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हेपी सिंगल्स डे
2011-11-19 18:12:00

चंद्रिमाः यह चाइना रेडियो इन्टरनेशनल है। आज हम फिर मिलते हैं आप का पत्र मिला कार्यक्रम में। मैं हूं आप की दोस्त, चंद्रिमा।

विकासः और मैं हूं आप का दोस्त, विकास। चंद्रिमा जी, अब आपकी तबीयत कैसी है?सब कुशल मंगल है ना।

चंद्रिमाः बहुत बहुत धन्यवाद, विकास जी। आप मेरा इतना ख्याल रखते हैं। अब मैं बिल्कुल स्वस्थ हो गयी हूं। चिंता मत कीजिये, केवल थोड़ा सा जुकाम है, जल्द ही ठीक हो जाएगा।

विकासः चंद्रिमा जी, आप नहीं जानती हैं, न केवल मैं बल्कि हमारे कई श्रोताओं ने भी आपके स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखते हैं। जब पिछले कार्यक्रम में मैंने कहा कि आप बिमार होने के कारण कार्यक्रम प्रस्तुत नहीं कर सकती हैं। तो कई श्रोताओं ने पत्र लिखकर आप का हाल पूछा।

चंद्रिमाः अरे, सच। कौन-कौन हैं?और क्या-क्या लिखा है?

विकासः केसिंगा, ओडिशा के हमारे श्रोता सुरेश अग्रवाल ने हमें भेजे ई-मेल में लिखा है कि 9 नवंबर के "आपका पत्र मिला" में यह जान कर चिंता हुई की अस्वस्थता के कारण चंद्रिमा जी अनुपस्थित रहीं। मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।

चंद्रिमाः सुरेश जी, आप की बातें सुनकर मैं बहुत प्रभावित हूं, शायद आप की कामना से मैं जल्द ही स्वस्थ हो गयी। बहुत बहुत धन्यवाद।

विकासः इस पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि मुझे अत्यंत ख़ुशी है कि तमाम ग़लतफ़हमियों एवं मतभेदों के बावजूद भारत-चीन आर्थिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का विकास तीव्र गति से हो रहा है। दिनांक नौ नवम्बर को बीजिंग में आयोजित "गुजरात में निवेश के अवसर" नामक सम्मेलन तथा उसमें स्वयं भारत के तेज़ी से विकसित हो रहे प्रदेश गुजरात के होनहार मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण कहा जा सकता है। आशा है कि दोनों देशों के बीच समझबूझ का यह क्रम निरंतर ज़ारी रहेगा।

चंद्रिमाः जी हां, सुरेश जी। हमारी भी यही कामना है। चीन व भारत के बीच सहयोग की संभावना बहुत बड़ी है, लेकिन सहयोग की पूर्वशर्त को एक दूसरे को समझना है।

विकासः चंद्रिमा जी, पश्चिम बंगाल के हमारे श्रोता रवि शंकर बसु ने भी अपने पत्र में आप के स्वास्थ्य पर चिंता प्रकट की ।

चंद्रिमाः ओह, उन्होंने क्या लिखा?

विकासः उन्होंने लिखा है कि मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आप का पत्र मिला कार्यक्रम की उदघोषिका चंद्रिमा जी जल्द ही बिमारी के पंजे से मुक्त होकर कार्यक्रम में वापस हो सकेंगी।

चंद्रिमाः रवि शंकर बसु जी, आप की प्रार्थना अमल में आ गयी, आज मैं फिर एक बार आप का पत्र मिला कार्यक्रम में वापस लौटकर आप लोगों के साथ हूं।

विकासः साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि मैं पिछले 26 वर्षों में लगातार शॉटवेव रेडियो द्वारा हिन्दी कार्यक्रम सुनता आ रहा हूं। मुझे आप का पत्र मिला कार्यक्रम बहुत पसंद है। नवंबर 9 तारीख को प्रसारित आप का पत्र मिला कार्यक्रम में अंतरिक्षयान शनचो नंबर 8 के सफल प्रक्षेपण की चर्चा की गयी और कई श्रोताओं के बधाई पत्र भी पढ़े गये। लेकिन खेद की बात है कि उन पत्रों में मेरा पत्र शामिल नहीं है। ऐसा क्यों?

