

हर वर्ष में विशेष भौगोलिक स्थिति की वजह से मोथो में पहाड़ी रास्ता बंद अवधि 8 माह लम्बी है, स्थानीय वासियों को न सिर्फ बफीले पर्वतों व नदियों जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, बल्कि भूस्खलन और हिमस्खलन जैसे संकटों और जहरीले कीटों व खूख्वार जानवरों के प्रहारों को झेलना भी पड़ता है।
विशेष भौगोलिक स्थिति और अजीब मौसम की वजह से लम्बे अर्से से मोथो कांऊटी की चिकित्सा हालत अत्यंत दुभर थी, दवा दारु व चिकित्सा उपकरण नसीब नहीं था, इस से बीमार पड़ने पर इलाज करने का कोई रास्ता भी न था। ऐसी हालत में आम रोगियों के पास दर्द सहने के बजाये कोई दूसरा विकल्प भी न रहा। नम्बर 115 अस्पताल के फौजी चिकित्सकों के दवा बक्सों व चिकित्सा उपकरणों को लेकर यहां आने से पहले पूरी मोथो कांऊटी में कोई आँपरेशन नहीं था, अस्पताल में कोई पेशावर नर्स भी न थी, काफी ज्यादा किशोर व वयस्क बीमारी पड़ने से जल्दी ही चल बसे थे।
मोथो कांऊटी की चिकित्सा स्थिति को सुधारने के लिये 1994 से नम्बर 115 अस्पताल ने हर वर्ष दो फौजी चिकित्सकों को मोथो कांऊटी भेजना शुरु कर दिया, ताकि सर्दियों में स्थानीय रोगियों को ठीक समय पर इलाज उपलब्ध हो सके। क्या जाने इन फौजी चिकित्सकों को भारी दवादारु व चिकित्सा उपकरण लादकर विषाक्त मधुमक्खी जंगल, जोंक खाई और नरक के गेट से नाम से नामी त्वो श्योंग ला दर्रे को पारने में कितनी अहसनीय मुसीबतों को झेलना ही पड़ा। शायद आप को मालूम नहीं है कि भयंकर तूफान व बर्फ की वजह से ब्लैक हांक नामक एक हेलिकोप्टर इसी त्वो श्योंग ला दर्रे पर क्षतिग्रस्त होकर गिर पड़ा था।















