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    क्या "मेक इन इंडिया" एक पट्टी एक मार्ग से जुड़ सकता है
    2017-05-15 16:57:19 cri

    डेलॉयट लेखा फर्म ने अनुमान लगाया कि भारत, मलेशिया, थाईलैंड, इंटोनेशिया व वियतनाम चीन के बाद निहित शक्ति होने वाले पाँच देश बन सकेंगे। जिनमें भारत कम लागत वाले विनिर्माण उद्योग का अगला प्रमुख केंद्र बन सकेगा। लेकिन हाल में भारत जो स्थितियों का सामना कर रहा है, वह 30 साल पहले चीन की स्थिति से अलग है। भारत चीन के सफल अनुभवों को कॉपी नहीं कर सकता है।

    पहला, भारत लम्बे अरसे से अभिजात वर्ग शिक्षा की अवधारणा अपनाता रहा है। भारत में बुनियादी शिक्षा का बड़ा अभाव है। देश में अनपढ़ आबादी देश की कुल आबादी की करीब एक तिहाई है। हालांकि भारत में विश्व का सबसे बड़ा युवा श्रमिक बाजार है, फिर भी आधुनिक विनिर्माण उद्योग में आवश्यक कुशल श्रमिकों का बड़ा अभाव है। 2016 संयुक्त राष्ट्र संघ की मानव पूंजी सूचकांक की सूची में भारत विश्व के 105 वें स्थान पर रहा।

    दूसरा, यातायात व परिवहन, ऊर्जा व विद्युत, लॉजिस्टिक व भंडार, सार्वजनिक सेवा सहित पुरानी बुनियादी संरचनाओं ने कम लागत से पैदा हुई श्रेष्ठता को मिटाया है।

    तीसरा, भारत में बड़ी आबादी विशाल उपभोक्ता बाजार का प्रतीक नहीं है, बल्कि नीची गुणवत्ता वाले रोजगार ने बाजार की खपत क्षमता को नियंत्रित किया, जिससे भारत का उपभोग बाजार बड़ा है लेकिन कमजोर।

    और तो और भारत के सुधार को तीन प्रमुख मुसीबतों को दूर करना है। अब केवल कर सिस्टम के सुधार में प्रगति मिली है। इसके प्रभाव की जांच की जानी चाहिए। जबकि अन्य दो कठिनाइयां---श्रम कानून और भूमि अधिग्रहण कानून के सुधार में यथार्थ प्रगति नहीं हासिल की गयी है।

    साथ ही भारत में आर्थिक ढांचे, धर्म और समाज व संस्कृति की समस्याएं भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भूमंडलीकरण विरोधी प्रवृत्ति भी संभवतः बाहरी नियंत्रण तत्व बन सकेगी।

    आज दुनिया रोबोट तकनीक के तेज़ विकास के दौर में प्रवेश कर रही है। रोबोटों के ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल से भविष्य में मानव श्रमिकों पर निर्भरता कम हो सकेगी।

    अनुमान है कि आगामी 15 से 20 सालों में कम लागत वाला विनिर्माण उद्योग मानव श्रमिकों पर निर्भरता से छुटकारा नहीं पा सकेगा। यदि भारत इसका अच्छी तरह इस्तेमाल नहीं करता तो निहित आबादी लाभांश संभवतः खतरनाक आबादी बम परिवर्तित की जाएगी।

    इसलिए भारत को अपने सामने मौजूद चुनौतियों का साफ साफ समझना चाहिए। एक पट्टी एक मार्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व व्यापारिक सहयोग का एक नया ढांचा है। जबकि एक पट्टी एक मार्ग से जुड़े अहम देश होने के नाते यदि भारत अपनी विकास रणनीति"मेक इन इंडिया"को एक पट्टी एक मार्ग से जोड़ता, तो अवश्य ही शानदार विजेता पा सकेगा।

    एक पट्टी एक मार्ग"मेक इन इंडिया"को जरूरत पूंजी, तकनीक और अनुभव प्रदान दे सकता है, आबादी लाभांश की रिहाई देने में भारत को मदद दे सकता है, बुनियादी संरचनाओं के स्तर को उन्नत कर सकता है और "मेक इन इंडिया"के लिए बाजार का विस्तार कर सकता है, ताकि विभिन्न पक्ष समान उदार पा सकें।


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