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    देगे में बौद्ध सूत्र मुद्रण गृह का दौरा
    2014-02-22 19:25:07 cri

     देगे में रहने वाले तिब्बती शास्त्र के विद्वान चेअर डोर्चे

    तिब्बती शास्त्र के विशेषज्ञ प्रोफैसर कङछ्यो तङची

    सूत्र संस्करण बनाए जाने के बाद दो मंजिला सूत्र भवन में संरक्षित किए जाते हैं। देगे सूत्र मुद्रण गृह में आम तौर पर काष्ठ निर्माण है, जहां बड़ी मात्रा में लकड़ी से बनाए गए सूत्र संस्करण सुरक्षित होते हैं। इस तरह देगे सूत्र मुद्रण गृह में आज तक कोई भी बिजली की तारे नहीं है। मुद्रण करने वाले मज़दूरों को गृह के आंगन के ऊपर से सूर्य की रोशनी पर निर्भर रहकर काम करना पड़ता है। सूत्र भवन में अंधेरा होने के बावजूद मज़दूर फिर भी बड़ी कुशलता से 3 लाख 20 हज़ार नक्काशी किये गये सूत्र संस्करणों में से आवश्यक संस्करण तैयार कर लेते हैं। दो-दो मज़दूर एक टीम बनाते हुए एक दूसरे के सामने बैठते हैं। एक व्यक्ति सूत्र संस्करण पर तेल-रंग ब्रश करता है, जबकि दूसरा व्यक्ति सूत्र काग़ज़ को सूत्र संस्करण पर रखकर एक रोलर का प्रयोग कर नीचे से ऊपर तक ढकेलता है, दोनों के सहयोग से सूत्र का एक पेज शीघ्र ही तैयार हो जाता है।

    देगे सूत्र मुद्रण गृह में प्रचलित परम्परागत नक्काशी, प्रिटिंग तकनीक और प्रक्रमण का इतिहास बहुत पुराना है, जिन्हें वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र"मानव जाति के गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत की नामसूचि"में शामिल किया गया। हाल में देगे सूत्र मुद्रण गृह"विश्व सांस्कृतिक विरासत की नामसूचि"में शामिल होने में प्रयासरत है। अभी वह नामसूचि में मनोनीत हो चुका है।

    देगे सूत्र मुद्रण गृह में सुरक्षित सूत्रों और किताबों की संख्या बहुत अधिक है, और विभिन्न प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध हैं, जो देश भर में बहुत विख्यात है। इस सूत्र मुद्रण गृह में 830 से अधिक प्राचीन ग्रंथ सुरक्षित हैं, जिनमें तिब्बती बौद्ध धर्म के शास्त्रीय सूत्र, तिब्बती जाति का इतिहास, राजनीति, अर्थतंत्र, धर्म और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों से जुड़े मूल्यवान ग्रंथ शामिल हैं। मसलन्"हान जातिय क्षेत्रों में धर्म का उद्गम और शाखाएं"नामक किताब में चीन के अंदरूनी इलाकों में बौद्ध धर्म का इतिहास, हान जाति और तिब्बती जाति के संबंध जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा संस्कृत, नेपाली और तिब्बती भाषा वाले"बुद्धिमत्ता के 8 हज़ार गुणगान"नामक बौद्ध सूत्र विश्व में अद्वितीय है। देगे कांउटी के प्रसार विभाग के उप प्रधान वू चीवन ने जानकारी देते हुए कहा:"वर्तमान में हमारे देगे सूत्र मुद्रण गृह में सुरक्षित'बुद्धिमत्ता के 8 हज़ार गुणगान'नामक सूत्र राष्ट्र स्तरीय खजाना है। इसके साथ ही बौद्ध धर्म से जुड़े'भारतीय बौद्ध धर्म का उद्गम और शाखाएं'नामक किताब विश्व में अद्वितीय है, जो बौद्ध धर्म का उद्गम स्थल भारत में भी नहीं है।"

    इन मूल्यवान किताबों को और अच्छी तरह सुरक्षित करने और खांगबा तिब्बती क्षेत्र में खांगबा तिब्बती संस्कृति के संरक्षण और इसे विरासत में लेते हुए आगे विकास करने के लिए वर्ष 2013 के अगस्त महीने में सछ्वान प्रांत के कानची तिब्बती स्वायत्त प्रिफैक्चर में कानची खांगबा संस्कृति अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई, जिसके आधार पर देगे नक्काशी प्रिटिंग संग्रहालय, देगे डिजिटल सूत्र मुद्रण गृह, देगे सूत्र मुद्रण गृह का त्रिपट्टिका (Tripitaka) बौद्ध सूत्र की पुनः प्रिटिंग और देगे में राजा गेसर प्रदर्शन हॉल जैसी चार परियोजनाओं का कार्यान्वयन शुरु किया गया। देगे डिजिटल सूत्र मुद्रण गृह आधूनिक कंप्युटर तकनीक का इस्तेमाल कर प्राचीन ग्रंथों और सूत्र नक्काशी संस्करणों का इलेक्ट्रोनिक फोटोकॉपी करेगा और संबंधित भंडारण व बैकअप करेगा।

    आधूनिक तरीके से नक्काशी और छपाई से सूत्रों की प्रिटिंग में भारी सुविधाएं प्राप्त हुई है। लेकिन सछ्वान प्रांत में शीनान जातीय विश्वविद्यालय के तिब्बती शास्त्र के विशेषज्ञ प्रोफैसर कङछ्यो तङची के विचार में देगे सूत्र मुद्रण गृह में त्रिपट्टिका (Tripitaka) बौद्ध सूत्र की पुनः प्रिटिंग परम्परागत कृत्रिम नक्काशी के माध्यम से किया जाना ज्यादा अच्छा रहेगा, वरना परम्परागत हस्त-कलात्मक तकनीक धीरे-धीरे गायब हो जाएगा। उन्होंने कहा:"लोक चीज़ों का अलग-अलग मूल्य होता है, जिनमें हस्तकलात्क मूल्य, सांस्कृतिक विरासत मूल्य और कलात्मक मूल्य जैसे शामिल हैं। लेकिन मशीन से बनी हुई चीज़ों का प्रिटिंग और किताब की क्षमता बढ़ाने के बावजूद कोई बाकी मूल्य नहीं रह जाता। अगर त्रिपट्टिका (Tripitaka) बौद्ध सूत्र की पुनः प्रिटिंग की जाए, तो हस्त-नक्काशी की जानी चाहिए। मुझे लगता है कि हमें परम्परा को बनाए रखना चाहिए।"

    देगे सूत्र मुद्रण गृह में कोई धार्मिक शाखा का विवरण नहीं होता, जिसमें हरेक धार्मिक संप्रदाय के सूत्र ग्रंथों की छपाई की जा सकती है, जिससे तिब्बती बहुल क्षेत्रों में तिब्बती बौद्ध धर्म के पांच संप्रदायों के सामंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा मिला है। इसी वजह से देगे सूत्र मुद्रण गृह चीन के तिब्बती बहुल क्षेत्रों में उच्च स्थान पर है और यह गृह के चिरस्थाई विकास का बुनियाद भी है।

    देगे सूत्र मुद्रण गृह सिर्फ़ एक सरल प्रिटिंग हाउस ही नहीं है, बल्कि एक प्रिटिंग संग्रहालय के साथ-साथ सांस्कृतिक खजाना भी है। उसने तिब्बती संस्कृति के विकास में अहम भूमिका अदा की है। वह अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है और भविष्य में भी करता रहेगा।


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