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नये साल की खुशी में
2012-01-16 16:40:27

विकासः श्रोताओं को विकास का नमस्कार और आपका पत्र मिला कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है।

चंद्रिमाः आप सभी को चंद्रिमा का भी प्यार भरा नमस्कार।

विकासः चंद्रिमा जी, अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, नया साल आ चुका है, लेकिन चीनी कैलेंडर के अनुसार नया साल आने में अभी कितने दिन और हैं। क्योंकि, आजकल चीन में लोग वापस अपने घर जाने की तैयारी में दिख रहे हैं।

चंद्रिमाः जी हाँ, चीनी कैलेंडर के अनुसार नया साल 23 जनवरी को है। इसे चीन में वसंत त्योहार या छुन चिए भी कहा जाता है। यह चीनी लोगों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, लोग इस त्योहार को अपने परिवारजनों के साथ मनाते हैं। इसिलिए आपने देखा है कि, बहुत सारे लोग घर वापस जाने की तैयारी में लगे हुए हैं।

विकासः तो बात नये साल की है तो चलिए लगे हाथ श्रोताओं को इससे जुड़ी कुछ जानकारी भी दे देते हैं। इस साल चीनी पंचाग के अनुसार ड्रैगन साल है। और यह साल फिर 12 वर्ष के बाद ही दुबारा आएगा। चीन में ड्रैगन शुभ का सूचक है। जिन लोगों का जन्म ड्रैगन साल में होता है, उन्हें बहुत प्रभावशाली माना जाता है। चंद्रिमा जी इधर के कुछ दिनों में रेलवे टिकट को लेकर इंटरनेट पर या समाचार पत्रों में बहुत चर्चा रहा है।

चंद्रिमाः आपने बिल्कुल सही कहा है। क्योंकि त्योहार मनाने के लिए सभी लोग घर वापस जाना चाहते हैं, इसलिए रेलवे टिकट खरीदना भी एक मुश्किल भरा काम होता है। सरकार ने इन परेशानियों को दूर करने के लिए स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन किया है। सरकार की आशा है कि सभी लोग नियत समय पर अपने घर पहुँच कर अपने परिवारजनों के साथ नये साल की खुशियां मनाएं।

विकासः जी हां, हमें भी आशा है कि यह ड्रैगन साल लोगों के जीवन में अपार खुशी और नये अवसर लेकर आए। इसी के साथ हम अपने श्रोताओं की तरफ से चीनी बंधुओं को नया साल की हार्दिक शुभकामना भी देते हैं। चलिए अब नये साल की चर्चा के बाद, हम अपने श्रोताओं के पत्रों पर ध्यान देते हैं। इधर के दिनों में श्रोताओं के पत्र काफी ज्यादा मिल रहे हैं। हमारे कुछ श्रोता सी आर आई की वेबसाइट पर भी अपना कमेंट लिखते हैं।

चंद्रिमाः जी हां, मेरे हाथ में पहला पत्र राजकोट गुजरात से स्वामी चैतन्य बुधाजी से है। उन्होनें लिखा है कि सी आर आई की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर ढ़ेर सारी शुभकामनाएं और मुबारकबाद। सी आर आई द्वारा भेजा गया श्रोता वाटिका जून 2011 अंक मिल गया, पढ़कर बहुत प्रसन्नता हुई।

विकासः चंद्रिमा जी, इस पत्र की एक विशेषता है।

चंद्रिमाः इस पत्र में ऐसी क्या विशेषता है, मुझे तो समझ नहीं आ रही है।

विकासः आप देखिए, यह पत्र कितना छोटा है, अगर कहा जाए तो एक पन्ने का चौथाई से भी कम है, लेकिन इस छोटे से पत्र में उन्होनें अपने दिल की बात हम तक पहुंचा दी है। अगर सीधे तौर पर कहा जाए तो मालूम होता है कि राजकोट के ये श्रोता कागज बचाने में माहिर हैं, और पर्यावरण संरक्षण पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं।

चंद्रिमाः जी हां, अब मुझे समझ में आया। आजकल तो पर्यावरण संरक्षण पूरे विश्व में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है और जबतक सभी लोग जागरूक नहीं होंगे तबतक पर्यावरण सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा नहीं किया जा सकता है।

विकासः चलिए इसी के साथ दूसरा पत्र पढ़ते हैं। यह पत्र रांची झारखंड से सुकरा हेमरोम का है। उन्होनें लिखा है कि चीन का भ्रमण, चीन का तिब्बत, चीनी लोकगीत, आपका पत्र मिला सभी कार्यक्रम एक से बढ़कर एक होते हैं। लेकिन इसके साथ उन्होनें शिकायत भी किया है कि, वे लगातार कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते आ रहे हैं लेकिन आजतक उन्हें इनाम नहीं मिला है।

