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मपेद्स के प्रति श्यैन श्योमेई की पसंद
2010-12-14 11:02:30
जब सिनच्यांग की अल्पसंख्यक जाति का एक मपेद्स आप के सामने रखा जाए, तो क्या वह आप की नज़र खींच सकता है?सिनच्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश की राजधानी उरुमछी शहर की छीफ़ांग सड़क पर एक ऐसी महिला है, जो सिनच्यांग की जातीय विशेषता वाला मपेद्स बनाती है। उन का नाम है श्यैन श्योमेई।

जब हमारी मुलाकात सुश्री श्यैन श्योमेई से हुई, तो देखा कि वे परम्परागत जातीय वेशभूषा में हैं। और सिनच्यांग वेवुर जाति का एक गीत भी गा रही हैं। लेकिन, आप नहीं जान सकते कि वे वेवुर जाति की महिला नहीं हैं, बल्कि ह्वेई जाति की हैं।

इस वर्ष सुश्री श्यैन श्योमेई की उम्र 47 साल है, लेकिन देखने में वे बहुत युवा हैं। उन्हें पांचवें चीनी कला मास्टर का इनाम दिया गया है। पिछले 20 से ज़्यादा वर्षों में वे कला में लग्न हैं। अब वे चीनी कला संघ एवं चीनी लोक कला संघ की परिषद में हैं। उन के द्वारा डिज़ाइन किये गये सिनच्यांग की जातीय विशेषत वाले पात्र---आफ़ैनथी, दादा बाई, सिनच्यांग लड़की, वांग ल्वोबिंग, संगीतकार, सिनच्यांग खाना, 12 मूखामू आदि देश विदेश के पर्यटकों ने पसंद किए हैं।

श्यैन श्योमेई का जन्म उरुमछी में हुआ। बचपन से ही उन्हें चित्र बनाना पसंद है। 7 की उम्र में उन्हें सिनच्यांग के थुरुफ़ैन में स्थानांतरित किया गया। वहां उन्होंने वेवुर जाति के अनेक लोगों से संपर्क किया। उस समय उन के जन्मस्थान में केवल उन का परिवार ही ह्वेई जाति का था, बाकी सब वेवुर जाति के लोग थे। बचपन से ही श्यैन श्योमेई वेवुर जाति के बच्चों के साथ खेलती आई और अच्छी तरह वेवुर भाषा बोल सकती हैं।उन के अनुसार, थुरुफ़ैन में मैं तीन वर्ष तक रही । उस समय रोज़ मैं वेवुर भाषा बोलती थी और वेवुर जाति के छोटे मित्रों के साथ खेलती थी। इस तरह मैं ने उन के जातीय रीति रिवाज़ों के प्रति जानकारी हासिल की।

थुरुफ़ैन के जीवन अनुभव ने श्यैन श्योमेई पर गहरी छाप छोड़ी है। वहां की वेवुर जाति की लड़कियां औस्मैन से भौं को काला बनाती हैं और रेत बेर की गोंद से बाल ड्रेसिंग करती हैं। इन सब के प्रति सुश्री श्यैन श्योमेई बहुत परिचित हैं। उन के विचार में आज उन के द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियां उस समय के जीवन वातावरण से अलग नहीं की जा सकती हैं।

मीडिल स्कूल में जाने का बाद श्यैन श्योमेई ने औपचारिक रूप से चित्र बनाना सीखा । वे बीस वर्षों से चित्र बना रही हैं। श्यैन श्योमेई वेवुर रीति रिवाज़ों को जीवंत तरीकों से प्रतिबिंबित करना चाहती है, इसलिए, उन्होंने मपेद्स बनाना शुरू किया।

