
तिब्बती ओपेरा शीत्सांग में सबसे अधिक प्रतिनिधि ओपेरा में से एक है। इसे तिब्बती संस्कृति के जीवित जीवाश्म के रूप में माना जाता है। 600 साल से ज्यादा के इतिहास वाला यह ओपेरा बातचीत, गायन, अभिनय, डांस और साहित्य की मिली-जुली कला है। इसे 2009 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया था। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की मदद एवं सहायता और युवा व वृद्ध तिब्बती ओपेरा प्रेमियों के समर्पण से, यह पारंपरिक कला रूप पठार पर नई गति प्राप्त कर रहा है।