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अधिकतर आत्मदाह दुर्घनाएं किर्ति गोम्पा मठ में क्यों
2012-04-19 18:40:46

यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है, श्रोता दोस्तो, शायद आप को मालूम हुआ ही होगा कि किर्ति गोम्पा मठ सछ्वान प्रांत के अबा तिब्बती छांग जातीय स्वशासन प्रिफेक्चर की अबा कांऊटी में खड़ी हुई है। गत वर्ष से इस मठ में लगातार भिक्षुओं व भिक्षुणियों की आत्मदाह दुर्घटनाएं घटित हुईं। अबा कांऊटी में तिब्बती लामा बौद्ध धर्म समेत कई बड़े संप्रदायों की कुल 47 मठ पायी जाती हैं, पर आत्मदाह दुर्घनाएं इसी किर्ति गोम्पा मठ में क्यों हुईं, इस का क्या कारण है।

चीनी तिब्बती विद्या अनुसंधान केंद्र के डाक्टर ल्येन श्यांग मिन लम्बे अर्से से तिब्बती क्षेत्र के सामाजिक विकास पर अनुसंधान करने में जुटे हुए हैं। इस थुचा जातीय विद्वान ने सिलसिलेवार आत्मदाह दुर्घनाओं के प्रति गहरा खेद और हमदर्दी व्यक्त की। खासकर किर्ति गोम्पा मठ में हुई कई आत्मदाह दुर्घनाओं से उन और अपने साथियों की सोच कापी सचेत हुई। उन्होंने कहा:

"हमारे कुछ अनुसंधानकर्ताओं ने इस बात का पता लगाया है कि तिब्बती क्षेत्र में कुछ आत्मदाह, खासकर अबा की किर्ति गोम्पा मठ में हुई कई आत्मदाह दुर्घटनाओं के पीछ कुछ रोचक बातें छिपी हुई हैं। क्योंकि किर्ति गोम्पा मठ की जीविद बुद्ध किर्ति अब निर्वासित दलाई सरकार में महत्वपूर्ण पद संभाले हुए हैं, वे लम्बे अर्से से देश की भीतरी मठों पर प्रभाव डालने पर डटे हुए हैं। इसलिये इस से कुछ आवश्यक संबंध है या नहीं, इस पर सोच विचार करने हमारे लिये लायक है।"

पता चला है कि जीवित बुद्ध किर्ति 1959 में भारत फरार होने के बाद क्रमशः दलाई लामा के निजी सचिव, निर्वासित सरकार के बौद्ध विद्या व दर्शन शास्त्र कालेज के जिम्मेदार व्यक्ति और निर्वासित सरकार के धार्मिक कालोन अदि महत्वपूर्ण पद संभाले हुए। हालांकि वे विदेश में रहते हैं, पर पिछले लम्बे समय में अबा के किर्ति गोम्पा मठ पर उन का प्रभाव फिर भी काफी मजबूत बना रहा है।

तिब्बती विद्य विशेषज्ञ आनचाइडेन तीन बार किर्ति गोम्पा मठ गये , वे किर्ति गोम्पा मठ से अच्छी तरह परिचित हैं। आनचाइडेन ने हमारे संवाददाता से कहा कि किर्ति गोम्पा मठ कभी देशभक्त धार्मिक उच्च स्तरीय हस्ती पालगोन त्रिंलय की घरेलू मंदिर थी।

