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तिब्बती विश्वविद्यालय स्नातकों को रोजगार में खुशी और गम
2012-07-08 18:56:18

विश्वविद्यालय स्नातकों को रोजगार दिलाना वर्तमान चीन में एक काफी मुश्किल मामला है और मनपसंद काम मिलना और अधिक कठिन है। पर बीते एक साल में तिब्बत के उच्च प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों के सभी स्नातकों को रोजगार मिल गया है, इस का श्रय स्थानीय सरकार द्वारा उठाये जाने वाले विविधतापूर्ण नीतिगत कदमों को जाता है ।

सुश्री डेकी ल्हासा उच्च नार्मल कालेज के छात्र कार्यालय में कार्यरत हैं। उन्होंने हमारे संवाददाता से कहा कि इस साल उन्हें तिब्बती पंचांग के नव वर्ष की खुशियां मनाने में हद से ज्यादा खुशी हुई है। क्योंकि 2011 में उन के कालेज के सभी स्नातकों को बुनियादी तौर पर रोजगार मिल गया है, बहुत से छात्रों ने नव वर्ष के उपलक्ष में उन्हें फोन या एसएमएस के जरिये मुबारकबाद किया और नये रोजगारों से अवगत करा दिया। सुश्री डेकी ने कहा:

"रोजगार के अवसरों को बढाये जाने के बाद हमारे कालेज के पूर्व स्नातकों समेत तमाम स्नातकों को रोजगार दिलाया गया है। इधर दिनों में इन छात्रों ने क्रमशः हमें फोन या एसएमएस के माध्यम से यह सूचित किया है कि वे किस कस्बे या किस कांऊटी में नौकरी करते हैं। उन्होंने हमें यह भी बताया कि इस नव वर्ष दिवस के उपलक्ष में वे और अपने सभी परिवारजन अत्यंत प्रसन्न हुए हैं, इस खुश खबरी ने नव वर्ष दिवस की खुशियों में चार चांद लगा दिये हैं, जिस से कालेज के छात्र कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी होने के नाते खुशी के मारे मेरा ठिकाना न रहा।"

2006 में तिब्बत में उच्च प्रशिक्षण प्रतिष्ठान स्नातकों की रोजगार प्रणाली के सुधार के बाद विश्वविद्यालय स्नातकों को रोजगार बाजार में दो तरफा विकल्प करने की छूट दी गयी है, उन का रोजगार मामला इसीलिये तिब्बती लोगों के बीच चर्चित विषयों में से एक बन गया है। बड़ी खुशी की बात यह है कि 2011 में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने सभी 12 हजार विश्वविद्यालय स्नातकों को रोजगार दिलाने में सफल किया है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के मानव संसाधन व सामाजिक गारंटी ब्यूरो के प्रधान याओ रवी फूंग ने संवाददाता को इस का परिचय देते हुए कहा:

"इस कठिन काम को बखूबी अंजाम देने के लिये यह जरूरी है कि एक तरफ सरकारी कर्मचारियों का पद बढाने की हरचंद कोशिश की जाए, दूसरी तरफ गैर लाभप्रद सार्वजनिक सेवकों का वैतन बढाया जाये, ताकि और ज्यादा स्नातकों को आकर्षित किया जा सके । इस के अलावा उपक्रमों को विश्वविद्यालय स्नातकों की भरती दर बढाने के लिये प्रोत्साहन दिया जाये। कहा जा सकता है कि उक्त कदमों का विश्वविद्यालय स्नातकों की रोजगार दर को बढावा देने का भारी महत्व है।"

चीनी राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य और तिब्बत विश्वविद्यालय के आर्थिक प्रबंध कालेज के प्रधान थुटेन केड्रुप का विचार है कि गैर लाभप्रद सार्वजनिक सेवा पदों की बढोत्तरी के बारे में सरकारी नीति कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं है। क्योंकि हर वर्ष में भीतरी इलाकों में नौकरी करने वाले तिब्बती स्नातकों की कुल संख्या दस प्रतिशत से कम है, इसलिये विश्वविद्यालय स्नातकों के लिये रोजगार खोजने की परम्परागत धारणा को बदलना और सरकारी कर्मचारी बनने या लोहे कटोरे जैसे स्थिर काम करने के परम्परागत वैचारिक बंधन से मुक्त होना फिर भी आवश्यक है। इस के मद्देनजर इस वर्ष उन्होंने तिब्बत के विश्वविद्यालय स्नातकों को भीतरी इलाकों के उपक्रमों में अल्पकालिक रोजगार दिलाने के बारे में प्रस्ताव पेश किया । उन्होंने इस का उल्लेख करते हुए कहा:

"मैंने यह सुझाव पेश किया है कि राजकीय मिल्कियत वाले मझौले व बड़े आकार वाले उद्यम और तिब्बत को सहायता देने वाले भीतरी प्रांत व शहर तिब्बत के 20 प्रतिशत विश्वविद्यालय स्नातकों को रोजगार दिला दें। इसी प्रकार दस हजार तिब्बती विश्वविद्यालय स्नातकों के 20 प्रतिशत का अर्थ है कि केवल दो तीन हजार। यदि हर वर्ष में ये दो तीन हजार छात्र नौकरी के लिये 17, 18 प्रांतों में जायेंगे, तो हरेक प्रांत को सौ से कम छात्रों को रोजगार दिलाने में कोई दिक्कत ही नहीं, सभी विश्वविद्यालय स्नातकों की रोजगार समस्या भी आसानी से हल हो जायेगी।"

2012 में तिब्बत के विश्वविद्यालय स्नातकों की संख्या 13 हजार होने का अनुमान है। प्रधान याओ रवीफूंग ने कहा कि तिब्बत रहने वाले तमाम विश्वविद्यलय स्नातकों को रोजगार दिलाना इस वर्ष का प्राथमिक लक्ष्य है। इस लक्ष्य को साकार बनाने के लिये यह जरूरी है कि तिब्बत सरकारी कर्मचारियों और लाभप्रद सार्वजनिक सेवाओं के पदों को बढाने के साथ साथ स्नातकों को समूचे देश के रोजगार बाजार में जा मिलने के लिये प्रोत्साहन दे। उनका कहना है:

"मिसाल के लिये यदि हमारे विश्वविद्यालय स्नातक किसी उपक्रम के साथ एक बार पांच वर्ष का अनुबंध करने में सफल होंगे, तो स्थानीय सरकार उन्हें बीस हजार य्वान का बोनस दे देगी। इतना ही नहीं, यदि वे छोटे व मझौले आकार वाले उपक्रमों में काम करेंगे, तो स्थानीय सरकार उन्हें सामाजिक भत्ता भी दे सकती है, यदि वे तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के बाहर नौकरी करेंगे, तो स्थानीय सरकार उन्हें हर माह में तीन सौ य्वान की भत्ता को छोड़कर एक हजार य्वान की यात्रा फीस भी देगी।"

चीनी राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य थुटेन केड्रुप का मानना है कि तिब्बत रहने वाले विश्वविद्यालय स्नातकों को भीतरी इलाकों में रोजगार के लिये प्रोत्साहन कदम तिब्बती विश्वविद्यालय स्नातकों की परम्परागत धारणा व गुणवत्ता को बदलने के लिये मददगार हैं , ताकि वे तिब्बत का निर्माण व देश की सेवा करने और विभिन्न जातियों की एकता व सामाजिक स्थिरता को बनाये रखने में अपनी सकारात्कम भूमिका निभा सके । उन्होंने आगे कहा:

"तिब्बती व हान जातियों के बीच अधिकाधिक आदान प्रदान से जातीय संबंध भी उत्तरोत्तर मेलमिलापपूर्ण हो गया है। इन क्षेत्रों में नौकरी करने से वे जल्दी ही परिपक्त व अनुभवी हो जायेंगे।"

चीन के अधिकांश परिवारों के लिये विश्वविद्यालय स्नातकों को रोजगार दिलाने से समूची पारवारिक जीवन स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। आंकड़ों से पता चला है कि यदि 50 प्रतिशत के तिब्बत रहने वाले विश्वविद्यालय स्नातक भीतरी इलाकों में रोजगार करने को तैयार है, तो भावी रोजगार विकल्प और अधिक विविधिकरण होगा ।

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