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10-10-07
2010-10-14 17:27:36

यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है। श्रोता दोस्तो, न्यूशिंग स्पेशल कार्यक्रम में मैं हेमा कृपलानी आप सब का हार्दिक स्वागत करती हूँ। हम आपको एक बार फिर से बता दें कि चीनी भाषा में न्यूशिंग का अर्थ होता है—नारी, महिला और हर महिला अपने आप में खास होती है, स्पेशल होती है। इसलिए हमारे कार्यक्रम का नाम न्यूशिंग स्पेशल है। इस कार्यक्रम में हम आपको महिलाओं से जुड़े हुए विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी देते हैं। चीन की जीवन शैली से लेकर, सेहत-सौंदर्य की चर्चा से, शापिंग, सैर-सपाटा, सजावट, पाक-कला इत्यादि के बारे में आपको बताएँगे जिससे आपको यहाँ के जीवन के बारे में और अधिक जानने को मिले। चलिए, आज का कार्यक्रम शुरु करते हैं।

'मीठी' बीमारी से कैसे बचें। हर दस सेकेंड में दुनिया भर में किसी न किसी की डायबिटीज़ यानी मधुमेह से मृत्यु हो जाती है। उन्हीं दस सेकेंड में किन्हीं दो लोगों में इसके लक्षण पैदा हो जाते हैं। जी हां , नाम बेशक शुगर है लेकिन यह बीमारी धीमे जहर की तरह शरीर को खोखला करती है। पिछले साल दुनिया में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 38 लाख थी।यह कुल विश्व जनसंख्या का छह प्रतिशत। एक अनुमान के अनुसार इस समय दुनिया भर में 24 करोड़ 60 लाख लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं और 2025 तक इस संख्या के बढकर 38 करोड़ हो जाने की आशंका है। डायबिटीज़ जानलेवा है लेकिन समय रहते इस पर क़ाबू पाया जा सकता है। लाइफस्टाइल में सुधारकर इस बीमारी को खुद से दूर रखा जा सकता है।डायबीटीज या शुगर लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब पैंक्रियाज नामक ग्लैंड शरीर में इंसुलिन बनाना कम कर देता है या बंद कर देता है , तो यह बीमारी हो जाती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसकी मदद के बिना सेल्स शुगर ( ग्लूकोज ) को एनर्जी के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाते और यह बढ़ा हुआ शुगर लेवल डायबीटीज के रूप में सामने आता है। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण प्रकट होने में 10-15 साल लग जाते हैं। वैसे 45-50 फीसदी मरीज वे होते हैं , जिनके परिवार में पहले से किसी को डायबीटीज रही हो।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोशिश यह होनी चाहिए कि यह रोग माँ से बच्चे में न जाने पाए.

उनका कहना है, "हर लड़की की नियमित जाँच ज़रूरी है। क्योंकि गर्भावस्था में यह रोग माँ से शिशु में बहुत आसानी से प्रविष्ट हो सकता है। सब जानते हैं कि यह आनुवंशिक है। लेकिन इसको नियंत्रित किया जा सकता है।" डायबिटीज़ का शरीर के कई अंगों पर असर होता है। डायबीटीज से कमजोरी, हाथ - पैरों का कांपना , सुनने में दिक्कत , कंधे में दर्द या जाम हो जाना। इसके अलावा मसूड़ों में सूजन , आंखों से कम दिखने लगना, याददाश्त कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। दस साल लगातार इस रोग को झेल चुके रोगी की आँखों की रोशनी तो प्रभावित होती है उसके अन्य अंग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। दरअसल डायबिटीज़ की वजह से रोगी को चोट का अहसास नहीं होता उनकी संवेदनशीलता जाती रहती है और उन्हें किसी चोट या खरोंच का पता नहीं चलता जो बाद में आगे जा कर संक्रमित हो सकती है.