शुरू में मपेद्स बनाते समय श्यैन श्योमेई बहुत खुश थीं। उन का दिमाग विविधतापूर्ण वेवुर पात्रों से भरा हुआ था। लेकिन, जब उन्होंने असली रूप से उन्हें बनाना शुरू किया, तो कठिनाईयां आयीं। उन के अनुसार, सब से पहले, मैं स्पंज से मपेद्स भरती थीं, बाद में कपास का इस्तेमाल किया। लेकिन, कपास बहुत नरम है, जब लोग इसे दबाते हैं, तो मपेद्स बहुत छोटा बनेगा। अंत में मैं ने इस भराव को हासिल किया, जो दबाने व धोने के बाद भी पहले की तरह रह सकता है।

इसी तरह श्यैन श्योमेई ने अनेक जीवंत वेवुर जाति के लोगों के मपेद्स बनाये, जिन्हें बाज़ार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

श्यैन श्योमेई के मपेद्स के बाज़ारों में लोकप्रिय होने के साथ-साथ, सिनच्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश का महिला संघ उन से मिला और एक सुझाव पेश किया। स्थानीय सरकार चाहती है कि श्यैन श्योमेई हाज़ाक के चरवाहों को मपेद्स बनाना सिखाएं और हाज़ाक जाति के लोगों की आमदनी बढ़ाने में मदद दें। सुश्री श्यैन श्योमेई ने हाज़ाक जाति के चरवाहों के घर जाकर उन की परम्परागत कढ़ाई कला का अनुसंधान किया। गहरी जांच करने के बाद सुश्री श्यैन श्योमेई ने हाज़ाक जाति के लिए विशेष मपेद्स पात्र डिजाइन किए। उन्होंने कहा, आप मेरे मपेद्स देखिये। इस के नीचे जो चित्र है, हाज़ाक जाति के कलाकारों ने कढ़ाई की है। सामान्य मपेद्स उन की कढ़ाई करने के बाद और सुन्दर दिखाया जा सकता है।

श्यैन श्योमेई के मपेद्स चीन के भीतरी इलाकों में भी बहुत लोकप्रिय हैं। उन के मित्रों ने उन्हें भीतरी इलाकों में काम करने के लिए आमंत्रण किया, लेकिन, श्यैन श्योमेई अपनी जन्मभूमि नहीं छोड़ना चाहती। बचपन से वे यहां रहती आई हैं। वे अक्सर यह कहती हैं कि कला जीवन से अनुभव पा सकती हैं। जीवन के बिना कला में कोई भावना नहीं आएगी। जब समय मिलता है, श्यैन श्योमेई ज़रूर वेवुर जाति के व्यस्त बाज़ार जाती हैं या वेवुर जाति के लोगों के घर जाकर उन से बातचीत करती हैं। वे ध्यान से वेवुर लोगों की हर एक आकृति की रिकॉर्डिंग करती हैं। उन के अनुसार, यदि खुद वेवुर जाति के लोगों से संपर्क नहीं करती, तो जीवंत अनुभव नहीं पा सकेंगी।

अब श्यैन श्योमेई के मन में एक इच्छा है, यानि अपने प्रयास के जरिये, सिनच्यांग के सांस्कृतिक उद्योग के विकास को प्रेरित करना , ताकि सिनच्यांग दुनिया की ओर जा सके और दुनिया सिनच्यांग के बारे में जानकारी पा सके। पर्यटक फ़ू चुंगरन ने कहा, सुश्री श्यैन श्योमेई सिनच्यांग की वेवुर संस्कृति की प्रसारक हैं। वे जातीय एकता की मिसाइल भी हैं। उन के सभी कामों में सक्रिय भावना भरी हुई है। वे मपेद्स से सिनच्यांग का विकास व पुनरुत्थान करना चाहती हैं और लोगों की सुखी जीवन को प्रतिबिंबित करती हैं। हम उन के काम में सिनच्यांग के प्रति उन का गहरा प्रेम महसूस कर सकते हैं।

सुश्री श्यैन श्योमेई अपनी कला से और ज़्यादा लोगों को सिनच्यांग की जानकारी देना चाहती हैं। सिनच्यांग की रंगीन संस्कृति का प्रसार करना श्यैन श्योमेई के जीवन का लक्ष्य है।

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