
हाल ही में, चीन के गानसू प्रांत के गेन्नान प्रान्त में शिछांग मंदिर और लांगमू मंदिर ने भव्य "थांगका सुखाने" की गतिविधि आयोजित की।
थांगका सुखाने की परम्परा की शुरुआत 1409 में हुई, जिसकी शुरुआत तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलु संप्रदाय के संस्थापक चोंखापा ने की थी। यह मूल रूप से शाक्यमुनि की स्मृति में और विभिन्न मंदिरों में भिक्षुओं को बुलाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम था। यह त्यौहार न केवल मंदिर के विशाल कपड़ा चित्रों और ब्रोकेड-कढ़ाई वाली बुद्ध मूर्तियों के संग्रह(थांगका) को प्रदर्शित करता है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। इस के दौरान, विश्वासी बुद्ध की मूर्तियों का दर्शन कर, सूत्र का जाप करके और प्रार्थना करके नए साल के लिए अपनी शुभकामनाएं और बौद्ध धर्म में अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।