चंद्रिमाः रविशंकर जी, आप दुखी मत हों। शायद हमारे साथी ने इस बात से जुड़े पत्रों को इकट्ठा करते समय आप का पत्र नहीं देखा। कोई बात नहीं, आज हमने आप का पत्र देखा है और पढ़ा है।

विकासः चंद्रिमा जी, इस पत्र में रविशंकर जी ने दो सवाल भी पूछे हैं। पहला है चीन में साक्षरता दर कितना है? चीनी विद्यार्थी किस क्लास से अंग्रेज़ी सीखना शुरू करते हैं। और दूसरा सवाल यह है कि क्या चीन के लोकल ट्रेन में भिखारी देखे जा सकते हैं?क्योंकि यह दृश्य भारत में बहुत साधारण है।

चंद्रिमाः अच्छा, अब मैं उन दोनों सवालों का जवाब दूंगी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की आंकड़ों के अनुसार अब चीन में साक्षरता दर 91 प्रतिशत हो गयी। और चीनी बच्चों को प्राइमरी स्कूल से ही अंग्रेज़ी सीखनी पड़ती है। हाल के कई वर्षों में चीन सरकार विश्व से संपर्क रखने के लिये अंग्रेज़ी शिक्षा पर बड़ा ध्यान देती है। न केवल विद्यार्थियों को अंग्रेजी सीखने का मौका मिल रहा है। अगर आप चाहें, तो आप भी समाज में भिन्न-भिन्न स्तर की उचित अंग्रेजी कक्षा में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि बहुत सारे किंडर-गार्टन में अंग्रेजी शिक्षा भी मिल सकती है। और दूसरा सवाल का जवाब यह है कि चीन के ट्रेन में भिखारी बहुत कम मिलते है। मैंने तो ट्रेन में भिखारी कभी नहीं देखा। और विकास जी, क्या आप ने देखा है?

विकासः चीन जिस तेज गति से विकास कर रहा है या किया है उससे चीनी समाज में भी अमीरी और गरिबी के बीच एक गहरी खाई पैदा हो गई। चीनी ट्रेन में मैंने भी कभी भिखारी को नहीं देखा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि चीनी ट्रेन में आप बिना टिकट नहीं चढ़ सकते हैं और ट्रेन में भीख मांगना वर्जित है। हां यहां के बड़े शहरों में मेट्रो में कुछ लोगों को पैसा मांगते हुए देखा जा सकता है लेकिन यह भी बहुत कम है।

चंद्रिमाः श्रोता दोस्तो, क्या आपको पता है हमने यह गाना क्यों पेश किया है?

विकासः क्योंकि अब हम ऑनलाइन खेल रेलगाड़ी से ल्हासा तक यात्रा के विजेताओं की नामसूची पढ़ेंगे, और उन लोगों को मुबारकबाद देना चाहते हैं।

चंद्रिमाः जी हां। क्योंकि यह ऑनलाइन खेल लंबे समय तक चल रहा है, इसलिये इस में भाग लेने वालों की संख्या पहले से इतनी बड़ी नहीं है। तो सितंबर व अक्तूबर दो महिनों के लिये हमने केवल दस विजेताओं को चुना है। मेरे ख्याल से अब हमें एक नया खेल आयोजित करना चाहिए।

विकासः आपने बिल्कुल ठीक कहा, चंद्रिमा जी। मैंने भी ऐसा सोचा है। बाद में हम वेब से जुड़े कार्य संभालने वालों को यह ज़रूर बताएंगे।

चंद्रिमाः जी हां। पर सब से पहले हम विजेताओं के नाम पढ़ेंगे, ठीक है न?

विकासः जी हां। वे लोग क्रमशः हैं:राजकोट गुजरात से जिगर साह, इलाहाबाद से नलिनी अस्थाना, हैदराबाद से श्रीलक्ष्मी रेड्डी, पंजाब पाकिस्तान से अब्दुल मलिक, आजमगढ़ से महेंद्र कुमार, दिल्ली से मोहम्मद खान, पश्चिम बंगाल से हबु सान्याल, राजस्थान से शुभम जागीड, मुजफ्फरपुर बिहार से मुकेश कुमार और अंधेरी मुंबई से कृतिका बियानी।

चंद्रिमाः उक्त सभी दोस्तों को हम मुबारक देते हैं। और मैं आप लोगों को यह सूचना भी देना चाहती हूं कि कल हमने आप लोगों को उपहार भी भेज दिया है। विश्वास है कि ये उपहार जल्द ही आप लोगों के पास पहुंच सकेंगे।

विकासः अच्छा, बधाई पत्र पढ़ने के बाद हम पत्र पढ़ना जारी रखते हैं। कलेर अरवल, बिहार के श्रोता मो. आसिफ़ खान ने हमें भेजे पत्र में यह लिखा है कि मैं सी.आर.आई. हिन्दी सेवा का नियमित श्रोता हूं। बिहार, झारखंड एवं बंगाल में अधिक से अधिक श्रोताओं को सी.आर.आई. के कार्यक्रम को बताना, एवं सी.आर.आई. के कार्यक्रम को सुनने के लिये प्रेरित करना, हमारा उदेश्य है। हमारे क्लब के सदस्य श्रोता वाटिका के अंक 27 को ध्यान पूर्वक पढ़ा। इस में संपादक की बातें, खनास की यात्रा, शिहाजी शहर एवं उरुमची के बारे में विशेष जानकारी प्राप्त हुई। 14 मार्च का चीन का तिब्बत प्रोग्राम सुना। उस में तिब्बत में शिक्षा का विकास की जानकारी दी गयी। एवं तिब्बती गीत सुनाया गया। सचमुच चीन के प्रयास तिब्बत का विकास अपने परम सीमा पर पहुंच चुका है। तिब्बत के लोगों के जीवन स्तर में काफ़ी सुधार आया है।