चंद्रिमाः सबसे पहले तो हेमरोम जी को बहुत-बहुत धन्यवाद। अगर आपको अभी तक कोइ इनाम नहीं मिला है तो निराश नहीं हों, आगे भी प्रतियोगिता में भाग लेते रहें। आपको इनाम जरूर मिलेगा।

विकासः जीहां, दोस्तों, किसी ने सच ही कहा है, निराशा से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है, अगर आप आशावान हैं तो आपको जीवन में सफलता जरूर मिलेगी। आशा है आपको हमारे सी आर आई की तरफ से इनाम भी जरूर मिलेगा। इसी के साथ मेरे हाथ में दुर्ग छत्तिसगढ़ से सुरीत रमेश साहू, हिरेन्द्र कुमार साहू का पत्र है। पत्र की शुरूआत उन्होनें इस तरह की है। किनारे पर रहकर नाव कभी पार नहीं होती, कोशिश मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। आशा है हमारे दूसरे श्रोता भी इससे जरूर प्रेरित होगें।

चंद्रिमाः उन्होनें आगे लिखा है कि सी आर आई के कार्यक्रम एक चंदन की वृक्ष की तरह है, जो हमारे कार्यक्रम के वातावरण को खुशनुमा बना देता है। सी आर आई के कार्यक्रम श्रोताओं के लिए एक से बढ़कर एक ज्ञान का खजाना है। जो देश विदेश, ज्ञान-विज्ञान, समाज, अर्थव्यवस्था, पर्यटन की संपूर्ण जानकारी देता है। साहू बंधु आपकी प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आशा करते हैं कि आप इसी तरह हमारे कार्यक्रम को सुनते रहेंगे और पत्र लिखते रहेंगे। विकास जी अगला पत्र कहां से है।

विकासः अगला पत्र जिला वर्धमान, पश्चिम बंगाल से रेडियो श्रोता संघ के ताप्ती सरकार, अदिति दास और रमा सरकार का है। इन सबों ने लिखा है कि सन् 1982 से बंगला प्रसारण सुनती आ रही हूँ, हाल में हिंदी प्रसारण सुनना शुरू किया है, बहुत अच्छा लग रहा है। हिन्दी प्रसारण के जरिए भारत तथा एशियाई देशों के बहुत सारे आंकड़े जान पाते हैं। निवेदन है कि हिन्दी विभाग की प्रसारण सूची, मैगजिन, जवाबी लिफाफा भेजने का कष्ट करेंगे।

चंद्रिमाः आप सभी लोगों का हिंदी कार्यक्रम सुनने के लिए स्वागत करते हैं। आशा करते हैं कि आपलोगों को जल्द ही सभी सामग्रियां मिल जाएंगी। सी आर आई की 70 वीं वर्षगांठ पर बधाई संदेश देने के लिए भी धन्यवाद। विकास जी अगला पत्र कच्छ गुजरात से है टिकम आर तलरेजा का है। पत्र देखकर ऐसा लग रहा है कि उन्होनें बहुत सारी बातें लिखी हैं लेकिन लिखावट साफ नहीं होने के कारण मैं पढ़ नहीं पा रही हूँ।

विकासः चंद्रिमा जी, जिस तरह चीन में कई तरह के लिपि कला हैं और आप उसे आसानी से पढ़ सकती हैं पर मेरे लिए तो असंभव है। उसी तरह भारत में भी कई लोगों का लिखने का ढ़ंग अलग-अलग है। लेकिन मैं इसे बिल्कुल पढ़ सकता हूँ। हाहाहाहहा

चंद्रिमाः अब चलिए मेरी असमर्थता पर हंसिए नहीं, अपने प्यारे श्रोता का पत्र पढ़िए।

विकासः मैं तो आपका हौसला बढ़ा रहा था। चलिए, पत्र पढ़ते हैं, उन्होनें लिखा है कि, आपकी भेजी हुई श्रोता वाटिका मिली, अपार शुक्रिया। आपका प्रसारण और आवाज बहुत साफ, मधुर और स्पष्ट है। चाइना का बांसुरी संगीत बहुत पसंद है। चाइनिज पैगोडा और वास्तुशैली काफी दिलचस्प होती है। तलरेजा जी आपके हौसलाआफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आशा करते हैं कि आप आगे भी हमारे कार्यक्रम का समर्थन करते रहेंगे।

