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तिब्बत को सहायता देने वाली रानी वांग छ्यो यांग की कहानी
2012-11-30 13:24:41

शायद आप को मालूम नहीं है कि चीन में एक ऐसी प्रथम महिला है, जो विश्व के सात महाद्वीपों की सब से ऊंची चोटी पर चढ़ गयी है और पैदल से उत्तर व दक्षिण ध्रुवों पर चली गयी है, साथ ही वे चीनी अचल संपत्ति क्षेत्र में बहुत नामी भी हैं। लेकिन वह अपने आप को तिब्बत के रिश्तेदार का संज्ञा देना ज्यादा पसंद करती हैं। आखिर वे कौन हैं, वे हैं इधर दस सालों में तिब्बत को सकारात्मक रुप से सहायता देने वाली परोपकार वांग छ्यो यांग।

आम लोगों के विचार में चिन त्येन निवेश ग्रुप की महाध्यक्षा और प्रसिद्ध नारी पर्वतारोहक होने के नाते वांग छ्यो यांग को एक असाधारण मजबूत महिला की छवि होनी चाहिये, पर उन के साथ विशेष साक्षात्कार में लम्बे कद वाली वांग छ्यो यांग का रंग गेहूंआ है, खुले व सीधे सादे स्वभाव की हैं बातचीत में बड़ी नम्र लगती हैं। इसीलिये उन्होंने अपने आप को तिब्बत का रिश्तेदार भी कह दिया। उन्होंने कहा:"बौद्ध धर्म में पूर्वजन्म और पुनर्जन्म माना जाता है, मुझे लगता है कि मैं अपने पूर्वजन्म में एक तिब्बती हूं। क्योंकि हर बार जब तिब्बत आती हूं , तो अपने मन में स्वभावतः अवश्य ही अपनेपन की भावना पैदा होती है। मुझे याद है कि जब मैं पहली बार तिब्बत गयी, तो अपने बालों को दो चोटियां बनाकर सिर पर बांधी हुई थीं, तेज धूप से मेरा रंग गेहूंआं भी हो गया, 50 से ज्यादा दिनों में मैं कार चलाकर तिब्बत के अनेक स्थलों में घूमती रही, स्थानीय लोगों ने मुझे देखकर तिब्बती भाषा में संबोधन किया, क्योंकि वे मुझे स्थानीय वासी समझते हैं। इसी प्यारी पहचान से मुझे तिब्बत से एकदम लगाव हो गया है।"

तिब्बत में ठहरने के दौरान वांग छ्यो यांग ने विश्व छत कहने वाली चुमुलांगमा चोटी की महनता, हिमालाया पर्वत की भव्यता और कांगरनपोची की शुद्धता का आभास किया है, साथ ही सुदूर सीमावर्ती में अवस्थित पठारीय तिब्बत क्षेत्रों को निर्माण और विकास की आवश्यकता को महसूस भी कर दिया है। अक्तूबर 2003 में उन्होंने तिब्बत के अली प्रिफेक्चर को एक करोड य्वान जुटाकर शिक्षा परियोजना, नंगे पैर डाक्टर परियोजना और एपल परोपकारी कोष की स्थापना की और हर वर्ष चिनत्येन ग्रुप से 50 लाख य्वान का अनुदान करने का निर्णय भी कर लिया। एपल परोपकारी कोष की स्थापना की चर्चा में वांग छ्यो यांग ने कहा:"शुरु शुरु में जब स्थानीय बच्चों की स्थिति को देखने से इतनी प्रभावित हुई कि आंखों में आंसू बहने लगे और उन के लिये कुछ न कुछ करने की सख्त जरूरत है।"

सहायता एक नेक काम जरुर ही है, पर इस की शुरुआत करना तो काफी कठिन है। कल्याणकारी गतिविधियों के अनुभव के अभाव, परियोजना टीम के पैमाने और सामाजिक धनराशि के जमाव आदि तरह तरह की कठिनाइयां सामने आयी हैं, और तो और अली प्रिफेक्चर क्षेत्र की औसत ऊंचाई समुद्र की सतह से चार हजार पांच सौ मीटर से अधिक है, इसलिये इस क्षेत्र का जलवायु बदलता रहता है और रास्ता भी अत्यंत दूर है, जिस से इस परोपकारी कोष का सामान्य काम एकदम दुविधा में पड़ गया। लेकिन तिब्बत से गहरे प्रेम भाव के प्रोत्साहन में वांग छ्यो यांग के मन में इस काम को छोड़ने का विचार कभी भी नहीं आया। उनका कहना है:"सच्ची बात कहूं, मेरे लिये कामय रहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है, मेरे ख्याल से किसी भी काम को बखूबी अंजाम देने के लिये दृढ़ रहना निहायत जरुरी है। चाहे किसी भी स्थिति में क्यों न हो, यदि आप अपने काम पर दस सालों तक कायम रहे, तो आप को अवश्य ही एक सुफल प्राप्त होगा।"

इसी हार न मानने वाली भावना के प्रेरणा में चिन त्येन ग्रुप हर वर्ष एपल परोपकारी कोष को 50 लाख य्वान का अनुदान करता है, साथ ही इस परोपकारी कोष का काम भी तर्कसंगग और व्यावसायिक दौर में प्रविष्ट हो गया है। परिणामस्वरुप अब और अधिक स्वयंसेवक इसी परोपकारी काम में संलग्न हुए हैं, और ज्यादा सामाजिक चंदा जुटाये गये हैं, प्रशिक्षित नंगे पैर वाले डाँक्टर स्थानीय रोगियों का इलाज करने में सक्षम हो गये हैं, अली प्रिफेक्चर के स्कूली उम्र वाले बाल बच्चे स्कूलों में दाखिले भी हुए हैं।

