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बकरीद के मुबारक हो
2011-11-19 18:10:44

चंद्रिमाः यह चाइना रेडियो इन्टरनेशनल है। बहुत खुशी के साथ आज हम फिर मिलते हैं आप का पत्र मिला कार्यक्रम में। मैं हूं आप की दोस्त, चंद्रिमा।

विकासः और मैं हूं आप का दोस्त, विकास।

चंद्रिमाः विकास जी, क्या आप जानते हैं कि आजकल कौन सा त्योहार मनाया जा रहा है?

विकासः बिल्कुल जानता हूं। इस हफ्ते के सोमवार को ईद उल-जुहा है। यह त्योहार इस्लाम का सब से दो महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। संसार के सभी मुसलमान भाई बहुत धूमधाम से इस त्योहार की खुशी मनाते हैं।

चंद्रिमाः जी हां, इसलिये आज के कार्यक्रम में सब से पहले हम हमारे सभी श्रोताओं, जो इस्लाम धर्म के अनुयायी हैं, को बकरीद की मुबारक देते हैं।

विकासः चंद्रिमा जी, बकरीद सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम देशों में मनाया जाता है। दिल्ली में स्थित हमारे श्रोता शाहिद आजमी ने पूछा है कि चीन में बकरीद कैसे मनाते हैं। चंद्रिमा जी कृप्या आप बताने की कृपा करें क्योंकि आप भी एक चीनी हैं।

चंद्रिमाः ठीक है। यह त्योहार चीन में ह्वेइ, वेवूर, कज़ाक, उज़बेक, ताजिक, तातार, किरगिज़, सालार, तुङश्यांग व बाओआन आदि अल्पसंख्यक जातियों में मनाया जाता है। चीन के शिनच्यांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश में स्थित वेवूर, कज़ाक व किरगिज़ आदि जातियां इस त्योहार को कुर्बान कहती हैं। इस त्योहार से पहले सभी परिवार पूरे घर की सफ़ाई अच्छी तरह से करके त्योहार के केक व मिठाई बनाने में व्यस्त रहते हैं। ठीक उसी दिन के सुबह सभी मुसलमान नहाने के बाद सुन्दर कपड़े पहनकर मसजिद में नमाज़ पढ़ते हैं। खास तौर पर वेवूर जाती के लिये हर वर्ष का कुर्बान वे धूमधाम से शहरों या गांवों के मैदान में बड़ा नृत्य-गान मेला आयोजित कर मनाते हैं। त्योहार के दौरान कज़ाक, किरगिज़, ताजिक, उजबेक आदि जातियां भेड़ पकड़ने का मैच, घुड़दौड़, कुश्ती आदि खेलों का आयोजन भी करती हैं।

विकासः पेइचिंग में इस त्योहार को मनाने के लिए चीनी इस्लामी संघ ने 6 नवंबर की रात को पेइचिंग में सत्कार-समारोह भी आयोजित किया, जिसमें चीनी उप प्रधानमंत्री हुई ल्यांगयु, चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थाई समिति के उपाध्यक्ष इस्माइल टिलिवाल्डी आदि उपस्थित थे। उन्होंने पेइचिंग स्थित इस्लामियों एवं विभिन्न जातियों के मुस्लिम प्रतिनिधियों, चीन स्थित अरब इस्लामी देशों के दूतों और विभिन्न देशों के मुस्लिम विशेषज्ञों के साथ इस त्योहार की खुशियां मनायीं।

चंद्रिमाः साथ ही चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय समिति के स्थायी सदस्य, चीनी इस्लामी संघ के अध्यक्ष छन क्वांगयुन ने भाषण देते हुए कहा कि चीनी इस्लामी संघ चीन की विभिन्न जातियों के मुसलमान के लिए सेवा करेगा, लोगों को एकीकृत कर और ज्यादा अच्छी बात करेगा, समाज का आर्थिक विकास बढ़ाने और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करने में नया योगदान करेगा।

