangal) उत्सव मनाया। लोगों ने स्थानीय पौराणिक राक्षस "घण्टाकर्ण" की पुआल से बनी आकृतियाँ बनाईं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए उन्हें भक्तापुर के प्राचीन शहर चौक में जलाया। स्थानीय लोगों का मानना है कि राक्षस जैसी पुआल की आकृतियों को जलाने से गंभीर बीमारियों से बचाव होता है और बच्चों को सुरक्षा मिलती है।