वर्तमान में एपल परोपकारी कोष ने 402 स्थानीय बुनियादी चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर दिया है। 2008 में अखिल चीन परोपकारी संघ ने एपल नंगे पांव डांक्टर परियोजना को सब से प्रभावशाली परियोजना का पुरस्कार दिया। फिर दूसरे साल चीनी नागरिक मामलात मंत्रालय ने वांग छ्यो यांग को दस बड़े परोपकार की उपाधि से संमानित कर दिया। तिब्बत की सहायता परियोजना की सफलता से वांग छ्यो यांग ने उद्योगपति से परोपकार का रुपधारण कर लिया है। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा:"पहले मैं ने अपने अधिकतर समय उपक्रम चलाने पर खर्च किया है, लेकिन वह मेरा पसंदीदा कार्य नहीं है। वास्तव में मैं कोष और कल्याणकारी काम करना ज्यादा पसंद करती हूं। इधर सालों में और ज्यादा सुयोग्य प्रबंधक अपने उपक्रम को चलाने में सक्षम हो गये हैं, बोस होने के नाते मैं और ज्यादा समय निकालकर अपने पसंदीदा काम में मस्त हूं।"

अब एपल परोपकारी कोष का सहायता क्षेत्र अली प्रिफेक्चर से समूचे तिब्बत, सछ्वान और कानसू प्रांतों के तिब्बती क्षेत्रों तक विस्तृत हो गया है। छिंगहाई प्रांत के यू शू तिब्बती प्रिफेक्चर में भूकम्प आने के बाद इस परोपकारी कोष ने यहां पर प्रथम द्रुत बचाव केंद्र स्थापित कर दिया, सहायता विषय में बुनियादी शिक्षा को छोड़कर बेकार बैटरियों, कूड़े कचरों और बिखरी हुई तिब्बती लामा बौद्ध धार्मित सूत्र पुस्तकों का संग्रह और तिब्बती लामा बौद्ध सूत्र ग्रंथ म्युजियम की स्थापना आदि वातावरण व संस्कृति से संबंधित परियोजनाएं भी शामिल हैं। एपल परोपकारी कोष अब सब से बड़ा गैर सरकारी तिब्बत सहायता कोष ही नहीं, बेशुमार उद्योगपतियों और परोपकारों का तिब्बत सहायता मंच भी बन गया है, पिछले सालों में कल्याणकारी परोपकारी कार्य में कुल 15 करोड़ य्वान तक पहुंच गया है।

वांग छयो यांग के तिब्बत सहायता उत्साह और अनुभव ने बड़ी तादाद में जानी मानी हस्तियों को प्रभावित कर दिया है। चालू वर्ष में छंग लुंग कोष ने तिब्बत के जिगर ग्रस्त बाल बच्चों के आँपरेशन के लिये 20 लाख य्वान का चंदा दिया है, प्रसिद्ध फिल्म स्टार च्यांग वन दंपति ने एपल परोपकारी कोष को स्थानीय ग्रामीण क्लिनीक कायम करने का काम सौंप दिया। लाउ लांग और ऊ चिंग आदि मशहूर कलाकारों ने इस एपल परोपकारी कोष द्वारा संयोजित अली पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में भाग लिया। जबकि वांग छ्यो यांग की उम्मीद है कि तिब्बत से उन का प्यार और सार्वजनिक कल्याणकारी कार्य के प्रति निष्ठावान अगली पीढ़ी तक पहुंचायी जाएगी। उनका कहना है:"मैंने अपने बेटों को सार्वजनिक कल्यामकारी काम करने के लिये प्रोत्साहन भी कर दिया, गत वर्ष में वे मेरे साथ कूड़े कचेरे उठाने के लिये पर्वत पर गये, मेरे 14 व 16 वर्षीय दोनों बेटों ने उस बार बहुत ज्यादा कचेरों को इक्ठे कर पीठों व कंधों के सहारे पर्वत के नीचे पहुंचाया। मैं उन्हें इसी तरह का मौका देना चाहती हूं, ताकि वे स्थानीय बाल बच्चों के साथ विचारों का आदान प्रदान कर सके और स्थानीय बच्चों के दैनिक जीवन को जान पहचान सके।"

करीब दस सालों के कठोर और कामयाब प्रयासों के जरिये सार्वजनिक कल्याणकारी कार्य में वांग छ्यो यांग ने नयी पहचान ली है। उन्होंने कहा:"कोई भी व्यक्ति किसी भी समय पर सार्वजनिक कल्याणकारी काम कर सकता है, क्योंकि इस काम की कोई सीमा ही नहीं, कोई मंजिल भी नहीं है, यदि आप के पास पैसे हैं, तो पैसे दे सकते हैं, आप के पास शक्ति है, शक्ति अर्पित कर सकते हैं। यदि आप अपना प्यार देना चाहते हैं, तो आप किसी भी समय पर किसी भी तौर तरीके से इस परोपकारी काम में हिस्सा ले सकते हैं। सार्वजनिक कल्याणकारी काम एक खुश कैरियर है। इसलिये मुझे उम्मीद है कि हमारे कोष का सांस्कृतिक माहौल सुखद होगा।"

अचल संपत्ति की रानी और मजबूत पर्वतारोहक की खिताब की तुलना में हम वांग छ्यो यांग को तिब्बत सहायता रानी कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं। जब आप ने जो किया है, उस से दूसरों के लिये खुशी लायी है, तो असल में अपने आप के लिये खुशी लाने के बराबर है। यह तिब्बत सहायता रानी ने खुशी के लिये परिभाषा दे दी है।

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