चंद्रिमाः आसिफ़ भाई, आप के कल्ब द्वारा सी.आर.आई. के लिये किया गया समर्थन के लिये हम बहुत आभारी हैं। आशा है आप पहले की ही तरह हमारा सहयोग कर सकेंगे।

विकासः चंद्रिमा जी, क्या आप जानते हैं कि 11 नवंबर को क्या दिवस है?

चंद्रिमाः मैं बिल्कुल जानती हूं। वह एक बहुत दिलचस्प दिवस है, जिस का नाम सिंगल्स डे, ठीक है न?क्योंकि उसी दिन हमारे ऑफ़िस में कई लड़की व लड़के ने इस की चर्चा की।

विकासः जी हां। यह दिवस विशेष तौर पर उन युवकों के लिये है, जिन के पास प्रेमी नहीं है। और सुना है कि ठीक उसी दिन बहुत स्थानों पर जैसे पार्क या बड़े शॉपिंग मॉल में प्रेमी ढूंढ़ने का मेला भी आयोजित किया गया है।

चंद्रिमाः मुझे आशा है कि ज्यादा से ज्यादा लड़के या लड़कियां ऐसे मेले में अपने मनचाहे दोस्त को प्राप्त कर सकते हैं।

विकासः तो इस दिवस के अवसर पर हम एक मधुर चीनी गीत पेश करेंगे। गीत के बोल हैं रोमेंटिक बनाइये। इस गीत में गायक ने हमें यह बताया कि हमें साधारण जीवन में कुछ रोमेंटिक बनाना चाहिए, ऐसा करके प्रेम हमेशा दोनों व्यक्तियों के बीच होगा। अब लीजिये सुनिये।

चंद्रिमाः मधुर गीत के बाद अब मैं और एक पत्र पढ़ूंगी, जो रांची खुंती, तोरपा झारखंड के श्रोता मोयलेन हेमरोम द्वारा लिखा गया। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि हमने स्पेशल कार्यक्रम जिसको हेमा कृपलानी दीदी जी ने प्रस्तुत किया, यह जानकर आश्चर्य हुआ कि चीनी युवक व युवतियां चीन में हिन्दी भाषा को महत्वपूर्ण भाषा समझते हुए, हिन्दी भाषा सीख रहे हैं। और कार्यक्रम में कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ चाइना, में अध्ययन करने वाले चीनी युवतियां से बातचीत सुनी और भारतीय फिल्म गीत के अंश भी सुने, जो काफ़ी प्रशंसनीय लगे। मैत्री की आवाज़ कार्यक्रम के अंतर्गत, दिल्ली के रवि कुमार एवं योगेश्वर त्यागी जी से भारत-चीन आदान-प्रदान वर्ष एवं दोनों देशों के सरकार द्वारा 500 युवाओं की एक दूसरे के यहां आवाजाही द्वारा कला संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को सीखने एवं देखने पर विशेष चर्चा की गयी है। योगेश्वर त्यागी जी का कथन बिल्कुल सही लगा कि जो भी श्रोता जिस राज्य के हो, जहां से आते हो, सी.आर.आई. हिन्दी को आगे बढ़ाने एवं चीन-भारत मित्रता को आगे बढ़ाने में जितना हो सके, मदद अपने अपने स्तर से करना चाहिए। कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा।

विकासः हेमरोम जी, यहां हम यह कहना चाहते हैं कि आप लोगों जैसे श्रोताओं के समर्थन के बिना हमारा सी.आर.आई. इतना तेजी से विकसित नहीं हो सकता है। इसलिये सी.आर.आई. की 70वीं वर्षगांठ के सुअवसर पर मैं और चंद्रिमा जी, सी.आर.आई. के सभी कर्मचारियों की ओर से आप और आप जैसे सभी प्यारे श्रोताओं को सच्चे दिल से आप सभी को धन्यवाद देना चाहते हैं और आशा करते हैं कि आगे भी इसी तरह आप हमारा समर्थन करते रहेंगे।

चंद्रिमाः बहुत बहुत शुक्रिया। अच्छा, दोस्तो, शुक्रिया के साथ आज का कार्यक्रम भी समाप्त होता है। अगले हफ्ते हम ठीक इसी समय यहां फिर मिलेंगे।

विकासः जी हां। और अब हम एक साथ सुनें आप की आवाज़ ऑन लाइन।

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