पालगोन त्रिंलय सछ्वान प्रात के तिब्बती क्षेत्र में तीन प्रमुख जागिरदारों में से थे। उन्होंने घर छोड़कर सन्यासी लिया, वे एक विचारशील व्यक्ति थे। 1949 की गर्मियों में जब चीनी जन मुक्ति सेना लानचओ शहर की मुक्ति कराने ही वाली थी, तो पालगोन त्रिंलय ने अपने कारवां को घी, दूग्ध चीजें आदि स्थानीय वस्तुओं व अपना व्यक्तिगत पत्र लिये कमांडर फंग त्ह ह्वाई से मिलने भेजा। कमांडर फंग त्ह ह्वाई ने पालगोन त्रिंलय के विशेष दूत के सम्मान में भोज दिया और उन्हें कुछ बंदूक व गोलाबारुद भी भेंट किये, साथ ही चीनी जन मुक्ति सेना के नाम से पालगोन त्रिंलय को अबा तिब्बती जातीय जन सुरक्षा कमांडर नियुक्त कर दिया और उन्हें प्रमाण पत्र व झंडा भी दे दिये। इसलिये अबा सछ्वान प्रांत के तिब्बती क्षेत्र में चीनी जन मुक्ति सेना की नियुक्ति व चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व को स्वीकार करने वाला प्रथम क्षेत ही है। पहली जनवरी 1953 को सछ्वान प्रांत के तिब्बती जातीय स्वशासन क्षेत्र की स्थापना हुई और पालगोन त्रिंलय इसी स्वशासन क्षेत्र का उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए । उन का निधन 1966 में हुआ।

आन चाई डेन ने कहा कि पालगोन त्रिंलय एक देशभक्तिपूर्ण हस्ती थे, किर्ति गोम्पा उन की घरेलू मंदिर है। इसी मठ में आत्मदाह करने वाले भिक्षुओं, खासकर युवाओं को अपने पूर्वजों के इतिहास को अच्छी तरह समझना चाहिये। आनचाईडेन का विश्लेषण है कि मठ पर नियंत्रण के जरिये घुसपैठ और तोड़फोड़ करना दलाई गुट द्वारा लम्बे समय से अपनाये जाने वाला हथकंडा ही है, उन्होंने युवा भिक्षुओं व भिक्षुणियों के प्राणों पर कीमत चुकाने के माध्यम से अपना राजनीतिक उद्देश्य साकार बनाने की नाकाम कोशिश की, यह ही आत्मदाह दुर्घटना के पीछे छिपा दुराश्य है। आन चाई डेन ने कहा:

"एक जीवित बुद्ध पर नियंत्रण करने का अर्थ एक मठ पर कब्जा जमाना है, जबकि एक मठ पर कब्जा जमाने का अर्थ एक क्षेत्र को काबू में पाना ही है। यह घुसपैठ व तोड़फोड़ करने का उन का दीर्घकालिक हथकंडा ही है। लेकिन अब उन्होंने इस हथकंडे को बदलकर युवकों को आत्मदाह करने के लिये प्रेरित किया है, यह समझ में आता है और अप्रत्याशित भी है। वे इन युवा भिक्षुओं के प्राणों को गम्भीरता से नहीं लेते हैं। असल में अपने राजनीतिक उद्देश्य को साकार बनाने के लिये कुछ शिकार देना आवश्यक है, यही उन का असली मकसद है, यह धार्मिक स्वतंत्रता या अस्वतंत्रता से कोई वास्ता नहीं है।"

पश्चिमी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि युवा भिक्षुओं ने आत्मदाह से पहले तिब्बत स्वतंत्रता और तिब्बत स्वाधीनता जैसे नारे जो ऊंची आवाज में लगाये, जिस से ठीक ही यह साबित हो गया है कि आत्मदाह कार्यवाही के पीछे जबरदस्त राजनीतिक मांग छिपी हुई है। आनचाइडेन ने कहा कि भिक्षुओं का आत्मदाह तफसील से गठित किया है, फोटो खिंचने, वीडियो बनाने और बाहर खबर भेजने का बंदोबस्त पहले से ही कर दिया गया है। तिब्बती विद्य विशेषज्ञ आनचाइडेन का कहना है:

"उन्होंने हरेक युवक के आत्मदाह से पहले फोटो खिंचने, बीडियो बनाने और उकसावा देने की सभी तैयारियां कर रखी हैं, फिर आग जलने के बाद लाश छीनने और बाहर फोटो भेजने की जो कोशिश की है, वे सब कुछ पहले ही तफसील से तैयार हो गये हैं। वे क्या करना चाहते हैं, प्रमुख सवाल तिब्बत स्वाधीनता प्राप्त करना ही है।"

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