डायबिटीज़ के रोगी यूँ तो दुनिया भर में फैले हुए हैं लेकिन भारत, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे दक्षिण एशियाई देशों में इनकी संख्या चिंताजनक हद तक बढ़ चुकी है। डायबिटीज़ होने के कई कारण हो सकते हैं। अगर परिवार में किसी को डायबीटीज रही हो तो आशंका बढ़ जाती है। यह किसी को कभी भी हो सकती है , पर 80 फीसदी मामलों में 50 साल के बाद होती है। डायबिटीज़ होने के प्रमुख कारणों में पौष्टिक आहार की कमी, कम प्रोटीन,कम फाइबर वाली और तली - भुनी चीजें और जंक फूड खाना। मोटापा, जहाँ कमर का घेरा महिलाओं में 35 इंच और पुरुषों में 40 इंच से ज्यादा हो। लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना और एक्सरसाइज न करना। ज्यादा तनाव में रहना और पूरा आराम न करना। कम उम्र में हाई बीपी, हार्ट प्रॉब्लम या खून में कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा होना जैसे कारण हो सकते हैं। अगर डायबीटीज है तो डायबीटीज का इलाज एंडोक्रिनॉलजिस्ट और डायबीटॉजलिस्ट करते हैं। वैसे ट्रेंड एमडी से भी इलाज कराया जा सकता है। अगर मधुमेह है तो आलू,अरबी,शकरकंद,कचालू, चीकू, आम खाने से शुगर लेवल एकदम बढ़ जाता है। लेकिन संतरा, मौसमी, माल्टा, तरबूज आदि फल खाएंगे तो शुगर एकदम से नहीं बढ़ेगी। इस बीमारी से बचाव के लिएः

1. कम फैट, कम कैलरी खाएँ, ज्यादा फल-सब्जियां और फाइबर ज्यादा खाएं। चावल-आलू जैसी स्टार्च वाली और हाई कैलोरी वाले खाने से दूर रहें। तले-भुने से परहेज करें। दिन में कम - से - कम तीन लीटर पानी पिएं।

2. दिन भर बैठे रहना ठीक नहीं। खूब चलें, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। कम- से-कम 30 मिनट रोज़ाना कसरत करें। वजन को कंट्रोल में रखें। जितना हो सके,शारीरिक मेहनत करें। तनाव से दूर रहें।

3. नियमित योगासन करने से डायबीटीज होने की आशंका काफी कम हो जाती है।

4. डायबीटीज होने के बाद भी इन आसनों और प्राणायाम को करते रहना चाहिए,क्योंकि इनसे शुगर लेवल कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।

कहते हैं एक बार डायबिटीज़ हो जाने पर उसे नियंत्रित तो किया जा सकता है, पूरी तरह दूर किया जाना अब भी आसान नहीं है। इसीलिए इसका न होना ही अच्छा और यह आपके अपने बस में हैं। आप इन गलतियां करने से भी बचें तथा अपनी सेहत का अच्छी तरह ध्यान रखें क्योंकि आपके ऊपर परिवार की पूरी जिम्मेदारी होती है। आप स्वस्थ रहेंगी तो परिवार स्वस्थ रहेगा। तो जो गलतियाँ डायबिटीज़ को आमंत्रित करती हैं, वे हैं।

1. लापरवाह होना और ठीक से इलाज न कराना।

2. मोटापे को कंट्रोल में न रखना।

3. जरूरत से ज्यादा खाते रहना।

4. व्यायाम नहीं करना।

5. हर बात पर तनाव लेना।

6. ज्यादा मीठा व तला-भुना खाना।

तो श्रोताओ, आशा करती हूँ कि मधुमेह की जानकारी आपको ज्ञानवर्धक तथा उपयोगी लगी होगी। कामना करती हूँ कि आप सब अपना तथा अपने परिवार का ध्यान रखें और मधुमेह जैसी बीमारियों से दूर रहें।

अब सुनिए एक बढ़िया खबरः

शंघाई वर्ल्ड एक्सपो में भारतीय समोसे की धूम सों

सस्ती लागत व श्रम के चलते बेशक चीनी उत्पाद दुनिया में आगे बढ़ रहे हों लेकिन जब बात भारतीय समो, दाल और कढ़ी के स्वाद की आती है तो चीन के लोग भी अपने को रोक नहीं पाते।

