
मोथो कांऊटी के पेई पंग टाऊंशिप में मनपा जाति की लड़की इशिचोमा, जो अब पेइचिंग तिब्बत मिडिल स्कूल में पढ़ती है, गर्मियों की छुट्टियां मनाने घर वापस आयी है, वह स्वेच्छा से चिकित्सा दल के लिये अनुवादक व गाइड का काम संभालती है। इशिचोमा को सफेद कोट पहनने वाले फौजी चिकित्सकों के प्रति बड़ी कृतज्ञता है। तिब्बती लड़की इशिचोमा ने कहा:"हमारा यह स्थल बहुत दूरदराज पर अवस्थित है, इतने ज्यादा फौजी डाँक्टर मरीजों के इलाज के लिये यहां आते हैं, हमें बेहद खुशी हुई है, और तो और बेशुमार दवा दारु भी हमें दिये हैं, हम सचे दिल से उन के बडे आभारी हैं। बहुत शुक्रिया।"
पिछले 18 सालों में नम्बर 115 अस्पताल के चिकित्सक व नर्स पहाड़ों व नद नदियों को पारकर मोथो कांऊटी के हरेक गांव व कस्बे जाकर स्थानीय वासियों का इलाज करने में जुटे हुए हैं। मोथो कांऊटी में प्रथम सर्जरी और पेट चिरकर बच्चे का पैदा करने का पहला आँपरेशन भी इसी अस्पताल के फौजी चिकित्सों ने किया है। उन के प्रयासों के जरिये मोथो कांऊटी के स्थानीय वासियों में इलाज दर व चंगी दर 1994 के तीन व 11 प्रतिशत से बढ़कर आज के 73 व 91 प्रतिशत तक हो गयी है। अब मोथो कांऊटी के हरेक टाऊनशिप में अपना क्लिनीक स्थापित हुआ है और गांव गांव में नर्स उपलब्ध भी है, कांऊटी स्तरीय अस्पताल आम रोगो का इलाज करने में सक्षम भी है। स्थानीय किसानों व चरवाहों को मामली सी सर्जरी के लिये नदियों व बर्फीले पर्वतों को पारकर लिन ची जाने की कोई जरुरत नहीं है, गर्भवतियों के लिये कठिन प्रसव के डर से समय से पहले दूसरी कांऊटी के अस्पताल जाना भी जरुरी नहीं है। इतना नहीं, अब मोथो कांऊटी के स्थानी वासी मूल रुप से मेलेरिया , खुजली , नासूर, जुकाम और सांप के दंश आदि दसेक स्थानीय रोगों की रोकथाम व इलाज से परिचित हुए हैं।















