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ब्रिक्स देश अंतर्राष्ट्रीय अर्थतंत्र को मंदी से उबारने में सक्षम
2012-03-29 15:45:25
ब्रिक्स देशों की चौथी शिखर बैठक इस माह की 28 से 29 तारीख तक नयी दिल्ली में आयोजित हो रही है । इस शिखर बैठक में आर्थिक मुद्दा बेशक बाहरी दुनिया का सब से ध्यानाकर्षक केंद्र रहा है । पता चला है कि शिखर वार्ता के दौरान चीनी विकास बैंक और ब्राजिली विकास बैंक समेत ब्रिक्स देशों की वित्तीय संस्थाएं मौद्रिक आपसी कर्ज मेमोरंडम भी संपन्न कर देंगी । चीनी सामाजिक अकादमी के लातिन अमरीकी अनुसंधान प्रतिष्ठान के ब्राजिल अनुसंधान केंद्र के महा सचिव चओ ची वी का मानना है कि इस समझौते का अर्थ है कि न सिर्फ भविष्य में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में अपने देश की मुद्रा का प्रयोग होगा , ताकि विनिमय दर की लागत व जोखिम कम हो सके , बल्कि यह अभिव्यक्त भी हो गया है कि ब्रिक्स देश अंतर्राष्ट्रीय नयी आर्थिक व्यवस्था की स्थापना करने पर आश्वस्त हैं ।

लातिन अमरीकी क्षेत्र के प्रतिनिधि की हैसियत से ब्राजिल इस शिखर बैठक में ब्रिक्स देशों की संयुक्त विकास बैंक की स्थापना पर बड़ी दिलचस्पी दिखायी । इस बात की चर्चा में चओ ची वी ने कहा कि ब्राजिल का ब्रिक्स देशों के विकास बैंक मुद्दे को बढावा देने का अपना मकसद है । उन्होंने कहा कि चीन ,भारत और रुस की तुलना में ब्राजिल मुख्यतः नीची निवेश दर का सामना कर रहा है , यदि ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना होगी , तो ब्राजिल अपने आधारभूत संस्थापनों के निर्माण में अधिक बाहरी पूंजी प्राप्त करने , अपने देश की आर्थिक वृद्धि को बढाने के लिये लाभप्रद है ।

ब्रिक्स देशों का सहयोग तंत्र वर्तमान दुनिया में एकमात्र बड़े विकासमान देशों से गठित एक सहयोग प्रणाली ही है , उस का आर्थिक मूल्य व क्षेत्रीय राजनीतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है , इसीलिये अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान उसी पर केद्रित है ।

गत वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में भारी परिवर्तन हुआ है , यूरोपीय कर्ज संकट में बिगाड़ और पश्चिम एशियाई और उत्तरी अफ्रीकी परिस्थितियों में उतार चढाव से लोग ब्रिक्स देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले नवोदिक समुदायों पर बड़ी आशाएं बांधे हुए हैं ।

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