चीन के शंघाई शहर में चल रहे मेले वर्ल्ड एक्सपो में भारतीय मंडप में दो रेस्त्रां खुले हैं, जिनमें कई तरह का भारतीय खाना और जलपान की व्यवस्था है। लेकिन समोसा, दाल और कढ़ी की बात ही कुछ और है।

यह चीनी जनता को यह खूब भा रहे हैं। अब तक करीब 10 लाख लोग भारतीय मंडप को देखने आ चुके हैं, इनमें से ज्यादातर ने दाल, कढ़ी और समोसा पसंद किया है। वर्ल्ड एक्सपो को मेलों और प्रदर्शनियों का ओलंपिक माना जाता है। इसका आयोजन हर पांच साल में अलग-अलग शहरों में किया जाता है। इस बार यह मेला शंघाई में हो रहा है। इसका आयोजन छह महीने के लिये होता है। मेला अक्टूबर तक चलेगा।

दुनियाभर के 194 देश मेले में भाग ले रहे हैं, इस तरह का अगला मेला इटली के शहर मिलान में होगा।

इटपो के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने यह जानकारी देते हुए कहा कि समोसा और दाल चीनियों को खूब भा रहे हैं।ह्वांगफू नदी के किनारे करीब 5.28 वर्ग किलोमीटर में फैले मेला क्षेत्र का मुख्य विषय बेहतर शहर बेहतर जीवन रखा गया है।

एक मई को मेला शुरू होने के बाद से ही इसे देखने चीन के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोग पहुंच चुके हैं। वर्ल्ड एक्सपो दूसरे मेलों की तुलना में अलग तरह का है, यह न केवल व्यापार एवं व्यावसाय के लिये होता है, बल्कि इसमें विभिन्न देश तकनीकी आर्थिक विकास के साथ-साथ अपनी कला एवं संस्कृति का भी प्रदर्शन करते हैं। चीन पिछले आठ साल से इस मेले के आयोजन की तैयारी कर रहा था और उसने प्रदर्शनी तक पहुंचने के लिये 500 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क बिछाया है।

श्रोताओ, आपको हमारा न्यूशिंग स्पेशल कार्यक्रम का यह सत्ताइसवा क्रम कैसा लगा। हम आशा करते हैं कि आपको पसंद आया होगा। आप अपनी राय व सुझाव हमें ज़रूर लिख कर भेजें, ताकि हमें इस कार्यक्रम को और भी बेहतर बनाने में मदद मिल सकें। क्योंकि हमारा न्यूशिंग स्पेशल कार्यक्रम आप से है, आप के लिए है, आप पर है। जिंदगी की असल खूबसूरती यह नहीं कि आप कितने खुश हैं बल्कि जिंदगी की असल खूबसूरती तो यह है कि दूसरे आप से कितने खुश हैं। इसी विचार के साथ हमारा न्यूशिंग स्पेशल कार्यक्रम यहीं समाप्त होता है। आप नोट करें हमारा ई-मेल पताः hindi@cri.com.cn । आप हमें इस पते पर पत्र भी लिख कर भेज सकते हैं। हमारा पता हैः हिन्दी विभाग, चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पी .ओ. बॉक्स 4216, सी .आर .आई.—7, पेइचिंग, चीन, पिन कोड 100040 । हमारा नई दिल्ली का पता हैः सी .आर .आई ब्यूरो, फस्ट फ्लॉर, A—6/4 वसंत विहार, नई दिल्ली, 110057 । श्रोताओ, हमें ज़रूर लिखयेगा। अच्छा, इसी के साथ मैं हेमा कृपलानी आप से विदा लेती हूँ इस वादे के साथ कि अगले हफ्ते फिर मिलेंगे।

तब तक प्रसन्न रहें, स्वस्थ रहें। नमस्कार

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