विकासः अच्छा, बकरीद की काफी चर्चा हो गई। अब हम श्रोताओं के पत्रों को पढ़ते हैं। केसिंगा, ओडिशा के हमारे श्रोता सुरेश अग्रवाल ने हमें भेजे ई-मेल में यह शिकायत की कि दिनांक पहली नवम्बर को "न्यूशिंग स्पेशल" के तहत वही कार्यक्रम दोहराया गया, जो कि हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में न्यूजीलैंड में हिंदी की स्थिति पर श्रीमती सुनीता नारायण से हेमाजी द्वारा ली गई भेटवार्ता पर आधारित था। "मैत्री की आवाज़" में भी खुल्लर जी की बातचीत पूर्वप्रसारित थी। समझ में नहीं आता कि इन दिनों इस तरह की पुनरावृत्ति के पीछे आपकी क्या मजबूरी है। आशा है कि इस पर गौर फरमाएंगे, धन्यवाद्।

चंद्रिमाः सुरेश जी, सब से पहले हम आप के हर दिन हमारे कार्यक्रम पर ध्यान देने का बहुत बहुत धन्यवाद देते हैं। अब मैं आप को कार्यक्रम फिर एक बार प्रसारित करने के दो कारण समझाऊंगी। पहला कारण यह है कि आजकल हमारे कई उदघोषक व उदघोषिका इन्टरव्यू लेने के लिये चीन के अन्य प्रांतों में दौरा कर रहे हैं। दूसरा कारण यह है कि कुछ तकनिकी खराबी के कारण कार्यक्रम दुबारा प्रसारित हो जाते हैं।

विकासः सुरेश जी, आशा है आप हमारे उत्तर से संतुष्ट हो सकें। हम ज़रूर आप की राय पर ध्यान देकर हर दिन नये-नये कार्यक्रम तैयार करने की कोशिश करेंगे।

चंद्रिमाः विकास जी, क्या आप यह खबर जानते हैं कि 3 नवंबर के तडके थ्येन कोंग नंबर एक अंतरिक्ष यान और शेन चो नंबर 8 अंतरिक्ष यान सुचारू रूप से जोड़े गये। अंतरिक्ष में चीनी अंतरिक्ष यानों का प्रथम मिलन व जुडाव सफल रहा। इस तरह चीन अमेरिका व रूस के बाद स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष यानों को जोडने की तकनीक पर माहिर करने वाला तीसरा देश बन गया।

विकासः जी हां। यह तो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी बात है। हमारे बहुत श्रोताओं ने इस की चर्चा भी की। इलाहाबाद के हमारे श्रोता रवि श्रीवास्तव ने हमारी वेबसाइट पर यह लिखा है कि चीन के अंतरिक्ष-अभियान के इतिहास में पहली डाँकिंग प्रायोगिक तौर पर पहली नवंबर के तड़के चीन के समानव अंतरिक्ष परियोजना के शनचो-8 अंतरिक्ष यान सटीक रूप से पूर्वनिश्चित कक्षा में दाखिल हो गया है और इस तरह वह सफलतावूर्वक प्रक्षेपित हुआ है। ऐसे मौक़े पर मैं बधाईयाँ देता हूँ। हाथों के द्वारा डाँकिंग करने की क्षमता से युक्त पहला समानव अंतरिक्ष यान शनचो -8 एक नवम्बर को छोड़ा जाना है। इस ऐतिहासिक मौके पर हमारी दिली शुभकामनाएँ चीनी जन समुदाय के साथ हैं, उम्मीद है चीन की अंतरिक्ष परियोजनाएँ यूँ ही उच्च तीव्रता के साथ विकास के दौर में पहुँचेंगी।

चंद्रिमाः साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि और थ्येन कोंग नंबर एक अंतरिक्ष यान और शेनचो-8 अंतरिक्ष यान के सफलता पूर्वक जोड़े जाने पर बहुत बधाई! ये प्रसन्नता की बात है कि चीन वर्ष 2012 में लगातार शेन चो नौ व दस अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित कर थ्येन कोंग नंबर एक से जोडेगा। हमारी मंगलकामनाएँ सदैव आपके साथ हैं।

विकासः बहुत बहुत धन्यवाद, रवि श्रीवास्तव जी।

चंद्रिमाः हमारे मोनिटर छत्तीसगढ़ के ग्रीन पीस डी एक्स क्लब के अध्यक्ष चुन्नीलाल कैवर्त ने वेब पर यह लिखा है कि मानव रहित अंतरिक्ष यान शनचो-8 के सफल प्रक्षेपण पर चीन के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और सभी चीनी भाई बहनों को हार्दिक बधाई। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चीन की यह सबसे लम्बी छलांग है। अंतरिक्ष-यान की डाँकिंग तकनीक का सफल परीक्षण, चीन की ऐतहासिक और शानदार उपलब्धि है।

