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द्विभाषी पढ़ाई से अल्पसंख्यक जातियों को लाभ मिला
2009-09-01 20:24:00

उत्तर पश्चिमी चीन का शिनच्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश एक बहु जातीय क्षेत्र है। वेवुर जाति, हान जाति, हाजाक जाति और मंगोलिया जाति आदि 40 से ज्यादा जातियों के लोग यहां रहते हैं। विभिन्न जातियों के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने और समान विकास को साकार करने के लिए इधर के वर्षों में स्थानीय सरकार ने अल्पसंख्यक जातियों की भाषा व चीनी भाषा की पढ़ाई को बड़ा महत्व दिया है।

शिनच्यांग के काशी क्षेत्र की साछ काऊंटी में 96 प्रतिशत से ज्यादा नागरिक वेवुर जाति के लोग हैं और बहुत कम लोग चीनी भाषा बोल सकते हैं। लेकिन, इस काऊंटी की बोशखन्ट कस्बे के प्राइमरी स्कूल में बच्चे मानक चीनी भाषा में संवाददाताओं के साथ बातचीत करते हैं।

7 वर्षीय नारजेरई मेईमेईटी अपने सहपाठियों के साथ चीनी कक्षा ले रही है। वह चीनी भाषा में अपने मित्रों से बातचीत करती है। वह आशा करती है कि अपनी चीनी भाषा में सुन्दर शिनच्यांग के बारे में हान जाति के मित्रों को बता सकेगी। इतना ही नहीं, वह चीनी भाषा में हान जाति तथा अन्य जातियों के मित्रों की जीवन स्थिति भी जानना चाहती है।

चीनी सीख कर मैं चीनी विद्यार्थियों को मित्र बना सकती हूं।

इस स्कूल के कुलपति ह्वांग मींग ने हमें परिचय देते हुए बताया कि 12 वर्ष पहले उन्होंने इस स्कूल की स्थापना की थी। उस समय स्थानीय अनेक अल्पसंख्यक जातियों के लोग समग्र कृषि ज्ञान सीखने से समृद्ध बनना चाहते थे। लेकिन, अधिकांश वैज्ञानिक व तकनीकी पुस्तकें चीनी भाषा में प्रकाशित होती थीं। इसलिए, लोग आशा करते हैं कि उन के बच्चे चीनी सीख कर और ज्यादा वैज्ञानिक व सांस्कृतिक ज्ञान सीख सकेंगे। 12 वर्ष के विकास के बाद, ह्वांग मींग का यह प्राइमरी स्कूल शिनच्यांग में दोभाषी स्कूल का मॉडल बन चुका है। अब इस स्कूल में चीनी भाषा, अंग्रेजी, गणित, पेंटिंग और संगीत आदि पढ़ाया जाता है। इतना ही नहीं, विद्यार्थी वेवुर भाषा भी सीखते हैं। अनेक भाषाएं जानने की वजह से यहां के अनेक विद्यार्थियों को और विकसित क्षेत्रों में आगे पढ़ने के मौके भी मिल रहे है। श्री ह्वांग मींग ने कहा,

मेरा खुद का अनुभव है कि द्विभाषी शिक्षा स्वीकार करने से वेवुर जाति गरीबी से समृद्धि व सभ्यता की ओर विकास कर रही है।

वर्ष 2004 से शिनच्यांग ने द्विभाषी शिक्षा का प्रसार करना शुरु किया।अभी तक, 30 प्रतिशत से ज्यादा अल्पसंख्यक जातियों के विद्यार्थी द्विभाषी शिक्षा हासिल कर चुके हैं। शिनच्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा दिये गये आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005 से शिनच्यांग ने किंडरगार्टन में द्विभाषी शिक्षा के प्रसार के लिए लगभग 20 करोड़ 60 लाख चीनी य्वान की पूंजी दी है, जिस से 3 लाख 33 हजार बच्चों को लाभ मिला है।

अब लोगों का जीवन इंटरनेट युग में प्रवेश कर गया है। चीनी भाषा जानने वाले अल्पसंख्यक जातियों के लोग हान भाषा की अनेक वेबसाइटों के जरिये बाहरी दुनिया को जान सकेंगे। काशी क्षेत्र की येईछन काऊंटी के ईथमूखोंग मीडिल स्कूल के विद्यार्थी कंप्यूटर कक्षा ले रहे हैं। इस स्कूल के सभी विद्यार्थी वेवुर जाति के हैं, लेकिन, सभी विद्यार्थी मेहनत से चीनी भाषा सीख रहे हैं। कंप्यूटर कक्षा सब की सब से पसंदीदा कक्षाओं में से एक है। विद्यार्थी एरलिज़ गुलिएन ने बताया,

