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चीनीयों का धार्मिक जीवन
2009-09-03 13:30:59

चीन में कैथोलिक , इसाई, इस्लाम, बौद्ध तथा ताऔ पांच धर्म होते हैं, जिन के अनुयाइयों की कुल संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हैं।

पेइचिंग शहर के दक्षिण भाग में स्थित श्वेन वू मन गिरजा एक कैथोलिक चर्च है, जिस का 300 से ज्यादा वर्षों का इतिहास है। एक इतवार के सुबह जब हमारा संवाददाता वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि एक हजार से ज्यादा वर्गमीटर वाला यह गिरजा मास के लिए अनुयाइयों से खचाखच भरा हुआ । कुछ लोगों को विवश होकर गलियारे में खड़े होना पड़ा। सभी लोग बड़ी आस्था से पादरी की शिक्षा सुन रहे हैं।

मसा के बाद हमारे संवाददाता ने चौंसठ वर्षीय सुश्री वांग बिंग व्ये के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा, मैं हर इतवार को गिरजे में जाकर मास करती हूं। मेरे जन्म के तीन दिन के बाद ही मुझे पवित्र जल छिड़काया गया था। 100 से वर्षों से पहले, मेरे दादा दादी भी कैथोलिक थे। और अब मैं भी कैथोलिक धर्म में आस्था रखती हूं।

सुश्री वांग ने कहा कि कुछ समय से पहले, श्वेन वू मन गिरजे के आंगन में एक सेंट मेरी पहाड़ बनाई गयी, पहाड़ पर जलप्रपात , वृक्ष औऱ मेरी की प्रतिमा भी है, जिस से पूरा गिरजा और सुन्दर और पवित्र दिखाई पड़ता है। सेंट मेरी पहाड़ के निर्माण में 20 लाख चीनी य्वान का खर्ज किया गया है, जो सब सरकार द्वारा प्रदान किया गया है। इतना ही नहीं, गिरजे के पुराने संस्थापनों का भी पुनः निर्माण किया गया है।

श्वेन वू मन गिरजे में हमारे संवाददाता ब्रिटिश पादरी श्री ओलीबरे से मिले। वे निमंत्रण पर चीनी अनुयाइयों को धार्मिक सूत्र पढाने के लिए चीन आए थे। श्री ओलबरे के अनुसार, श्वेन वू मन गिरजे का वातावरण बहुत अच्छा है, और मास करने का माहौल भी विदेशी गिरजों की ही तरह है। उन्होंने बड़ी दिल्लचस्पी से अपने और श्वेन वू मन गिरजे के विशेष संबंध की चर्चा की , वर्ष 1979 में मैं पहली बार श्वेन वू मन गिरजा आया । इधर के वर्षों में, मैं हर साल एक बार यहां आता हूं। मैंने पाया है कि गिरजे में आने वाले लोग लगातार बढते गए हैं और यहां मास करने का माहौल भी बहुत सुन्दर है।

कैथोलिक धर्म 13वीं शताब्दी के अंत में इटाली के पादरियों द्वारा चीन में लाया गया था। 19वीं शताब्दी में चीन अर्धउपनिवेशी और अर्धसामन्ती वाले देश बनने के बाद चीन में कैथोलिक गिरजे लम्बे अरसे के लिए विदेशी धार्मिक व्यक्तियों के नियंत्रण में थे। कुछ साम्राज्यवादी देशों ने कैथोलिक धर्म को चीन का आक्रमण करने का एक साधन भी बनाया । वर्ष 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद चीन में कैथोलिक धर्म में भारी परिवर्तन आया।

चीनी कैथोलिक देशभक्ति संघ के उप नेता श्री ल्यू पो न्येन ने कहा, नये चीन की स्थापना के बाद चीन के कैथोलिक धर्म राजनीतिक, आर्थिक व धार्मिक मामलों के प्रबंध में स्वतंत्रता , आत्म निर्णय और स्वावलंबन से गिरजा चलाने के सिद्धांत का पालन करता है, यानी उस ने स्वशासन, आत्मनिर्भरता औऱ शिक्षा की उसूल अपनाया । अब चीन में कैथोलिक धर्म के कुल 97 सत्तान्वे धार्मिक क्षेत्र हैं, जिन में कुल तिहत्तर 73 प्रमुख बिशाप हैं। चीन में सभी गिरजे चीनी पादरियों द्वारा चलाये जाते हैं।

वर्तमान चीन में कोई 6000 कैथोलिक गिरजे सुरक्षित हैं औऱ 50 लाख अनुयायी हैं। प्रति वर्ष हजारों बाइबलों का प्रकाशन किया जाता है। चीन में कैथोलिक धर्म का सब से उच्च स्तरीय शिक्षाल्य---पेइचिंग के चीनी कैथोलिक इंस्टिट्युट के अलावा, देश के विभिन्न स्थानों में अन्य 30 से ज्यादा इंस्टिट्युट भी हैं। इधर के वर्षों में, चीन ने अनेक अनुयाइयों और पादरियों को धार्मिक शिक्षा के लिए अमरीका, जर्मन तथा फ्रांस आदि देशों को भी भेजा।

कैथोलिक की ही तरह, इस्लामी धर्म भी चीन के लिए एक ऐसी धर्म है, जो बाहर से आया है। लगभग 7 वीं शताब्दी में इस्लामी धर्म ने अरब प्रायद्वीप से चीन में प्रवेश किया । अब चीन में ह्वे जाति , वेवुर जाति, कजाख जाति आदि 10 अल्प संख्यक जातियां इस्लामी धर्म में विश्वास रखती हैं, जिन के अनुयाइयों की संख्या 2 करोड़ पहुंचती हैं, और वर्तमान चीन में कुल पैंतीस 35 हजार मस्जिद हैं।

