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चीनी परंपरागत चिकित्सा पद्धति
2013-10-28 14:33:49

बुनियादी सिद्धांत

चीनी चिकित्सा पद्धति के बुनियादी सिद्धांत में मानव शरीर की गतिविधि तथा रोग लगने के कारणों का संक्षिप्त वर्णन किया जाता है। इसमें मुख्य तौर पर ईंनयांग, वूशींग, यूनछी, ज़ांगश्यांग तथा चींगल्वो आदि शाखाएं शामिल हैं। इन सभी शाखाओं में मनुष्य की बिमारी का कारण, बिमारी की पहचान की व्यवस्था, उपचार करने वाले उपाय, बिमारी की पहचान करना, बिमारी का इलाज बताने वाले सिद्धांत, परहेज करना और खुद को स्वस्थ बनाये रखना आदि मुद्दे शामिल हैं।

ईंन-यांग से चीन के प्राचीन दर्शनशास्त्र का बोध होता है। प्राचीन काल में चीनियों ने विश्व में भिन्न भिन्न चीज़ों का दर्शन करने पर प्राप्त अंतरविरोधों को ईंन और यांग दो भागों में विभाजित किया था। चीनी परंपरागत चिकित्सा पद्धति के मुताबिक प्राचीन चीनी चिकित्सक मनुष्य शरीर के ऊपर व नीचे, अन्दर व बाहर, तथा मनुष्य के प्राण व प्रकृति और समाज के बीच समवर्गी संबंधों पर प्रकाश डालते थे। मनुष्य के शरीर के अन्दर ईंन और यांग दो प्रत्ययों का संतुलन में रहना चाहिए, अन्यथा शरीर स्वस्थ रूप से काम नहीं करेगा। शरीर में ईंन और यांग के बीच का संतुलन बिगड़ने की स्थिति में मनुष्य को रोग हो जाता है और सामान्य शारिरिक गतिविधियों में रुकावट पैदा होती है।

यूनछी कथन का दूसरा नाम है वूयून ल्यूछी, जो मुख्य तौर पर प्राकृतिक जगत में खगोलीय दृश्य, वायुमंडल तथा मौसम परिवर्तन से मानव के स्वास्थ्य और बीमारियों पर असर डालने वाले प्रभावों का अध्ययन करता था। वूयून का मतलब है कि पांच चलन यानी लकड़ी चलन, अग्नि चलन, मिट्टी चलन, स्वर्ण चलन तथा जल चलन। इन चलनों से एक वर्ष में वसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, शरद ऋतु और शीत ऋतु का संचालन बताया जाता था। ल्यूछी कथन का अर्थ है कि मानव के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले छह तत्व यानी हवा, सर्दी, गर्मी, नमी, सूखा तथा आग। यूनछी कथन के मुताबिक खगोलीय पंचांग से हर वर्ष में मौसम परिवर्तन और बीमारी होने के बीच के संबंधों का विश्लेषण किया जाता था।

इलाज के उपाय

आज भी चीनी परंपरागत चिकित्सक रोगी को देखने-सुनने, सूंघने तथा प्रश्न पूछने तथा स्पर्श आदि द्वारा बिमारी का पता लगाते है और अनुकूल इलाज करने की कोशिश करते है। पता करने के उपायों में देखना, सूंघना, पूछना और नाड़ी पकड़ना आदि चार बुनियादी उपाय शामिल है। इन चार उपायों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं, जो एक दूसरे का स्थान नहीं ले सकतीं। पर रोगियों का इलाज करते समय इन चार उपायों का संयुक्त रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

देखना

चीनी चिकित्सा पद्धति की बुनियाद देखने पर आधारित है। चीनी चिकित्सा पद्धति के अनुसार शरीर के अन्दर आंतों का शरीर के दूसरे भागों से घनिष्ठ संबंध होता है। आंतों में असंतुलन पैदा होने से पूरे शरीर पर प्रभाव पड़ता है। अतः शरीर की भावना, रंग, स्वरूप तथा हावभाव में भी परिवर्तन पैदा हो जाता है। इसलिए मनुष्य के बाहरी शरीर के हावभाव को देखने से शरीर के अंदर आंतों में हुई बीमारियों का पता लगाया जाता है।

देखने के उपायों में रोगियों का हावभाव, हालचाल, सिर व मुख, त्वचा, नाड़ी तथा मल आदि देखना शामिल है। पर इन उपायों में सबसे पहले रोगियों के चेहरे का भाव, मुँह तथा जीभ का रंग देखना होता है। क्योंकि मुख और जीभ के रंग से रोगियों की आंतों में आए परिवर्तन का पता चलता है।

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