



देगे सूत्र मुद्रण गृह में प्रयोग किए जाने वाले मुद्रित संस्करण का कच्चा माल लाल भोज वृक्ष की लकड़ी से बना होता है। नक्काशी करने वाले मज़दूर कड़ी परिक्षा से गुजरने के बाद नक्काशी करते हैं, जो नक्काशी, तिब्बती भाषा एवं ललितकला में निपुण है। अच्छी तरह नक्काशी करने के लिए देगे सूत्र मुद्रण गृह में यह निर्धारित किया गया कि हरेक नक्काशी वाले मज़दूर को एक ही दिन में एक ही इंच वाले मुद्रित संस्करण की नक्काशी करना है।
अच्छी गुणवत्ता वाली नक्काशी करने वाले मज़दूर कड़ी मेहनत से काम करने के बाद अच्छी आमदनी कमा लेते है। देगे सूत्र मुद्रण गृह की स्थापना के शुरुआत में नक्काशी करने वाले मज़दूरों के वेतन का हिसाब सोने से किया जाता था। देगे सूत्र मुद्रण गृह के सांस्कृतिक वस्तुओं के प्रबंधन विभाग के कर्मचारी य्वे क्वेइंग ने जानकारी देते हुए कहा:"तत्कालीन मुद्रण गृह के निदेशक थूसी सोने के पाउडर को नक्काशी किए गए सूत्र संस्करण के ऊपर फैलाते थे। उसके बाद शब्दों में फंसे सोने के पाउडर को निकाल कर मज़दूर को दिया जाता था। यही उनका वेतन होता था।"
नक्काशी किए जाने के बाद सूत्र संस्करण को 12 बार कड़ी परिक्षण से गुजरना पडता है और उसके बाद घी-तेल में एक दिन तक भीगाया जाता है। इसके बाद बाहर लाकर सूखाने के बाद"सूबा"नामक घास के रस को सूत्र संस्करण पर डाला जाता है, जिसका उद्देश्य दीमक आदि से बचाना होता है। उक्त जटिल और कड़े तकनीकी प्रक्रमण प्रक्रिया से देगे में मुद्रित सूत्र संस्करणों में 100 सालों तक कोई बदलाव नहीं आता।