शिंग च्यांग वेवुर स्वायत में चीनी मुसलमान बहुल क्षेत्र हैं। अभी आप ने जो आवाज सुन रहे हैं, वह शिंग च्यांग के ऊरुमूछी शहर के सब से बड़े मस्जिद में रिकार्ड की गयी है।

चीन की राजधानी पेइचिंग में भी बहुत से मुसमान रहते हैं, और अनेक मस्जिद भी हैं। हमारे संवाददाता ने पेइचिंग के तुंग सी मस्जिद का दौरा किया। यह एक 500 वर्ष पूराना मस्जिद है, और देखने में वह पुराना पड़ गया है, लेकिन, मस्जिद मस्जीद के इमाम श्री छन क्वांग य्वेन ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने इस की मरम्मत करने के लिए पूंजी प्रदान की है।

श्री छन क्वांग य्वेन तुंग सी मस्जिद के इमाम ही नहीं, वे चीनी इस्लाम संघ के अध्यक्ष भी हैं। उन के अनुसार, अनेक वर्षों के इमाम होने से मेरा अनुभव है कि हमारे देश में जहां संविधान में धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता निर्धारित की गयी है । वहां देश सामान्य धार्मिक कार्यवाइयों की रक्षा भी करता है।

वर्ष 1955 पचपन में, पेइचिंग में चीनी इस्लामी धार्मिक अकादमी की स्थापना की गयी। श्री छन ने इसी अकादमी से स्नातक हुए थे। उन के अनुसार, उत्तर पश्चिमी चीन के शिंग च्यांग , निन श्या औऱ उत्तर-पूर्वी चीन के शन यांग आदि स्थानों में भी स्थानीय धार्मिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं। इधर की आधी शताब्दी में इन प्रतिष्ठानों ने बड़ी संख्या में इस्लामी शास्त्रियों का प्रशिक्षण किया है। स्नातक होने के बाद, उन के अधिकांश लोग देश के विभिन्न मस्जिदों में इमाम का काम करते हैं।

स की चर्चा में श्री छन ने कहा कि पहले बहुत से इमाम केवल धार्मिक सूत्र पढते थे औऱ सुनाते थे, लेकिन वे अनपढ़ थे। अब इमामों के शिक्षा स्तर में भारी उन्नति हुई है। अब इमाम धार्मिक सूत्र पढाने और पढने के अलावा, अरबी भाषी में अरबी देशों के मुसलमानों के साथ आदान-प्रदान भी कर सकते हैं।

लगभग 2000 वर्षों से पहले , बौद्ध धर्म ने चीन में प्रवेश किया था। अब चीन में बौद्ध धर्म के अनुयाइयों की संख्या कई करोड़ तक पहुंची है। बड़ी व छोटी मंदिरों की संख्या लगभग तीस हजार हैं।

पशिच्मी चीन में स्थित तिब्बत स्वायत प्रदेश चीन में तिब्बती बौद्ध धर्मावलंबी बहुत स्थल है। कुछ समय से पहले, हमारे संवाददाताओं ने चीनी बौद्ध धर्म की तिबब्ती शाखा के उपाध्यक्ष श्री तांचनकले के साथ इंटरव्यू किया।

श्री तांचनकले की उम्र अब 50 वर्ष की है। जब वे पांच वर्ष की उम्र में थे, तो उन्हें तिब्बती ल्हासा के ताजा मठ के जीवित बुद्ध चुने गये । अब वे तिबब्ती बौद्ध धर्म के त्रिपीटक का संपादन व प्रकाशन करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

श्री तांचनकले ने संवाददाताओं से कहा कि तिब्बत स्वायत प्रदेश त्रिपीटक के संग्रहण संकलन और प्रकाशन कार्य को बड़ा महत्व देता है। हाल में प्रकाशित दो प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथों , टेंजूर व गेंजूर में चिकित्सा, गणित शात्र , भौगोल एवं धार्मिक आदि विभिन्न क्षेत्रों के विष्य शामिल हैं। उन्होंने कहा, तिब्बत स्वायत प्रदेश हमेशा लम्बे अरसे से टेंजूर व गेंडूर इन दोनों प्रसिद्ध ग्रंथों के संकलन व प्रकाशन काम में लग रहा है, औऱ वर्ष 1990 से अब तक कुल मिलाकर 118 ग्रंथों का प्रकाशन कर चुका है।

श्री तांचनकले के अनुसार, विदेश में अनेक लोग तिब्बत की धार्मिक स्थिति से अज्ञात है। अब तिब्बत में एक हजार 4 सौ मठ सुरक्षित हैं, और बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदायों के 46 छियालीस हजार भिक्षु भिक्षुणी भी हैं। इधर के वर्षों में, सरकार ने 60 करोड़ से ज्यादा चीनी य्वान का अनुदान कर तिब्बत के विभिन्न स्थानों के मठों की मरम्मत की, औऱ धार्मिक अनुयाइयों व भिक्षुओं की मांग को पूरा कर दिया है। उन्होंने आशा प्रकट की कि विदेशी मित्र तिब्बत आकर अपनी आंखों से तिब्बत की असली धार्मिक स्थिति को देख सकेंगे।

चीन में कैथलिक धर्म , इस्लाम धर्म व बौद्ध धर्म के अलावा, इसाई व दाओ धर्म भी होते हैं ।

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