विकासः पश्चिम बंगाल के बिधानचंद्र सान्याल ने इस बात पर कहा है कि हमें यह जानने पर बहुत खुशि हुई कि चीन ने शनचो-8 अंतरिक्षयान को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। अंतरिक्ष परियोजना के लिये यह सफलता अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें आशा है कि इस से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। और दोनों चीनी अंतरिक्षयान सफलतापूर्वक जोड़ने की समाचार से हम बहुत खुश हुए। मैं इस में भाग लेने वाले वैज्ञानिकों व तकनीशियनों को बधाई देना चाहता हूं।

चंद्रिमाः उक्त सभी श्रोताओं को बहुत बहुत धन्यवाद। हम सभी चीनी लोग भी इस सफलता पर बहुत खुशी व गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अब हम इस खुशी को मनाने के लिये एक मधुर चीनी गीत पेश करेंगे, गीत के बोल हैं महान चीन। इस गीत में गायक काओ फ़न ने ऐसा गाया है कि हमारा एक परिवार है, जिस का नाम चीन है। भाई और बहन बहुत हैं, और दृश्य भी सुन्दर। घर पे दो ड्रेकन स्थित हैं, वे हैं यांगत्सी नदी व पिली नदी। और सब से ऊंची चीटी तो चुमुलांगमा है। लंबी दिवार बादल के बीच खड़ी है, और छिंगहाए तिब्बत पठार आसमान से ज्यादा विस्तृत है। हमारा महान चीन है, एक बड़े परिवार जैसा। मैं हमेशा तुम्हारा साथ दूंगा। और तुम हमेशा मेरे दिल में हो।

विकासः अच्छा, मधुर गीत के बाद अब हम और कुछ पत्र पढ़ेंगे। मुज़ाफ्फरगढ़, पाकिस्तान के पाक लिस्नर्स कल्ब के अध्यक्ष मुब्बशीर हुसैन ऐशर ने हमें भेजे पत्र में यह लिखा है कि आशा है सी.आर.आई. के सभी कर्मचारी ठीक हैं। मैं और मेरे कल्ब के सभी सदस्य बहुत प्रसन्नता के साथ आप लोगों के कार्यक्रम सुनते हैं। हिन्दी सेवा का सिग्नल बहुत साफ़ व अच्छा है, जैसे एक स्थानीय रेडियो ही है। हम प्रति दिन बड़े चाव से आप लोगों के कार्यक्रम सुनते हैं। और आप लोगों के कार्यक्रम से हम चीन के बारे में खूब जानकारियां प्राप्त करते हैं। आप लोगों की मेहनती के लिये हम बहुत आभारी हैं।

चंद्रिमाः अशेर जी, धन्यवाद की कोई बात नहीं है, यह तो हमारा कर्तव्य है। और हमें बहुत खुशी हुई कि आप लोग हमारे रेडियो से चीन के बारे में कुछ जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप को चीन से जुड़े और कुछ सवाल हो, तो हमें पत्र से ज़रूर बताएं। हम आप का पत्र मिला कार्यक्रम में इस का जवाब ज़रूर देंगे।

विकासः जी हां। अब हम आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश के पैगाम रेडियो लिस्नर्स कल्ब के अध्यक्ष दिलशाद हुसैन के कुछ सवालों का जवाब देंगे। पहला प्रश्न है चीन के प्रथम अन्तरिक्ष यात्री का क्या नाम था?चीन का संयुक्त राष्ट्र संघ में कब प्रवेश हुआ?

