अखिल- लिली जी... बेन के साथ घटित यह चिकित्सीय चमत्कार अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। 2010 में 13 साल की एक क्रोएशियाई लड़की जब नींद से जागी तो उसे पता चला अब वह अपनी मातृभाषा की बजाए जर्मन भाषा में अधिक पारंगत हो गई है। जुलाई 2013 में एक अमेरीकन नेवी का रिटायर्ड सैनिक अपने होटल रूम में बेहोश हो गया। जब उसे होश आया तो उसे याद नहीं था की वह कौन है पर अब वह धाराप्रवाह स्वीडिश भाषा बोलने लगा था।
अखिल- दोस्तों, चीन के शंघाई शहर में एक मामला सामने आया है कि अगर बेटा सुधरा नहीं तो संपत्ति से हो जाएगा बेदखल।
जी हां दोस्तों, चीन के शंघाई शहर में बेटे के आलस्य से निराश होकर माता-पिता ने अदालत में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। उनकी शिकायत है कि वह पूरे दिन बस सोता है और इंटरनेट का इस्तेमाल करता रहता है। खुद को कमरे के अंदर बंद कर वह कई-कई दिन गुजार देता है। पहले तो माता-पिता ने उसे डांटा-फटकारा। थक-हारकर खुद उसके लिए नौकरी तलाश की। लेकिन नौकरी भी वह तीन महीनों में छोड़कर बैठ गया। आखिरकार सारे पैंतरे आजमाने के बाद उन्होंने बेटे को सुधारने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन इस पर भी उन्हें अपने बेटे में कोई सुधार नहीं दिख रहा। लिहाजा उसके आलस्य से तंग आकर वे उसे अपनी संपत्ति से बेदखल करने पर विचार बना रहे हैं।
लिली- हां हां हां... बहुत सही किया उसके माता-पिता ने उसके साथ।
अखिल- जी हां लिली...। मैं तो कहना चाहूंगा कि आलस्य ही मानव का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। आलस्य के कारण ही मनुष्य उन्नति के साधनों को खो देता है।
लिली- जी हां अखिल जी, मैं आपकी बात से सहमत हूं। चलिए दोस्तों, मैं बताती हूं कि जमीन की किल्लत में छत पर बनवा दिया खेल का मैदान।
चीन में एक स्कूल ने जमीन की किल्लत के चलते अपनी अंडाकार इमारत की छत को ही खेल का मैदान बना दिया है। यह स्कूल पूर्वी तटीय झेजियांग प्रांत के तियांताई चिचेंग जिले में स्थित है, जिसमें करीब 1800 छात्र पढ़ते हैं। इमारत की छत पर एक 200 मीटर लंबे रनिंग ट्रैक का निर्माण किया है।
स्कूल के प्रिंसिपल किउ तियांगुओ ने कहा कि ट्रैक 4 मंजिला अंडाकार शिक्षण इमारत की छत पर है जो छात्रों को खेलने और व्यायाम के लिए 3 हजार वर्ग मीटर स्थान उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया कि स्कूल के पास धरातल पर रनिंग ट्रैक के साथ खेल के मैदान को बनाने के लिए जगह का अभाव था।
सरकारी अखबार चाइना डेली से किउ ने कहा, "छत पर निर्मित ट्रैक ने समस्या का पूरी तरह समाधान कर दिया है। हमारे छात्रों को नया ट्रैक पंसद आया है।" शिक्षण इमारत के मुख्य वास्तुकार रुआन हाओ ने कहा कि जमीन पर रनिंग ट्रैक की परंपरा को तोड़ते हुए यह सीमित जगहों के साथ संचालित दूसरे स्कूलों के लिए भी एक समाधान हो सकता है।
अखिल- वाह... लाजवाब... बहुत ही अच्छी सोच है। जगह का अभाव होने पर इमारत की छत पर ही रनिंग ट्रैक बनवा दिया। स्कूल द्वारा उठाए गए अत्यंत सराहनीय कदम की दाद देनी चाहिए।
चलिए दोस्तों, अभी हम सुनते हैं एक गाना.. उसके बाद जारी रहेगी हमारी मस्ती की पाठशाला।