हम चीनी भाषा से कंप्यूटर पर टाइप करते हैं और लेख लिखते हैं। इतना ही नहीं, इंटरनेट से हम विविधतापूर्ण जानकारी पातेहैं।

दक्षिण शिनच्यांग के हथ्यैन क्षेत्र में शिनच्यांग वेवुर स्वायत प्रदेश की अनेक अल्पसंख्यक जातियां रहती हैं। हथ्यैन काऊंटी के पाथेईख गांव में स्थानीय सांस्कृतिक कमरे से पढ़ने की आवाज़ें आ रही हैं। हम ने देखा कि कमरे में बड़ी उम्र के विद्यार्थी चीनी भाषा सीख रहे हैं।

एई गुली 36 वर्ष की है, जो इस गांव की सामान्य किसान है।वह दो वर्ष से चीनी भाषा सीख रही है। उस ने कहा कि उस के मित्र भी चीनी भाषा सीख रहे हैं। चीनी भाषा सीखने से उसे और ज्यादा लोगों से बातचीत करने और बाहरी दुनिया को जानने का मौका मिला है। इतना ही नहीं, वह शहर में भी एक अच्छी नौकरी हासिल कर सकेगी। एई गुली के अनुसार,

चीनी भाषा सीखने के बाद मुझे भारी सुविधाएं मिली हैं। उदाहरण के लिए, जब हम काम करने के लिए देश के अन्य शहरों में जाते हैं और किसी सरकारी विभाग जाते हैं, तो लोगों के साथ चीनी भाषा में आसानी से बात कर सकते हैं।

स्थानीय कर्मचारी मेइमेइटी रोज़ ने परिचय देते समय बताया कि द्विभाषी शिक्षा से आम नागरिक और ज्यादा सूचनाएं पा सकेंगे। वे लोग देश के अपेक्षाकृत विकसित शहरों व क्षेत्रों में जाकर काम भी कर सकते हैं।

चीनी भाषा सीखने के बाद अल्पसंख्यक जाति के लोग और ज्यादा ताज़ा खबरें व सूचनाएं पा सकते हैं। किसानों व चरवाहों की आमदनी को बढ़ाने के लिए वर्ष 2005 से हमारी काऊंटी ने किसानों को शहरों में काम करने के लिए प्रेरित किया। स्थानीय किसान मुख्यतः उत्तरी शिनच्यांग या देश के अन्य शहरों में मजदूरी का काम करने लगे और साल दर साल समृद्ध बनने लगे। यदि किसान चीनी भाषा नहीं जानता है, तो शिनच्यांग के बाहर जा कर काम करना बहुत कठिन होगा। चूंकि चीन के अधिकांश स्थलों में चीनी भाषा प्रचलित है। इसलिए किसानों के लिए चीनी भाषा सीखना अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

चीनी भाषा की पढ़ाई पर जोर देने के साथ-साथ शिनच्यांग अल्पसंख्यक जातियों की भाषाओं के संरक्षण व इस्तेमाल पर भी बड़ा महत्व देता है। विभिन्न किस्मों की शिक्षा में अल्पसंख्यक जातियों की जातीय भाषाओं की शिक्षा शामिल है। खासकर शिनच्यांग के प्राइमरी व मीडिल स्कूलों में अलग-अलग तौर पर वेवुर जाति व हाजाक जाति आदि सात जातीय भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है। शिनच्यांग में विभिन्न स्तरीय सरकारें संबंधित नीतियों का संजीदगी से पालन करके वेवुर व हान जाति की दो भाषाओं के जरिये विभिन्न सरकारी दस्तावेजों को जारी करती हैं।

शिनच्यांग जन प्रकाशन गृह क्रमशः वेवुर, हान, हाजाक एवं मंगोलिया आदि छह जातियों की भाषाओं में पुस्तकों का प्रकाशन करता है। इस के अलावा, शिनच्यांग ने जातीय भाषा की कार्य कमेटी तथा जातीय भाषा संस्था भी बनाई है और अल्पसंख्यक जातियों की भाषा का सही इस्तेमाल व विकास करने के लिए जातीय भाषा का वैज्ञानिक अनुसंधान भी किया है।

बच्चों, खासकर सुदूर क्षेत्र के अल्पसंख्यक जातियों के बच्चों के लिए जातीय भाषा, चीनी भाषा एवं अंग्रेजी भाषा सीखने से उन के सामने दुनिया को देखने का द्वार खोला गया है। उन का जीवन और विविधतापूर्ण व रंगीन बन सकेगा।

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