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    कानसू में थांगखा चित्र उद्योग के विकास
    2014-02-19 18:46:53 cri

    केसांग छीलाई

    प्रदर्शित थांगखा चित्र

    कुछ समय पहले 2 सौ से अधिक थांगखा शिल्पकारों द्वारा दस सालों के समय में बनाए गए विशाल थांगखा चित्र"कान्नान तिब्बती संस्कृति के हज़ार थांगखा चित्र"नामक प्रदर्शनी उत्तर पश्चिमी चीन के कानसू प्रांत के कान्नान तिब्बती स्वायत्त प्रिफैक्चर की राजधानी होच्वो शहर में आयोजित हुई। इन थांगखा चित्रों ने तिब्बती संस्कृति के गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए नया रास्ता प्रदान किया है।

    थांगखा तिब्बती भाषा का शब्द है, यह रंगीन रेशमी कपड़े पर चित्रित धार्मिक चित्र है, जिसका विषय मुख्य तौर पर तिब्बती बौद्ध धर्म की कहानियां, तिब्बती जाति के इतिहास में महान व्यक्ति, मिथकों, कथाओं और महाकाव्यों में पात्र और उनकी कहानी शामिल है। चीन में तिब्बती बहुल क्षेत्रों में चाहे बड़े या छोटे मंदिर हो, या हर परिवार के बुद्ध कमरे ही क्यों न हो, थांगखा चित्र रखा जाता है। थांगखा चित्रकला का जन्म ईस्वी 7वीं शताब्दी में तत्कालीन तिब्बत यानी थूपो के राजा सोंगचान कानबू काल में हुआ था। अब तक इसका 1 हज़ार से अधिक वर्षों का इतिहास है। तिब्बती जाति के लोग घूमंतू जीवन बिताते है और तिब्बती लोग आमतौर पर घास के मैदान में रहते हैं। उनके हृदय में थांगखा चित्र मंदिर के बराबर है। चाहे शिविर में हो, या पेड़ की शाखा पर हो, थांगखा को लगाए जाने के बाद तिब्बती लोग पूजा कर सकते हैं। उनके विचार में थांगखा चित्र एक शुद्ध बौद्धिक चिह्न है।

    थांगखा तिब्बती संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है, जिससे तिब्बती जाति के इतिहास, धर्म, संस्कृति और कला आदि की झलक दिखती हैं। लेकिन थांगखा कला के विरासत में लेने और विकास करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसकी चर्चा में कान्नान में आयोजित हज़ार थांगखा चित्र प्रदर्शनी के आयोजक केसांग छीलाई ने जानकारी देते हुए कहा:"वर्तमान में थांगखा बाज़ार बहुत अव्यवस्थित है। कुछ लोग हाथ के बजाए मशीन से थांगखा बनाते हैं। बूढ़े शिल्पकार धीरे-धीरे दुनिया से चले गए हैं और युवा लोगों को इसके प्रति रुचि नहीं है। थांगखा चित्र सीखना कठिन काम है। एक थांगखा चित्र को पूरी तरह चित्रित करने में एक व्यक्ति को कई महिने का समय लगता है। इसके साथ ही थांगखा की बिक्री अच्छी नहीं है। कुछ स्कूलों में थांगखा चित्र सीखने वाले विभागों के विद्यार्थियों को स्नातक होने के बाद रोज़गार नहीं मिलता हैं। इस तरह उनके थांगखा सीखने का मूल्य नहीं दिखता है। इन कारणों से थांगखा चित्र के आगे विकास में बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।"

    सुयोग्य व्यक्तियों की कमी, बाज़ार के अव्यवस्थित स्थिति आदि कारणों से थांगखा चित्र के विकास में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। इस कला के विकास में मौजूद सवालों का समाधान करने और तिब्बती परम्परागत संस्कृति का लगातार विकास करने के लिए दस साल पूर्व केसांग छीलाई के दिमाग में एक हज़ार थांगखा चित्र प्रदर्शनी आयोजित करने का विचार सामने आया। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा:"दस साल पूर्व मेरे दिमाग में यह विचार आया था। मुझे लगता है कि थांगखा चित्र के माध्यम से जीवित रुप से तिब्बती संस्कृति को प्रतिबिंबित किया जा सकता है। बाद में मैंने कुछ प्रोफैसर के साथ मिलकर इस प्रदर्शनी आयोजित करने की तैयारियां कीं। हमारा लक्ष्य है कि तिब्बती संस्कृति के श्रेष्ठ भागों मसलन् खगोल, गणित विद्या और चिकित्सा शास्त्र जैसे भागों को हज़ार थांगखा प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों को दिखाना है।"

    केसांग छीलाई के विचार में प्रदर्शनी आयोजित करना थांगखा चित्र के प्रसार की शुरुआत है। योजनानुसार"तिब्बती संस्कृति के एक हज़ार थांगखा"परियोजना तीन भागों में बंटा हुआ है, जो वर्ष 2015 में पूरा होगा। वर्तमान में आयोजित प्रदर्शनी इस परियोजना का पहला चरण है। दूसरे चरण में वे चीनी तिब्बती शास्त्र प्रकाशन विभाग के साथ मिलकर"तिब्बती संस्कृति के एक हज़ार थांगखा"वाला चित्र पुस्तक प्रकाशित करेंगे और तीसरे चरण में इन एक हज़ार थांगखा चित्र के आधार पर संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का विकास करेंगे। वे एक हज़ार थांगखा पर चित्रित कहानी के आधार पर विड्यो बनाकर रेडियो, टीवी, इन्टरनेट और मोबाइल जैसे माध्यमों से लोगों को दिखाएंगे। इसकी चर्चा करते हुए उन्होंने कहा:"हम बहु-मीडिया के जरिए तिब्बती, हान और अंग्रेज़ी जैसी भाषाओं के माध्यम से थांगखा चित्र की सुन्दरता दिखाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए अगर तुम्हें तिब्बती संस्कृति में किसी एक कहानी के प्रति रुचि होती, तो मोबाइल और इन्टरनेट जैसे तरीके से ढूंढ़ कर संबंधित कहानी देख सकते हो।"

    केसांग छीलाई ने परिचय देते हुए कहा कि वे एक थांगखा-अनुभव केंद्र स्थापित करेंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सही मायने में थांगखा कला और तिब्बती संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं, ताकि सांस्कृतिक उद्योग से जुड़े विचार से थांगखा कला के विकास को आगे बढ़ाया जा सके। केसांग छीलाई ने कहा:"सांस्कृतिक उद्योग सृजनात्मक उद्योग भी है। लगातार सृजन करने से थांगखा कला बाज़ार में जीवित हो सकेगा। इसके लिए हमें सृजन करने के वक्त आम जीवन से ज्यादा नज़दीक होना चाहिए। भविष्य में हम इस प्रकार की दिशा में कोशिश करते रहेंगे।"

    ज्यादा से ज्यादा लोग थांगखा पर ध्यान देने और इस प्रकार के चित्र को पसंद करने के चलते थांगखा से संबंधित सांस्कृतिक सृजनात्मक उद्योग पैदा हुआ। तिब्बती संस्कृति के अहम भाग के रुप में थांगखा कला विभिन्न कलात्मक तरीके से लोगों के सामने आएगा। विश्वास है कि इस तरह की कोशिशों से तिब्बती जाति की परम्परागत संस्कृति का विकास और रंगारंग होगा।

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