चंद्रिमाः अब मैं एक एक करके आप के सवालों का जवाब दूंगी। चीन के प्रथम अंतरिक्ष यात्री का नाम यांग ली वेइ है। वे सुरक्षा के साथ अंतरिक्ष में 21 घंटों व 23 मिनट और 6 लाख किलोमिटर की यात्रा की। वे चीन के प्रथम अंतरिक्ष यात्री हैं। दूसरा प्रश्न का उत्तर यह है कि वास्तव में वर्ष 1945 में चीन संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थापकों में से एक है। पर उसी समय कोमिंगतांग पार्टी चीन सरकार का प्रतिनिधि था। वर्ष 1971 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नंबर 2758 प्रस्ताव पास करके चीन लोक गणराज्य के अधिकारी को बहाल किया, यानि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कोमिंगतांग पार्टी की जगह लेकर चीन सरकार का प्रतिनिधि बन गया।

विकासः आशा है दिलशाद हुसैन साहब हमारे उत्तर पर संतुष्ट हैं। इस पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि आजकल आप का प्रसारण अत्यंत साफ़ सुनाई देता है। भारत और चीन की आबादी संसार में सब से ज्यादा है। दोनों देशों का इतिहास बहुत पुराना होने के साथ साथ, उन के बीच आवाजाही का इतिहास भी कम से कम 2200 साल लंबा है। दोनों देशों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने मानव जाति की समृद्धि और दुनिया की प्रगति के लिये बड़ा योगदान दिया है। वर्तमान काल में एशिया के विभिन्न देशों की आर्थिक प्रगति तेजी से बढ़ रही है। अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास के साथ साथ अवश्य ही संस्कृति अत्यधिक समृद्ध होगी। इससे एशिया के विभिन्न देशों के राजनीतिक आर्थिक विकास को बल मिलेगा। भारत और चीन इस विकास में मुख्य पात्र बनकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे, एशिया के विभिन्न देशों के राजनीतिक व आर्थिक विकास को प्रेरक शक्ति बनेंगे और अधिक योगदान करेंगे। इस विकास के रुझान को दुनिया के समस्त लोग समझने लगे हैं। ऐसी हालत में भारत व चीन को और अच्छी तरह अपने देश का निर्माण करने के लिये एक दूसरे से सीखना और आदान-प्रदान करना बेहद जरूरी है।

चंद्रिमाः साथ ही उन्होंने लिखा है कि आज बड़ी खुशी की बात है कि भारत और चीन का संबंध लगातार सुधरने के साथ ही दोनों देशों की दोस्ती दिन ब दिन गहरी होती जा रही है। साथ ही ज्यादा से ज्यादा भारतीय लोग चीन को जानने की जिज्ञासा रखते हैं। इसी तरह ज्यादा से ज्यादा चीनी लोग भी भारत को जानने की जिज्ञासा रखते हैं।

विकासः दिलशाद हुसेन साहब, हम आप की बातों से बिल्कुल सहमत हैं। आशा है ज्यादा से ज्यादा चीनी व भारतीय लोगों को दोनों देशों के सहयोग से लाभ मिल सकेंगे।

चंद्रिमाः अंत में हम पढ़ेंगे पाकिस्तान के लियाकत अली अवान का एक पत्र। इस में उन्होंने लिखा है कि मैं अक्सर आप लोगों का प्रोग्राम सुनता हूं। वर्ष 2006 के अगस्त में मैं ने ऊर्दू विभाग के विशेष पुरस्कार विजेता के रूप में सी.आर.आई. का दौरा किया। उसी समय मैंने हिन्दी विभाग का दौरा भी किया। क्या आप लोगों को याद आती है? मुझे हिन्दी व चीनी गीत बहुत पसंद है। कृप्या आप मुझे श्रोता वाटिका भेजिये।

विकासः वर्ष 2006 की बात है, उस समय मैं सी.आर.आई. में काम नहीं करता था। शायद केवल कुछ वरिष्ठ लोगों को आपकी याद होगी। पर हम बहुत खुश हैं कि ऊर्दू विभाग के श्रोता के रूप में आप हमारे हिन्दी कार्यक्रम पर भी बड़ा ध्यान देते हैं। हम ने आप का पता हमारे डाक लिस्ट में शामिल किया है, अगली बार आप को ज़रूर हमारी पत्रिका श्रोता वाटिका मिल सकेगी।

चंद्रिमाः अच्छा, इस पत्र के साथ आज का आप का पत्र मिला कार्यक्रम यहीं तक समाप्त होता है। अब लीजिये सुनिये आप की आवाज़ ऑन लाइन।

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