चंद्रिमाः अगला पत्र गोपालगंज बिहार से कृष्णा कुमार राम का है। उन्होनें शिकायत के साथ-साथ कुछ सुझाव भी भेजा है। सबसे पहले उन्होनें शिकायत किया है कि उनके पत्रों को शामिल नहीं किया जाता है। कृष्णा जी ऐसा नहीं है कि हम जानबूझकर आपका पत्र शामिल नहीं करते हैं। हम कोशिश करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा श्रोताओं के पत्रों को शामिल किया जाए। कृष्णा जी ने सुझाव दिया है कि सुबह साढ़े नौ बजे से साढ़े दस बज का प्रसारण स्पष्ट नहीं होता है। हम आपके राय पर जल्द ही विचार करेंगे और तकनिकी विभाग से इसकी शिकायत भी करेंगे। आशा करते हैं कि हमारे श्रोता जल्द ही सुचारू रूप से प्रसारण सुन सकेंगे।

विकासः अगला पत्र हमारे श्रोता दीपक कुमार दास है। पत्र जरा देर से हमारे पास पहुंचा है। दीपक जी ने लिखा है कि, 10 मई 2011 को न्यूशिंग स्पेशल के तहत हेमा कृपलानी की विनायक पाठक और शाधना जी से भेंटवार्ता सुना। काफी दिलचस्प था। उनका कहना है कि, सी आर आई हिन्दी के विकास में पूर्ण योगदान दे रहा है। चीन और भारत बहुत तेजी से विकास की और बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में हिन्दी का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। दोनों देशों को सभी क्षेत्रों में सहयोग कर भारत-चीन मैत्री को और गहरा करना चाहिए। धन्यवाद दीपक जी, आपके बहुमूल्य विचारों के लिए।

चंद्रिमाः विकास जी मेरे पास एक बहुत ही दिलचस्प पत्र है। यह पत्र जौनपुर के चन्द्रेश मौर्य का है। उन्होनें हमें एक कविता भेजा है जिसका शिर्षक बचपन है। विकास जी क्या आपको बचपन अच्छा लगता था या युवा जीवन अच्छा लगता है।

विकासः सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि जीवन के हरेक आश्रम का अपना महत्व है। उसमें यह सही है कि बचपन का अलग स्थान है और सभी लोगों को बचपन का दिन बहुत अच्छा लगता है। या यूं कहे कि, जिंदगी की भागमभाग से बेखबर, जबाबदेही से बेपरवाह, किताबों के बोझ से बेखबर बचपन एक ऐसे कांटा की तरह है जिसकी मिठी चुभन लोगों को जिंदगी भर याद रहती है। चलिए हम अपने श्रोताओं को भी चंद्रेश मौर्य द्वारा लिखी गयी कविता का कुछ अंश पढ़कर सुनाते हैं।

याद आते हैं वो दिन बचपन के

हंस-हंस के बोलना, दोस्तों में खेलना

पल में रो देना, पल में हँसना

फूलों पे बैठी तितली को पकड़ना

चंचल हवाओं की तरह दौड़ना

गांव की पगडंडी वो गलियों में चलना

हर अल्फा़ज में कुछ नया लिखना

भूतों की कहानियों से डरना

पढ़ाई के नाम पर दर्द का बहाना करना

जाने कहां छूट गये वो लम्हें जीवन के

याद आते हैं वो दिन बचपन के।।

चंद्रिमाः बहुत अच्छी कविता थी। बहुत-बहुत धन्यवाद चन्द्रेश मौर्य जी। विकास

कार्यक्रम समाप्त होने का समय आ रहा है। इसी के साथ आज का अंतिम पत्र पढ़ते हैं। यह पत्र मुबारकपुर आजमगढ़ से दिलशाद हुसैन का है। पत्र में उन्होनें क्रिकेट रिपोर्ट की प्रशंसा की है तो वहीं कुछ क्रिकेट प्रेमियों को कोसा भी है। उनका कहना है कि क्रिकेट खेल में ज्यादा समय बर्बाद होता है। भारत की युवा पीढ़ियों पर क्रिकेट का नशा इस कदर छाया है कि उसके आगे सभी काम ठप। दिलशाद जी बहुत अच्छी बात कही है। किसी भी खेल से प्रेम करना अच्छी बात है, लेकिन उसके नशे में दूसरे कामों पर ध्यान न देना अच्छी बात नहीं है। इसलिए हमें अपने समय का सही उपयोग करते हुए सभी कामों को बराबर महत्व देना चाहिए।

विकासः आपने बिल्कुल सही कहा चंद्रिमा जी, कई बार हम छोटे-मोटे कामों को अनदेखी कर देते हैं जिससे कभी-कभी बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाता है। इसलिए श्रोताओं से हमारा यही सलाह है कि समय पर अपना काम पूरा करें। इसी के साथ हमारा समय भी पूरा होता है। अब चंद्रिमा और विकास को आज्ञा दीजिए। नमस्कार।।

चंद्रिमाः नमस्कार।

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